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ग्रीस संकट के बारे में 10 अहम बातें

Sun, 21 Jun 2015 04:34 PM IST
Updated Sun, 21 Jun 2015 04:34 PM IST
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ग्रीस सरकार के हाथ से वक़्त और पैसा, दोनों तेज़ी से फ़िसल रहा है। अगर जून के अंत तक ग्रीस का बेलआउट पैकेज पर यूरोज़ोन के सहयोगियों के साथ कोई समझौता नहीं हो पाता है तो कर्ज़ न चुका पाने की स्थिति में उसके दिवालिया होने की संभावना अधिक है। और यह स्थिति ग्रीक सरकार को यूरो छोड़, अपनी पुरानी मुद्रा को अपनाने की ओर धकेल सकती है। इस संकट को 10 बिंदुओं में समझने की कोशिश करें।

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1. ग्रीस के खज़ाने में कितना धन?
राजकोषीय सुधारों के बदले बेलआउट पैकेज के बिना वामपंथी सिरीज़ा सरकार दिवालिया हो जाएगी। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष को मई में कर्ज़ की किस्त देने के लिए, किसी तरह एक अरब यूरो जुटाने में ग्रीस सफल हो गया था। लेकिन जून में आईएमएफ़, यूरोपीय केंद्रीय बैंक (ईसीबी) और छोटी अवधि के ख़र्चों के लिए जाने वाली किस्त को ग्रीस पहले ही स्थगित कर चुका है।
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सरकार ने अस्पतालों समेत सार्वजनिक क्षेत्र के निकायों को विशेष कोष सरकार के हवाले करने को कह दिया है। ग्रीस के शहर थिसअलोनिकी के मेयर ने पहले ही कई लाख यूरो सौंप दिए हैं, लेकिन अन्य कस्बे और शहर धन देने से इनकार कर रहे हैं। यूरोपीय संघ (ईयू) और आईएमएफ़ के विशाल बेलआउट पैकेज की 7।2 अरब यूरो की अंतिम किस्त का जारी होना इस समझौते पर ही टिका है।

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क्या ग्रीस कर्ज़ चुका सकता है?

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ग्रीस की सरकार से जो संकेत मिल रहे हैं उससे ऐसा लगता नहीं है। और इसका बहुत सीधा कारण है- कर्ज़ की कई बड़ी-बड़ी किस्तों के लिए बहुत कम समय। जून की शुरुआत में ही सिप्रास सरकार ने घोषणा कर दी थी कि वो जून में दी जाने वाली चार किस्तों को एक साथ महीने के अंत में देगी, ताकि इसके लिए ज़रूरी 1.5 अरब यूरो का इंतज़ाम किया जा सके।

लेकिन जून में ही छह लाख सरकारी कर्मचारियों की तनख्वाह, 26 लाख लोगों की पेंशन और अन्य सामाजिक कल्याण वाले कार्यक्रमों के भुगतान के लिए 2.2 अरब यूरो की ज़रूरत है। इसके अलावा, सिप्रास सरकार ने 4,000 सरकारी कर्मचारियों को फिर से नौकरी पर बहाल कर दिया है, जिनसे पिछली सरकार ने पीछा छुड़ा लिया था।

ईयू और आईएमएफ़ से 240 अरब यूरो के बेलआउट पैकेज की 7.2 अरब यूरो की अंतिम किस्त ग्रीस के लिए बहुत अहम है क्योंकि उसे पिछली किस्त अगस्त 2014 में मिली थी। इसके बावजूद कई अरब यूरो वाले तीसरे बेलआउट पैकेज की उसे फ़िर ज़रूरत पड़ने वाली है। सबसे बड़ा पेंच फंसा है, ग्रीस के सुधार पैकेज पर कर्ज़दाताओं की सहमति का।

कर्ज़ न चुका पाने से ग्रीस यूरो से बाहर चला जाएगा?

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अगर सरकार कर्ज़ देने में नाकाम रहती है तो ग्रीस को यूरोपीय केंद्रीय बैंक से धन मिलना बंद हो सकता है, क्योंकि ईसीबी ही देश के बैंकिंग तंत्र और सरकार को टिके रहने में मदद कर रहा है।

असल में देश के बैंकों को 84 अरब यूरो के इमर्जेंसी लिक्विडिटी असिस्टेंस (ईएलए) पर भरोसा है। यह ऐसा फ़ंड है जिसे ईसीबी की अनुमति पर देश के बाक़ी बैंक ग्रीक सेंट्रल बैंक से निकाल सकते हैं। अगर 30 जून तक आईएमएफ़ को कर्ज़ की किस्त नहीं दी गई तो, आईएमएफ़ मुखिया क्रिस्चीन लेगार्ड की घोषणा के अनुसार, 'धन जुटाने के लिए समयसीमा नहीं बढ़ाई जाएगी' और ग्रीस दिवालिया हो जाएगा।

क्या आ सकता है नक़दी संकट?

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लेकिन यह चक्र यहीं ख़त्म नहीं होता। अगर ग्रीस 20 जुलाई तक यूरोपीय केंद्रीय बैंक को कर्ज़ की किस्त नहीं जमा करता है तो उसके बैंकिंग तंत्र को मिलने वाली नक़दी को ईसीबी रोक देगा।

यदि नकदी का अकाल हो गया तो एथेंस सरकार दिवालिया हो जाएगी और देश यूरो से बाहर हो सकता है। कई अरब यूरो पहले ही ग्रीस के बैंकों से निकाले जा चुके हैं और ऐसी स्थिति में यह रफ़्तार और बढ़ सकती है और सरकार को इस बार प्रतिबंध लगाना पड़ सकता है।

लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स के प्रोफ़ेसर इयान बेग कहते हैं, “दिवालिया होने का सबसे बड़ा नुक़सान यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में यह सालों तक अछूत माना जाएगा, जैसा साल 2002 में अर्जेंटीना के साथ हुआ था।”

ग्रीस के पास क्या विकल्प हैं?

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विकल्प 1- समझौता नहीं होता है। आईएमएफ़ और ईसीबी को भुगतान नहीं दिया जाता है। ईसीबी ग्रीस को नकदी देना बंद कर देता है। नक़दी निकालने पर पाबंदी और यूरो से बाहर।
 
विकल्प 2- अंतिम समय में ग्रीस का कर्ज़दाताओं के साथ समझौता हो जाता है और वह दिवालिया होने से बच जाता है। विकल्प 3- समझौता नहीं हो पाता लेकिन दोनों पक्ष एक नई समयसीमा के लिए सहमत हो जाते हैं।

6.ग्रीस यूरो ज़ोन से बाहर होने की कगार पर है?
जैसे-जैसे समय सीमा नज़दीक आ रही है, दोनों पक्षों की ओर से कड़ी बयानबाजी का दौर चरम पर पहुंच गया है। सट्टेबाज़ और व्यापारी ग्रीस के यूरो से बाहर आने की संभावना को 30 प्रतिशत से अधिक मानते हैं। दोनों पक्ष ही नहीं चाहते कि यूरो से ग्रीस बाहर जाए, लेकिन यूरोपीय संघ के नेता ग्रीस से पेंशन और श्रम मामलों को लेकर कड़े सुधार की मांग कर रहे हैं, जबकि सिरीज़ा सरकार ख़र्चों में कटौती के ख़िलाफ़ वादे पर ही जीत कर आई है।

कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि यूरोपीय अधिकारी बेलआउट की यूरोपीय संघ के हिस्से की किस्त को मार्च 2016 तक की समय सीमा के लिए बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं। या कर्ज़दाता ग्रीस के यूरो ज़ोन से बाहर निकलने से रोकने के लिए बेलआउट की शेष 7।2 अरब यूरो की किस्त जारी करने के लिए कोई रास्ता निकाल सकते हैं।

क्या हैं समझौते में मुख्य अड़चनें?

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क्या हैं समझौते में मुख्य अड़चनें?
1-ग्रीस पेंशन खर्चों या सरकारी कर्मचारियों की तनख्वाहों में कटौती नहीं करेगा, क्योंकि दो तिहाई पेंशनभोगी ग़रीबी रेखा के आसपास हैं।
2-कर्ज़दाताओं का कहना है कि उनका लक्ष्य जल्दी रिटायरमेंट योजना है, न कि निजी पेंशन में कटौती।
3-कर्ज़दाता पेंशन ख़र्च में जीडीपी के एक प्रतिशत की कटौती चाहते हैं, जो कि जीडीपी का 16 प्रतिशत है। ग्रीस का कहना है कि जीडीपी में बहुत गिरावट आई है, इसलिए यह अनुपात ज़्यादा है।
4-यूरोपीय संघ के अधिकारियों का कहना है कि बजट बचत में इस साल एक प्रतिशत, अगले साल 2 प्रतिशत और 2018 में 3।5 प्रतिशत के लक्ष्य पर सहमति हो गई है। लेकिन ग्रीस का कहना है कि जब तक हर चीज़ पर सहमति न बने, तब तक किसी भी चीज़ पर सहमति नहीं है।
5-कर्ज़दाता चाहते हैं कि सामानों और सेवाओं पर अतिरिक्त वैट लगाया जाए जबकि ग्रीस का कहना है कि दवाओं और बिजली पर टैक्स नहीं बढ़ाया जाएगा।
6-ग्रीस की शिकायत है कि कर्ज़दाताओं का ध्यान टैक्स चोरियों पर शिकंजा कसने की बजाय, टैक्स बढ़ाने पर है, जबकि आईएमएफ़ का कहना है कि एथेंस किसी विश्वसनीय सुधार पर राज़ी नहीं है।
8। दिवालिया होने के बाद भी यूरो ज़ोन में बना रह सकता है ग्रीस?

ईसीबी को कितना होगा नुकसान?

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ऐसा होता संभव नहीं दिखता, लेकिन समझौते बगैर भी ऐसी व्यवस्था हो सकती है कि ग्रीस यूरो ज़ोन से जुड़ा रह सके। कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ग्रीस के लिए सबसे उचित विकल्प है, बेहतर प्रबंधन वाला दिवालियापन। यानी, कर्ज़ की अदायगी में समय और शर्तों की अधिक छूट हासिल करना। इस स्थिति में ग्रीस नकदी निकालने पर कड़ी पाबंदी के साथ यूरो ज़ोन में बना रह सकता है।

यूरोपीय केंद्रीय बैंक के वाइस प्रेसिडेंट विटोर कोंटांसियो ने बीते अप्रैल में कहा था कि अगर ग्रीस दिवालिया भी हो जाता है तो कोई ऐसा क़ानून नहीं है जो उसे यूरो ज़ोन से बाहर निकाले।

9. ईसीबी को कितना होगा नुकसान?
एक और विचार चल रहा है कि यदि सरकार के पास नक़दी ख़त्म हो जाए तो वो यूरो के समानांतर एक मुद्रा का चलन शुरू कर दे और सरकारी कर्मचारियों को क्रेडिट नोट से भुगतान करे।  ग्रीस के दिवालिया होने का मतलब है यूरोपीय केंद्रीय बैंक को भारी नुक़सान उठाना पड़ेगा, जिसने ग्रीक बैंकों को 110 अरब यूरो दे रखा है और ग्रीस सरकार के बाँड ख़रीदने पर 20 अरब यूरो ख़र्च किए हैं।

जर्मनी को नुक़सान

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हालांकि केंद्रीय बैंक इसकी भरपाई करने के लिए मुद्रा छाप सकता है लेकिन, जर्मनी के लिए यह किसी भारी आपदा से कम नहीं साबित होगा।

लेकिन इस गणित से भी ज़्यादा कुछ दांव पर लगा है। यूरो विरोधी आंदोलन झेल रहीं कई यूरोपीय सरकारें, ग्रीस की स्थितियों पर बहुत घबराहट के साथ नज़र रख रही हैं।

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