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पृथ्वी से पहले मंगल पर गूंजी थी किलकारी?

Thu, 29 Aug 2013 03:37 PM IST
बीबीसी
बीबीसी Updated Thu, 29 Aug 2013 03:37 PM IST
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एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक सम्मेलन में शोधकर्ताओं ने संभावना जताई है कि पृथ्वी के पहले ही मंगल ग्रह पर जीवन की शुरुआत हो गई थी।
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एक नए शोध से इस विचार को बल मिला है कि अरबों साल पहले लाल ग्रह का वातावरण जीवन शुरु करने के लिए पृथ्वी की तुलना में ज्यादा अनुकूल था।

यह प्रमाण इस बात पर आधारित है कि जीवन की शुरुआत के लिए बने पहले अणु कैसे विकसित हुए होंगे। इस वैचारिक धारणा के बारे में प्रोफेसर स्टीवन बेनर ने इटली के फ्लोरेंस में हुए गोल्डश्मिट सम्मेलन में जानकारी दी।

वैज्ञानिक लंबे समय से इस गुत्थी को सुलझाने की कोशिश में लगे हैं कि जीवन की संभावना के लिए ज़रूरी तीन अवयव आरएनए, डीएनए और प्रोटीन कैसे एक साथ आए होंगे।
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जिन अणुओं से आनुवंशिक पदार्थ का निर्माण हुआ वे तीन अरब साल पहले पृथ्वी पर मौज़ूद कार्बनिक रसायनों से बहुत ज़्यादा जटिल थे।

आरएनए

उस समय पृथ्वी पर मौजूद रसायनों में ऊष्मा या प्रकाश प्रवाहित करने पर आरएनए नहीं बनता बल्कि उससे तारकोल बनता।

आरएनए को सांचे में ढालने के लिए परमाणुओं को खनिजों की क्रिस्टलीय सतह से गुजारना पड़ता है। अमरीका के गैंसविले स्थित वेस्टहीमर इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के प्रोफेसर बेनर के मुताबिक़ पृथ्वी पर ऐसे खनिज पहले ही समुद्र में मिल चुके होंगे लेकिन मंगल पर इनकी भरमार रही होगी।
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वह कहते हैं कि इससे यह साबित हो सकता है कि जीवन की शुरुआत पहले मंगल पर हुई थी और उल्कापिंड के माध्यम से यह पृथ्वी पर आया था।

जीवन की शुरुआत मंगल पर होने और उसके बाद में पृथ्वी पर आने का विचार नया नहीं है। लेकिन प्रोफेसर बेनर के विचारों ने इसमें नया मोड़ ला दिया है।

खनिज

प्रोफेसर बेनर ने सम्मेलन में ऐसे निष्कर्ष पेश किए जिनसे साबित होता है कि बोरोन और मॉलीब्डेनम जैसे तत्वों की मौज़ूदगी वाले खनिज परमाणुओं को मिलाकर जीवन की उत्पत्ति वाले अणुओं में बदलने में मदद मिली होगी।

उन्होंने कहा कि बोरोन खनिज कार्बोहाइड्रेट छल्लों को जीवन की उत्पत्ति से पहले के रसायन बनाने में मदद करते हैं और मॉलीब्डेनम फिर इस मध्यवर्ती अणु से राइबोज़ बनाता है जिससे अंतत आरएनए का निर्माण होता है।

इससे ये सवाल पैदा होते हैं कि जीवन पर पृथ्वी की शुरुआत कैसे हुई? माना जाता है कि शुरुआत में पृथ्वी का वातावरण बोरोन और मॉलीब्डेनम खनिजों के निर्माण के लिए अनुकूल नहीं था।

साथ ही यह भी माना जाता है कि जीवनोत्पत्ति से पहले के रसायन यानी प्री बायोटिक सूप से आरएनए बनाने के लिए ज़रूरी बोरोन खनिज शुरुआत में पृथ्वी पर पर्याप्त मात्रा पर उपलब्ध नहीं थे। इसके अलावा मॉलीब्डेनम खनिज भी उचित रासायनिक स्वरूप में मौजूद नहीं थे।

प्रोफेसर बेनर ने कहा, "जब मॉलीब्डेनम का ऑक्सीकरण होता है तभी वह शुरुआती जीवन को प्रभावित कर सकता है। जब जीवन की शुरुआत हुई थी तब हो सकता है कि पृथ्वी पर मॉलीब्डेनम इस स्वरूप में उपलब्ध न रहा हो।

तीन अरब साल पहले पृथ्वी की सतह पर बहुत कम ऑक्सीजन थी जबकि मंगल पर पर्याप्त मात्रा में थी।"
उल्कापिंड

उन्होंने कहा, "यह एक और प्रमाण है जिससे साबित होता है कि पृथ्वी पर जीवन मंगल से उल्कापिंड़ो के माध्यम से आया था।"

माना जाता है कि मंगल में शुरुआत में वातावरण शुष्क था और यह जीवन की उत्पत्ति के लिए अनुकूल था।

प्रोफेसर बेनर ने बीबीसी न्यूज़ से कहा, "यह बात साफ है कि  पृथ्वी की सतह पर बोरोन बहुत कम था लेकिन मंगल पृथ्वी की तुलना में शुष्क था और वहां पर्याप्त ऑक्सीजन थी।


पृथ्वी का वातावरण जीवन की उत्पत्ति के लिए अनुकूल नहीं था जबकि मंगल पर इसके लिए सभी परिस्थितियां थीं।"

उन्होंने कहा, "इस बात के प्रमाण मिल रहे हैं कि हम सभी वास्तव में मंगल के निवासी हैं। जीवन की शुरुआत मंगल पर हुई और यह एक शैल के जरिए पृथ्वी पर आया।"

प्रोफेसर बेनर ने कहा, ''यह सौभाग्य की बात है कि हम पृथ्वी पर विकसित हुए क्योंकि जीवन के विकास और निरंतरता के लिए दोनों ग्रहों में से पृथ्वी पर परिस्थितियां बेहतर हैं। अगर हमारे कल्पनीय पूर्वज मंगल पर ही बने रहते तो शायद हमारे पास कहने के लिए यह कहानी नहीं होती।"
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