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कल के दुश्मन, आज बने दोस्त

Thu, 15 Nov 2012 09:19 PM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Thu, 15 Nov 2012 09:19 PM IST
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foes now friends

अमूमन अपने समाज में हम आप सुनते रहते हैं कि दो पुराने दोस्त अब दुश्मन बन गए हैं, लेकिन ऐसा कम ही होता है जब दो दुश्मन दोस्त बन जाएं। अगर दोस्त बन भी गए तो भी एक दूरी बनी रहती है। वो अपनी रोटी बांट कर खा तो लेंगे लेकिन शायद मिलकर रोटी बना नहीं पाएं।

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लेकिन यह कहानी बेहद दिलचस्प है। नाटो के सैन्य अभियान में एक दूसरे की जान के दुश्मन रहे अमेरिकी वायुसेना पायलट और यूगोस्लावियाई सेना कमांडर अब पक्के दोस्त बन गए हैं।
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जोल्टन दानी यूगोस्लावियाई एंटी एयरक्राफ्ट रॉकेट यूनिट के कमांडर थे लेकिन इस वक्त यूगोस्लाविया में एक बेकरी चलाते हैं। इस बेकरी में उनके साझेदार हैं अमेरिकी वायुसेना पायलट डेल जेल्को।
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लेकिन 1999 में एक युद्ध के दौरान दोनों एक दूसरे के दुश्मन थे। तब नाटो की सेना ने बेलग्रेड सहित यूगोस्लाविया के कई शहरों पर हवाई हमला किया था। तब दानी और जेल्को ने अपनी अपनी सेना के लिए अहम भूमिका निभाई थी।

गजब का निशाना
डेल जेल्को इस युद्ध में एफ 117 विमान उड़ा रहे थे- यह युद्धक विमान इतना आधुनिक था कि दुश्मन देश का रडार इसका पता नहीं लगा पाया। लेकिन 27 मार्च, 1999 की रात उनके लिए चुनौती भरी साबित हुई। खराब मौसम के चलते उनके विमान में तकनीकी दिक्कतें आ गईं जिसके चलते उसके जैमर ने काम करना बंद कर दिया था और एंटी रडार मिसाइल फ़ायरिंग भी नहीं हो पा रही थी।

जेल्को बताते हैं, "मुझे लग रहा था कि कुछ ना कुछ गड़बड़ होने वाला है, इसलिए जब हमला हुआ तो मुझे कोई अचरज नहीं हुआ।"

दूसरी ओर जोल्टन दानी की अपनी मुश्किलें थीं। उनकी यूनिट के पास ज्यादा संसाधन नहीं थे और उनपर एफ-16 विमानों के हमले का ख़तरा मंडराने लगा था। लेकिन उनके जवानों को हौसला बुलंद था।

हर रात वे अपने यूनिट की जगह बदल रहे थे, इस दौरान उनके पास एक उपकरण था जो एंटी रडार मिसाइल का पता लगाकर उसपर हमले कर रहा था।

सर्बियाई इलेक्ट्रानिक्स जीनियस निकोला टेसला से प्रेरित होकर जोल्टन ने अपने उपकरण में थोड़ा बदलाव किया, जिससे उसने निर्धारित वेब तरंगों से अलग तरंगों को भी कैच करने लगा।

इसी वजह से दानी को जेल्को के विमान का पता लग गया। दानी ने बताया, " जब जेल्को को विमान को हमने निशाना बनाया तो मुझे बहुत अच्छा लगा। फ़ुटबाल मैच में विजयी गोल दागने जैसी ख़ुशी मिली।"

दूसरी ओर जेल्को के लिए मुश्किलें बढ़ चुकीं थीं। वे अनियंत्रित हो चुके विमान से किसी तरह बाहर निकले। उस वक्त उनके दिमाग में क्या चल रहा था, इस पर जेल्को कहते हैं,

जेल्को के विमान का अवशेष बेलग्रेड के संग्रहालय में रखा हुआ है। एक वजह यह भी था कि जब जेल्को को दानी से मिलने का निमंत्रण मिला तो वे ख़ुद को रोक नहीं सके।

जब दुश्मन बने दोस्त
वैसे बेकरी खोलने का विचार दानी के बेटे अतिला का था, जिसने जेल्को संबंधित वीडियो आनलाइन देखा था। यह वीडियो सर्बियाई डाक्यूमेंटरी निर्माता जेल्जको मिर्कोविक ने शू किया था, जो उस वक्त दानी पर एक फ़िल्म द 21स्ट सेकेंड बना रहे थे।

अतिला ने सेवानिवृत हो चुके अमेरिकी पायलट जेल्को से संपर्क साधा। जेल्को को मानो इस पल का ही इंतज़ार था। उन्होंने बताया, " जिस शख्स ने मुझे निशाना बनाया था, उससे मिलने के विचार से मैं बेहद ख़ुश हुआ। यह मेरे लिए किसी मिशन से कम नहीं था।"

इसके बाद कई साल तक दोनों में पत्र व्यवहार जारी रहा। इसमें दोनों सेना अधिकारी अपनी कहानी, अपने भाव और अपने अनुभव बांटते रहे।

इसके बाद बीते साल जेल्जको मिर्कोविक ने एक और डाक्यूमेंटरी फिल्म इन दोनों के संबंधों पर बनाई- द सेकेंड मीटिंग। मिर्कोविक बताते हैं, " हम तीनों का शांति में विश्वास था, हम दुनिया भर को उम्मीद और शांति का संदेश देना चाहते थे।"


शांति का संदेश
इसके दोनों की कहानी फिल्म से भी आगे बढ़ी। दोनों एक दूसरे के घर भी गए और परिवार वालों के बीच भी दोस्ती हो गई। जेल्को के परिवार के तीन लोग द सेकेंड मीटिंग की प्रीमियर के दौरान एक सप्ताह के लिए सर्बिया पहुंचे। सब दानी के घर पर ही ठहरे।

फिर दोस्ती आपसी संबंधों में बदल गई। जेल्को और दानी का परिवार अब दो भाईयों के परिवार जैसा है। इन दोनों
को भरोसा है कि उनकी कहानी से दुनिया भर के लोगों को एक दूसरे को समझने और एक दूसरे के प्रति सहिष्णु होने में मदद मिलेगी।

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