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शोध: एजिथ्रोमाइसिन से अधिक कारगर थी प्लासबो एंटीबायोटिक दवा
Sun, 18 Jul 2021 03:51 AM IST
Kuldeep Singh
एजेंसी, कैलिफोर्निया
एजेंसी, कैलिफोर्निया
Published by: Kuldeep Singh
Updated Sun, 18 Jul 2021 03:51 AM IST
सार
- शोध के शीर्ष लेखक कैथरीलन ई ओल्डनबर्ग ने कहा, हमने अध्ययन में पाया है कि कोरोना संक्रमण के उपचार में एजिथ्रोमाइसिन दवा देना ठीक नहीं था। यह एक व्यापक रूप से अपनाई गई एंटीबायोटिक है जिसका अमेरिका समेत दुनिया के कई अन्य देशों में कोरोना के उपचार के लिए हुआ।
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प्लासबो एंटीबायोटिक दवा
- फोटो : social media
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विस्तार
कोरोना के मध्यम लक्षण वाले मरीजों में ज्यादातर दी गई एंटीबायोटिक दवा एजिथ्रोमाइसिन असल में प्लासबो की तुलना में कम कारगर थी। सैन फ्रांसिस्को में हुए एक शोध में दावा किया गया कि जिन मरीजाें को अधिक एजिथ्रोमाइसिन दवा दी गई उन्हें बाद में अस्पताल में भर्ती करने का खतरा बढ़ गया।
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स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय की मदद से हुए इस अध्ययन को अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन के जर्नल में भी प्रकाशित किया गया है। शोध के शीर्ष लेखक कैथरीलन ई ओल्डनबर्ग ने कहा, हमने अध्ययन में पाया है कि कोरोना संक्रमण के उपचार में एजिथ्रोमाइसिन दवा देना ठीक नहीं था। यह एक व्यापक रूप से अपनाई गई एंटीबायोटिक है जिसका अमेरिका समेत दुनिया के कई अन्य देशों में कोरोना के उपचार के लिए हुआ।
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ऐसी परिकल्पना है कि सूजन को रोकने के गुण होते हैं जिसका इस्तेमाल शुरुआती लक्षणों के उपचार में होता है। शोध में कोरोना संक्रमित 263 लोगाें को शामिल किया गया। इन्हें शोध शुरू होने से सात दिन पहले कोरोना हुआ था। शुरुआत में इनमें से किसी को भी अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया।
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अध्ययन के दौरान 171 को एजिथ्रोमाइसिन दी गई और 92 लोगों को प्लासबो दी गई। 14 दिन तक दोनों समूहों के 50 फीसदी लोगों में कोई लक्षण नहीं दिखे जबकि 21वें दिन एजिथ्रोमाइसिन वाले पांच मरीजों को गंभीर लक्षण मिलने के बाद अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।