फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Republican Party has launched a campaign to hold President Joe Biden fully responsible for afghanistan crisis

अफगानिस्तान से अमेरिका की वापसी: बीस साल की नाकामी का सारा ठीकरा अब फूट रहा है बाइडन के माथे

Tue, 17 Aug 2021 02:49 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 17 Aug 2021 02:49 PM IST
सार

अफगान युद्ध में लड़ चुके पूर्व अमेरिकी नौसैनिक जेक वुड ने एक इंटरव्यू में कहा है- ‘ये घटना हमारे राष्ट्र की प्रतिष्ठा पर एक धब्बा है। हमने अपने उन अफगान सहयोगियों के प्रति अपना कर्त्तव्य नहीं निभाया, जिन्होंने हमारा साथ दिया था।’

विज्ञापन
Republican Party has launched a campaign to hold President Joe Biden fully responsible for afghanistan crisis
जो बाइडन - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

काबुल पर तालिबान का कब्जा अमेरिका में तीखे सियासी विवाद का मुद्दा बन गया है। रिपब्लिकन पार्टी ने इसके लिए राष्ट्रपति जो बाइडन को पूरी जिम्मेदार ठहराने का अभियान छेड़ दिया है। सोमवार को रिपब्लिकन पार्टी की वेबसाइट से फरवरी 2020 में तालिबान और अमेरिका के बीच हुए समझौते का दस्तावेज हटा दिया गया। तब डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति थे। हकीकत यह है कि ट्रंप प्रशासन ने ही तालिबान से सीधी बातचीत कर उसे वैधता प्रदान की थी। तभी अमेरिकी फौज की वापसी के लिए 31 मई 2021 की समयसीमा तय की गई थी। बाइडन ने राष्ट्रपति बनने के समयसीमा को साढ़े तीन महीने और बढ़ा दिया था।

विज्ञापन


रिपब्लिकन पार्टी का इल्जाम है कि उस समझौते में तालिबान ने जो वायदे किए थे, उनका पालन कराने में बाइडन प्रशासन नाकाम रहा। इस बीच आम तौर पर बाइडन प्रशासन के साथ सहानुभूति रखने वाले मुख्य धारा की मीडिया में भी राष्ट्रपति बाइडन की कड़ी आलोचना की गई है। इसमें कहा गया है कि बाइडन ने फौज वापसी में गड़बड़झाला किया। टीवी चैनल सीएनएन की वेबसाइट पर छपे एक विश्लेषण में कहा गया है- ‘अफगानिस्तान में अमेरिका की हार और अफरातफरी के बीच वहां से अमेरिकी वापसी जो बाइडन के लिए एक राजनीतिक आपदा है।’   
विज्ञापन


इसी टिप्पणी में कहा गया है कि अब बाइडन प्रशासन विफलता के नैरेटिव से घिर गया है। कोरोना महामारी के लौट आने और बढ़ रही महंगाई के कारण वह पहले से मुश्किल में था। इसमें ध्यान दिलाया गया है कि राष्ट्रपति बनने के बाद जो बाइडन ने दावा किया था कि अमेरिका इज बैक (यानी अमेरिका वापस लौट आया है)। लेकिन विदेश नीति में उनकी जब पहली परीक्षा हुई, उसमें वह विफल रहा। जिस समय बाइडन दुनिया भर में लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प जता रहे हैं, उसी समय उन्होंने अफगानिस्तान की कमजोर लोकतांत्रिक सरकार को ढह जाने के लिए अकेला छोड़ दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

अफगान युद्ध में लड़ चुके पूर्व अमेरिकी नौसैनिक जेक वुड ने एक इंटरव्यू में कहा है- ‘ये घटना हमारे राष्ट्र की प्रतिष्ठा पर एक धब्बा है। हमने अपने उन अफगान सहयोगियों के प्रति अपना कर्त्तव्य नहीं निभाया, जिन्होंने हमारा साथ दिया था।’ आलोचनाओं से घिरे राष्ट्रपति बाइडन के बचाव के लिए सोमवार को उनके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवान मीडिया के सामने आए। उन्होंने कहा- ‘राष्ट्रपति ने सोचा था कि अफगान के राष्ट्रीय सुरक्षा बल लड़ने के लिए आगे आएंगे। हमने उन्हें ट्रेनिंग देने और सर्वश्रेष्ठ उपकरण देने पर 20 साल तक अरबों डॉलर खर्च किए। लेकिन जब वक्त आया, तो उन्होंने अपने देश के लिए ना लड़ने का फैसला किया।’



कुछ विश्लेषकों का भी कहना है कि बाइडन के माथे पर 20 साल तक हुई गड़बड़ियों का ठीकरा फोड़ा जा रहा है। जबकि बाइडन ने वही फैसला किया, जो ज्यादातर अमेरिकियों की राय रही है। जनमत सर्वेक्षणों में लंबे युद्ध से थक चुके अमेरिकियों का भारी बहुमत सैन्य वापसी का समर्थन करता रहा है। इसलिए विश्लेषकों का कहना है कि अगर बाइडन तालिबान की बढ़त रोकने का फैसला करते, तो उसके लिए उन्हें अपने देश में अलोकप्रिय होने का जोखिम उठाना पड़ता। तब उन्हें हजारों सैनिक फिर से अफगानिस्तान भेजने पड़ते, जिसके लिए जन समर्थन का अभाव होता। इसीलिए कई विश्लेषणों में कहा गया है कि अभी फौरी माहौल भले बाइडन के खिलाफ हो, लेकिन अफगानिस्तान की घटनाओं से उन्हें कोई दूरगामी सियासी नुकसान होगा, इसकी संभावना कम है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed