श्रीश्री की कोशिशों से हुआ शांति समझौता, कोलंबिया की जनता ने नकारा
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कोलंबिया में फार्क विद्रोहियों के साथ हुए शांति समझौते को वहां की जनता ने जनमत संग्रह में नकार दिया है। हैरान करने वाले नतीजे में 50.24 प्रतिशत लोगों ने समझौते के विरोध में मतदान किया।
पिछले सप्ताह कोलंबिया के राष्ट्रपति ख्वान मानवेल सांतोस और फार्क विद्रोही गुट के नेता टिमोलियोन जिमेनेज ने चार साल चली शांति वार्ता के बाद समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
लेकिन इसे लागू होने के लिए कोलंबिया की जनता का अनुमोदन जरूरी था। देश की राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल होने के लिए फार्क विद्रोही 52 साल से चल रहे हिंसक संघर्ष को समाप्त करने के लिए तैयार हो गए थे।
राष्ट्रपति सांतोस ने चेतावनी दी थी कि युद्ध को समाप्त करने की उनके पास कोई दूसरी योजना नहीं है। गौरतलब है कि कोलंबिया में जारी गृहयुद्ध में 260,000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं।
राष्ट्रपति ने विवाद निपटाने पर श्रीश्री को कहा था धन्यवाद
फार्क और कोलंबियन सरकार के मध्य 26 सितंबर को ही कोर्टेजीना -डी इंडीस में ऐतिहासिक 25 वर्षीय विवाद शांति समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। इस कार्यक्रम के लिए कोलंबिया के राष्ट्रपति ने श्रीश्री रविशंकर जी को आमंत्रित किया था।
अपनी कोलंबिया यात्रा के दौरान श्रीश्री ने 500 सामाजिक लीडरों के समूह को सम्बोधित करते हुए शांति प्रयास के लिए अपनी आंतरिक शांति को उकेरने के प्रयास पर बल दिया था।
विवाद से निपटने के लिए नियुक्त मंत्री रफेल पार्डोही के साथ की गई बैठक में शांति निर्माण और स्थितियों को सामान्य बनाने के विषय पर वृहद चर्चा करने के साथ ही पीड़ित यूनिट के निदेशक एलन जारा और उनके साथ 12 पीड़ितों ने श्रीश्री से मुलाकात की। उन्होंने बताया कि किस तरह फार्क के सदस्यों को आर्ट ऑफ लिविंग की तकनीकों ने उभारा।