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कभी एक देश रहे पर द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बन गए दुश्मन, प्रॉक्सी वार का शिकार कोरिया

Fri, 27 Apr 2018 09:13 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Fri, 27 Apr 2018 09:13 PM IST
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Historic facts of Korea, how Country divides in North and South

कोरिया एक देश हुआ करता और दसवीं शताब्दी तक यहां कोर-यो वंश का शासन था। कोरिया की चीन और जापान से हटकर अपनी एक अलग संस्कृति थी। पर बाद में राजवंश कमजोर होने लगा और 1910 में इस देश पर जापान का कब्जा हो गया। 1945 तक यहां जापान का ही कब्जा रहा, पर द्वितीय विश्व युद्ध के आखिरी दिनों में जब जापान से बदला लेने के लिए अमेरिका पहुंचा तो कोरिया जंग का मैदान बन गया। 

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विश्व युद्ध खत्म होने पर मित्र देशों के समझौते के तहत आधे हिस्से दक्षिण कोरिया पर अमेरिका और आधे हिस्से उत्तर कोरिया पर रूस का कब्जा हो गया। पांच साल में कोरियाई नेताओं को आजादी का भरोसा दिलाया गया। पर 1948 से ही जनता ने विरोध प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। इसके चलते उसी साल दक्षिण में अमेरिका और उत्तर में रूस के समर्थन वाली सरकारें बनीं। इसके बाद शुरू हुआ साम्यवाद और लोकतंत्र के बीच संघर्ष। 1950 में उत्तर कोरिया ने दक्षिण पर हमला कर दिया। दक्षिण का बड़ा हिस्सा उत्तर के कब्जे में आ गया। पर बाद में अमेरिका ने अपने सैनिक भेज दिए। अमेरिकी सेना उत्तर कोरिया की चीन सीमा तक पहुंच गई। 
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तभी चीन ने स्वयंसेवकों के नाम पर अपने लाखों सैनिक उत्तर कोरिया में भेज दिए। तीन साल तक यह जंग चलती रही। आखिर में 1953 में युद्ध खत्म हुआ। इस जंग को खत्म कराने में भारत की गुट निरपेक्ष नीति का बड़ा योगदान था। पर तब से उत्तर और दक्षिण कोरिया में युद्ध की स्थिति बनी हुई है। दक्षिण कोरिया ने अमेरिकी मदद से तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़कर तरक्की हासिल कर ली। वहीं उत्तर कोरिया साम्यवाद की राह पर चलकर परमाणु शक्ति संपन्न देश बन गया है।
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शक्ति हासिल करने के बाद बदला उत्तर कोरिया

उत्तर कोरिया ने परमाणु और मिसाइल ताकत हासिल कर ली है। इसलिए किम सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। सत्ता हासिल करने के बाद कभी अपने देश से बाहर न निकले किम की हाल की चीन यात्रा इसका प्रमाण है। अब वह उत्तर कोरिया को आर्थिक ताकत बनना चाहते हैं, इसलिए दक्षिण कोरिया के साथ नरम रुख अपना रहे हैं। 

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