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शोध: बच्चा पढ़ाई में कमजोर है तो अपने अंदर झांकें, विरासत में मिलने वाले जीन और पारिवारिक माहौल अहम
Tue, 11 Jan 2022 05:49 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, लंदन।
एजेंसी, लंदन।
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 11 Jan 2022 05:49 AM IST
सार
द अमेरिकन जर्नल ऑफ ह्यूमन जेनेटिक्स में प्रकाशित शोध के मुताबिक, बच्चे विरासत में मिले जीन और पारिवारिक माहौल (आनुवांशिक पोषण) के कारण माता-पिता जैसे होते हैं। लेकिन प्रकृति और माहौल का भी असर होता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
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विस्तार
किसी बच्चे की पढ़ने-लिखने में सफलता उसे माता-पिता से विरासत में मिलने या न मिलने वाले जीन पर निर्भर करती है। यह दावा यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के एक ताजा शोध में किया गया है।
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इसमें बताया गया है, एक व्यक्ति को सीधे मिलने वाले जीन का उसकी शैक्षिक उपलब्धियों में योगदान रहता है। लेकिन माता-पिता के जो जीन सीधे विरासत में नहीं मिलते और जिन्होंने उनके स्वयं की शिक्षा के स्तर को आकार देने के साथ-साथ परिवार की जीवनशैली व माहौल को प्रभावित किया है, वे भी बच्चे के स्कूली-बाहरी गतिविधियों में प्रदर्शन के लिए महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
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द अमेरिकन जर्नल ऑफ ह्यूमन जेनेटिक्स में प्रकाशित शोध के मुताबिक, बच्चे विरासत में मिले जीन और पारिवारिक माहौल (आनुवांशिक पोषण) के कारण माता-पिता जैसे होते हैं। लेकिन प्रकृति और माहौल का भी असर होता है। शोधकर्ताओं ने कई देशों में हुए 12 शोधों का विश्लेषण किया व पॉलीजेनिक स्कोरिंग के जरिए 40 हजार माता-पिता व बच्चों में लाखों-करोड़ों जीन के असर का अध्ययन किया।
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मां-बाप की सीखने की दिलचस्पी बन जाती है बच्चों की आदत
माता और पिता के आधे-आधे जीन ही बच्चों में जाते हैं। शेष आधे खुद माता-पिताओं की विशेषताओं को प्रभावित करते रहते हैं और आखिरकार उनका असर बच्चों पर भी पड़ता है। मसलन, सीखने की उच्च आनुवांशिक प्रवृत्ति वाले माता-पिताओं में पढ़ने जैसी गतिविधि में ज्यादा दिलचस्पी हो सकती है, जो उनके बच्चों में भी इस आदत को पोषित करती है।
आनुवांशिक पोषण का महत्वपूर्ण योगदान
शोध के प्रमुख लेखक डॉ. जीन बाप्टिस्टे पिंगॉल्ट के मुताबिक, आनुवांशिक पोषण का भी बच्चे की शैक्षिक सफलता में महत्वपूर्ण योगदान है। यह असर मुख्य रूप से माता-पिता की शिक्षा और इससे प्रभावित होने वाले पारिवारिक माहौल के कारण रहता है। यह भी पाया कि माता-पिता के बच्चों पर आनुवांशिक पोषण प्रभाव समान थे। यह स्थिति बताती है कि बच्चे के सीखने के अनुकूल माहौल के लिए माता-पिता दोनों ही समान रूप से मायने रखते हैं।