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रिपोर्ट: भारत-पाक-बांग्लादेश में भोजन का संकट लेकर आएगी भयानक गर्मी
amarujala.com- Presented by: श्रवण शुक्ला
Updated Fri, 04 Aug 2017 03:34 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : nasa
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ग्लोबल वॉर्मिंग से अगले कुछ दशकों में भारतीय उपमहाद्वीप में भयंकर तबाही आने वाली है। ग्लोबल वॉर्मिंग की ये तबाही अगले कुछ दशकों में भारत, पाक और बांग्लादेश में भोजन का संकट लेकर आएगी। इस दौरान भयानक गर्मी पड़ेगी और लू बहेगी। जिससे अगले कुछ दशकों में जलवायु परिवर्तन से गंगा और सिंधु की उपजाऊ जमीन भी प्रभावित होगी। बारिश न होने से खेत सूखे रहेंगे और लोग भूखे मरने लगेंगे।
मेसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के रिसर्च के मुताबिक दक्षिण एशिया के कई इलाकों को भारी लू का सामना करना पड़ सकता है। जलवायु परिवर्तन से इलाके में कृषि पैदावार कम हो सकती है। अगले कुछ दशकों के दौरान भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के डेढ़ अरब लोगों को मारक लू का सामना करना पड़ सकता है। इतना ही नहीं इन दशकों के दौरान जलवायु परिवर्तन की वजह से गर्मी से मौतें और बड़े पैमाने पर भोजन का संकट पैदा हो सकता है। मेसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की एक स्टडी में इस संकट का जिक्र किया गया है।
एमआईटी के वैज्ञानिकों का कहना है कि इस सदी के अंत तक जलवायु परिवर्तन की वजह से दक्षिण एशिया में गर्मियों में जबरदस्त लू का सामना करना पड़ सकता है। रिसर्चरों ने चेताया है कि ग्लोबल वार्मिंग को खत्म करने के लिए अब भी कदम उठाए जाएं तो इस तरह के संकट का सामना किया जा सकता है। दक्षिण एशिया में पूरी दुनिया के 20 फीसदी लोग रहते हैं और यह पूरा इलाका बेहद गरीबी में फंसा हुआ है।
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मेसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के रिसर्च के मुताबिक दक्षिण एशिया के कई इलाकों को भारी लू का सामना करना पड़ सकता है। जलवायु परिवर्तन से इलाके में कृषि पैदावार कम हो सकती है। अगले कुछ दशकों के दौरान भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के डेढ़ अरब लोगों को मारक लू का सामना करना पड़ सकता है। इतना ही नहीं इन दशकों के दौरान जलवायु परिवर्तन की वजह से गर्मी से मौतें और बड़े पैमाने पर भोजन का संकट पैदा हो सकता है। मेसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की एक स्टडी में इस संकट का जिक्र किया गया है।
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#1.5bn people in #India, Pak and Bangladesh may face deadly heat waves in next few decades due to #climatechange; #MITstudy.
विज्ञापन विज्ञापन— Press Trust of India (@PTI_News) August 3, 2017
एमआईटी के वैज्ञानिकों का कहना है कि इस सदी के अंत तक जलवायु परिवर्तन की वजह से दक्षिण एशिया में गर्मियों में जबरदस्त लू का सामना करना पड़ सकता है। रिसर्चरों ने चेताया है कि ग्लोबल वार्मिंग को खत्म करने के लिए अब भी कदम उठाए जाएं तो इस तरह के संकट का सामना किया जा सकता है। दक्षिण एशिया में पूरी दुनिया के 20 फीसदी लोग रहते हैं और यह पूरा इलाका बेहद गरीबी में फंसा हुआ है।
गंगा-सिंधु बेसिन की उपजाऊ जमीन होगी प्रभावित
विशेषज्ञों ने दावा किया है कि कार्बन उत्सर्जन में कटौती नहीं की गई तो गर्म हवाएं गंगा और सिंधु नदी की बेसिन की उपजाऊ जमीन को प्रभावित करना शुरू कर देगी। इससे इस क्षेत्र में पैदावार कम हो जाएगी, जो दोनों देश में ज्यादातर फसलों की सप्लाई करते हैं। गर्म हवाओं से उत्तरी भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान के डेढ़ अरब लोग प्रभावित होंगे। एमआईटी के अल फतह अल ताहिर ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से लोगों के सामने खतरा बढ़ गया है। गौरतलब है कि 2015 में चली लू और गर्म हवाओं से भारत और पाकिस्तान में 3500 लोग मारे गए थे।