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मिस्र: विपक्ष ने ठुकराई बातचीत, अवरोध तोड़े
बीबीसी हिंदी
Updated Sat, 08 Dec 2012 09:16 AM IST
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मिस्र में चुनाव समिति के प्रमुख का कहना है कि विदेश में रहने वाले मिस्रवासियों के लिए वोटिंग योजना में अब देर होगी। ये लोग जनमत संग्रह में वोट करने वाले थे। हजारों लोग मांग कर रहे हैं कि जनमत संग्रह टाल दिया जाए।
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इस कदम को दोनों पक्षों के बीच लचीलेपन का पहला संभावित संकेत मान जा रहा है। मिस्र के उप राष्ट्रपति महमूद मेकी ने संकेत दिया था कि राष्ट्रपति जनमतसंग्रह टालने पर राज़ी हो सकते हैं अगर ये कानूनी तौर पर स्वीकार्य तरीके से किया जाए।
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इससे पहले मिस्र में विपक्षी प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति भवन के बाहर लगाए गए अवरोधों को तोड़ दिया।सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को राष्ट्रपति भवन पहुंचने से रोकने के लिए ये अवरोध लगाए थे।
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हजारों लोगों ने राजधानी काहिरा में मार्च निकाला और विपक्ष के साथ बातचीत की राष्ट्रपति मोहम्मद मोर्सी की अपील को खारिज कर दिया।
विपक्ष का कहना है कि राष्ट्रपति ने अपनी शक्तियों में विस्तार करने और नए संविधान के मसौदे पर कोई रियायत नहीं दी है। इस मसौदे पर 15 दिसंबर को जनमत संग्रह होना है। मिस्र के कई शहरों में सरकार विरोधियों और समर्थकों ने प्रदर्शन किए हैं।
'मिस्र धर्मनिरपेक्ष नहीं होगा'
इससे पहले मोर्सी के समर्थकों ने काहिरा में मार्च निकाला था। उन्होंने इस हफ्ते मिस्र में हुई हिंसा में मारे गए लोगों की मौत का बदला लेने का संकल्प जताया। भीड़ नारे लगा रही थी, “मिस्र इस्लामिक है। ये धर्मनिरपेक्ष नहीं बनेगा। ये उदारवादी नहीं बनेगा।”
दूसरी तरफ समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार मोर्सी के विरोधी राष्ट्रपति भवन के नजदीक जमा हुए। उन्होंने वहां लगाए गए कांटेदार तारों को काटा और इमारत की दीवारों को नजदीक पहुंच गए।
राष्ट्रपति मोर्सी ने पिछले हफ्ते असीमिति शक्तियां ग्रहण कर ली थी जिसके बाद न्यायापालिका भी उनके फैसलों को चुनौती नहीं दे पाएगी। इस कदम का मिस्र में व्यापक विरोध हो रहा है।
बातचीत का बहिष्कार
इस बीच मुख्य विपक्षी समूह नेशनल सैल्वैशन फ्रंट ने कहा है कि वो राष्ट्रपति मोर्सी से कोई बातचीत नहीं करेगा।
इस समूह के मुख्य संयोजक और नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद अल बारादेई ने अपने ट्विटर संदेश में राजनीतिक गुटों से कहा है कि वो मोर्सी के साथ सभी तरह के संवाद को बंद करें।
गुरुवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में मोर्सी ने कहा था कि वो देश में जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए शनिवार को विपक्षी नेताओं से बात करेंगे।
दो अन्य विपक्षी समूहों उदारवादी वफ्द पार्टी और नेशनल असोसिएशन फॉर चेंज ने भी राष्ट्रपति के साथ बातचीत का बहिष्कार करने का फैसला किया है।
गुरुवार को टीवी पर प्रसारित राष्ट्र के संबोधन में मोर्सी ने ना तो अपनी नई शक्तियां छोड़ने की कोई बात कही थी और न ही संविधान के मसौदे पर जनमत संग्रह को टालने का कोई संकेत दिया था। इससे उनके विरोधी खासे नाराज हैं।
काहिरा में बीबीसी संवाददाता जॉन लिन का कहना है कि बढ़ते तनाव के कारण मोर्सी के संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड में भी गंभीर मतभेद पैदा हो रहे हैं।