India-US Relations: भारत से दूरी अमेरिका को पड़ेगी भारी? टैरिफ पर रिपब्लिकन सांसद की चेतावनी ने बढ़ाई हलचल
अमेरिकी सांसद रिच मैककॉर्मिक ने चेतावनी दी है कि भारत को अलग करना अमेरिका के लिए बड़ी परेशानी बन सकता है। उन्होंने भारत को निवेश और प्रतिभा का मजबूत स्रोत बताया, जबकि पाकिस्तान को कमजोर साझेदार कहा। आइए, इस खबर में अमेरिकी सांसद के बयान को पूरी तरह से जानते हैं।
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अमेरिका और भारत के रिश्तों पर एक अहम बयान सामने आया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के वरिष्ठ सांसद रिच मैककॉर्मिक ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर अमेरिका ने भारत को अलग-थलग किया, तो यह उसके लिए बड़ी परेशानी बन सकती है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब व्यापार, टैरिफ और ऊर्जा खरीद को लेकर भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव की खबरें सामने आ रही हैं।
अमेरिका के प्रतिष्ठित थिंक टैंक सामरिक और अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन केंद्र के एक कार्यक्रम में बोलते हुए मैककॉर्मिक ने भारत और पाकिस्तान की तुलना करते हुए भारत को अमेरिका के लिए कहीं अधिक अहम और भरोसेमंद साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि भारत सिर्फ निवेश लेने वाला देश नहीं है, बल्कि अमेरिका में निवेश भी लाता है और प्रतिभा के रूप में बड़ी भूमिका निभाता है।
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पाकिस्तान पर कही ये बात
रिच मैककॉर्मिक ने कहा कि पाकिस्तान की आबादी भले ही बड़ी हो, लेकिन वह अमेरिका के लिए न तो बड़े निवेश लाता है और न ही दीर्घकालिक आर्थिक मूल्य। इसके उलट भारत अमेरिकी अर्थव्यवस्था में निवेश, तकनीकी प्रतिभा और नवाचार के जरिए मजबूत योगदान दे रहा है। उनके मुताबिक यही वजह है कि अमेरिका को भारत के साथ रिश्तों को संभलकर आगे बढ़ाना चाहिए।
टैरिफ और व्यापार तनाव का असर क्या है?
- भारत और अमेरिका के बीच हाल के महीनों में व्यापारिक रिश्तों में तनाव बढ़ा है।
- अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए हैं, जिससे कुल शुल्क काफी बढ़ गया है।
- टैरिफ बढ़ने से दोनों देशों के व्यापार पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
- अमेरिका का आरोप है कि भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने से यूक्रेन युद्ध में रूस को अप्रत्यक्ष मदद मिल रही है।
- इसी मुद्दे के कारण भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते की बातचीत फिलहाल रुकी हुई है।
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ऊर्जा नीति पर भारत का रुख क्यों अलग है?
मैककॉर्मिक ने माना कि अमेरिका भारत द्वारा रूसी तेल खरीद से खुश नहीं है, लेकिन उन्होंने भारत की मजबूरी भी समझी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने देश के हित को सबसे ऊपर रखते हैं। सस्ता तेल खरीदना भारत की आर्थिक जरूरत है और इसे उसी नजर से देखा जाना चाहिए।
चर्चा के दौरान भारतीय मूल के डेमोक्रेट सांसद अमी बेरा ने भी भारत के पक्ष को मजबूत किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ अमेरिका की कोई गहरी रणनीतिक साझेदारी नहीं है, जबकि भारत में अमेरिकी कंपनियां अरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं। इससे साफ है कि अमेरिका का भविष्य भारत के साथ जुड़ा हुआ है।
अंत में रिच मैककॉर्मिक ने ट्रंप प्रशासन को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अमेरिका भारत को दोस्त की तरह अपनाता है तो शांति और समृद्धि मिलेगी। लेकिन अगर भारत को दूर किया गया, तो इसके नतीजे अमेरिका के लिए भी गंभीर होंगे। उनके इस बयान को भारत-अमेरिका रिश्तों में एक अहम सियासी संकेत माना जा रहा है।
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