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ग्रीस: जनमत संग्रह में 'ना' के हक में किए ज्यादा वोट

Mon, 06 Jul 2015 08:23 AM IST
Updated Mon, 06 Jul 2015 08:23 AM IST
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ग्रीस में बेलआउट पैकेज को लेकर जनमत संग्रह की वोटिंग ख़त्म होने के बाद दो तिहाई वोटों की गिनती पूरी हो चुकी है। कर्जदाताओं ने बेलआउट पैकेज को 'ना' कह दिया है। गृह मंत्रालय ने आंकड़े जारी कर बताया है कि जितने वोट पड़े हैं उनमें से 61 प्रतिशत लोगों ने 'ना' के हक में वोट दिया है। वहीं दूसरी तरफ बेलआउट पैकेज का समर्थन केवल 39 प्रतिशत लोगों ने ही किया।

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इससे पहले आर्थिक संकट में फंसे ग्रीस के प्रधानमंत्री एलेक्सिस त्सिप्रास ने पहले ही बेलआउट की शर्तों को नकार दिया था। साथ ही लोगों से भी अपील की थी कि वो 'ना' के ही समर्थन में वोट करें।
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रास्ता निकाला जाएगा
ग्रीस के उप विदेश मंत्री युक्लिड स्कालोटोस ने एक साक्षात्कार में कहा, ''सरकार के पास अब एक लोकप्रिय जनादेश है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें कहा गया है कि ग्रीस इस स्थिति में ज़्यादा दिन तक नहीं रह सकता है।''
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उन्होंने आगे कहा, ''ऐसे में हमारे पास अब ऐसी दो वजह हैं जिसके चलते हमें जल्द से जल्द इस स्थिति से निपटने के लिए रास्ता निकालना पड़ेगा जो आर्थिक रूप से मज़बूत हो।''

ग्रीस के राष्ट्रपति प्रोकोपिस पावलोपोलोस ने देश की एकता पर ज़ोर दिया है। सरकार ने वोटरों बेल आउट प्रस्तावों के खिलाफ वोट डालने का आग्रह किया है लेकिन विरोधियों का कहना है कि इससे ग्रीस यूरोज़ोन से बाहर हो सकता है।

सत्ताधारी सिरिज़ा पार्टी के नेताओं ने बेलआउट की शर्तों को अपमानजनक बताया है। उनका कहना है कि अगर इन शर्तों को नकार दिया गया तो देश पर कर्ज को लेकर बातचीत में फायदा हो सकता है।

ग्रीस के बैंक को मिलने वाली मदद रुक सकती है

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प्रधानमंत्री एलेक्सिस सिप्रास ने कहा, "लोगों के भाग्य को अपने हाथ में लेने के इरादे को कोई नज़रअंदाज नहीं कर सकता।" हालांकि अंतरराष्ट्रीय कर्जदाताओं का कहना है कि अगर ग्रीस ने बेलआउट की शर्तों के खिलाफ वोट किया तो इससे ग्रीस के बैंक को मिलने वाली मदद रुक सकती है।

शुक्रवार को दोनों तरह की राय रखने वाले लोगों ने राजधानी एथेंस में रैलियां की थीं। रविवार को एथेंस के एक पोलिंग स्टेशन पर अस्सी साल की महिला एनेस्तेसिया ने कहा कि वो उन्होंने बेलआउट की शर्तों के खिलाफ वोट दिया क्योंकि उनका अपनी पेंशन से गुजारा नहीं होता।

वहीं 56 साल के बैसिल ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि उन्होंने बेलआउट के पक्ष में वोट दिया।

डराना ग़लत

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ग्रीस के वित्त मंत्री यानिस वेरोफ़ाकिस ने कहा कि यूरोपीय यूनियन के पास ग्रीस को यूरोज़ोन से बाहर करने का कोई कानूनी आधार नहीं है। उन्होंने जनमत संग्रह के पहले कहा," उन्होंने हमें बैंक बंद करने के लिए बाध्य क्यों किया? लोगों को भयभीत करने के लिए और डराना चरमपंथ कहलाता है।"

वित्तमंत्री ने कहा कि चाहे जनमत संग्रह का नतीजा जो भी ग्रीस के बैंक मंगलवार को खुलेंगे और बेलआउट की शर्तों के खिलाफ नतीजे आते हैं तब भी प्रधानमंत्री सिप्रास कर्जदाताओं के साथ समझौता करने में कामयाब होंगे। उधर जर्मनी के वित्त मंत्री वोल्फ़गांग शायब्ले ने कहा है कि अगर ग्रीस को यूरोज़ोन छोड़ना भी पड़ा तो ये कुछ समय के लिए होगा।

इटली के प्रधानमंत्री मत्तेओ रेन्ज़ी ने कहा है कि जनमत संग्रह का नतीजा चाहे जो रहे यूरोपीय यूनियन और ग्रीस के बीच बातचीत इस सप्ताह शुरु होनी चाहिए।

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