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..जिसने फलस्तीनियों को दिया जश्न का मौका
Updated Wed, 26 Jun 2013 07:52 AM IST
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अरब आइडल जीतकर गज़ा पट्टी पहुँचे गायक मोहम्मद असफ़ का हज़ारों फ़लस्तीनियों ने दिल खोलकर स्वागत किया। रफ़ा क्रॉसिंग और ख़ान यूनुस शरणार्थी शिविर के रास्ते पर भारी भीड़ जमा थी। इसी शरणार्थी शिविर में मोहम्मद आसिफ़ रहते हैं।
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जैसे ही मोहम्मद असफ़ ने अरब आइडल जीता, पूरा फ़लस्तीनी क्षेत्र जश्न में डूब गया। अरब आइडल का आयोजन लेबनान की राजधानी बेरूत में हुआ था और लाखों लोगों ने इस कार्यक्रम को देखा।
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गज़ा से बीबीसी संवाददाता रूश्दी अबू अलूफ़ का कहना है कि भीषण गर्मी के बावजूद सुबह से ही लोग मोहम्मद असफ़ का स्वागत करने के लिए उनका इंतज़ार कर रहे थे।
आम तौर पर रफ़ा क्रॉसिंग से मोहम्मद असफ़ के घर तक का सफ़र सिर्फ़ 15 मिनट का है, लेकिन इतनी भारी भीड़ के कारण असफ़ को अपने घर पहुँचने में दो घंटे से भी ज़्यादा का वक़्त लग गया।
वहाँ पहुँचने के बाद मोहम्मद असफ़ ने सबका शुक्रिया अदा किया और कहा- आप सब के बिना ऐसा नहीं हो सकता था। सबका शुक्रिया।
23 वर्षीय मोहम्मद असफ़ शादी के मौक़े पर गाना गाते थे और कुछ सप्ताह पहले तक उन्हें जानने वाले कम ही थे, लेकिन आज वे फ़लस्तीनी इलाक़े के हीरो बन चुके हैं।
पहले ये धारणा थी कि अरब आइडल कार्यक्रम और इसके संगीत का हमास समर्थन नहीं करता है, लेकिन मोहम्मद असफ़ जब फ़लस्तीनी क्षेत्र में पहुँचे, तो उनका स्वागत करने वालों में हमास के अधिकारी भी थे।
अरब आइडल के फ़ाइनल में मोहम्मद असफ़ का मुक़ाबला मिस्र के अहमद जमाल और सीरिया के फराह यूसुफ़ के बीच था। लेकिन शनिवार को हुए फ़ाइनल में उन्होंने जीत हासिल की और फिर शुरू हुआ फ़लस्तीनी इलाक़ों में जश्न का सिलसिला।
बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि लंबे समय बाद गज़ा में जश्न का ऐसा माहौल देखा गया। लोग सड़क पर निकल आए और आतिशबाज़ियाँ हुईं।
संगीत का ये टैलेंट शो मार्च में शुरू हुआ था और टीवी पर इसका प्रसारण बेरूत स्थित एमबीसी टीवी चैनल कर रहा था। मोहम्मद असफ़ का जन्म लीबिया में हुआ था।
ऐसा पहली बार हुआ है कि गज़ा में रहने वाले किसी व्यक्ति ने कोई प्रतिष्ठित प्रतियोगिता जीती है। राष्ट्रपति महमूद अब्बास समेत कई राजनीतिक शख़्सियतों ने भी लोगों से अपील की थी कि वे मोहम्मद असफ़ का समर्थन करें।