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Britain: इंग्लैंड के क्रिकेट में मौजूद लिंगभेद और रंगभेद का कच्चा चिट्ठा खुला

Thu, 29 Jun 2023 06:13 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 29 Jun 2023 06:13 PM IST
सार

ईसीबी ने इंग्लैंड के क्रिकेट में संस्थागत भेदभाव के आरोपों की जांच के लिए कमीशन फॉर इक्विटी इन क्रिकेट का गठन किया था। रिपोर्ट ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि इंग्लिश क्रिकेट में महिलाओं, अश्वेत लोगों और गरीब पृष्ठभूमि से आए लोगों के साथ भेदभाव होता है...

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Reports about discrimination in England cricket team, put English and Wales Cricket Board in the dock
इंग्लैंड की टीम - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

ग्लैंड के क्रिकेट संचालन में मौजूद भेदभाव के बारे में आई रिपोर्ट ने इंग्लिश एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) को कठघरे में खड़ा कर दिया है। इंग्लैंड की टेस्ट क्रिकेट टीम के मौजूदा कप्तान बेन स्टोक्स ने मंगलवार को जिस तरह हर तरह के भेदभाव की निंदा करने वाला बयान जारी किया, उससे कई सवाल उठे हैं। हालांकि उन्होंने बोर्ड का यह कहते हुए बचाव भी किया कि न्यूजीलैंड में जन्म लेने के बावजूद उन्हें इंग्लैंड की टीम का कप्तान बनने का अवसर मिला। लेकिन उनके बयान और इंग्लैंड क्रिकेट टीम में पूर्वाग्रहों को लेकर बहस छिड़ गई है।

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ब्रिटिश अखबार द गार्जियन ने अपने एक विश्लेषण में लिखा है कि ताजा रिपोर्ट ईसीबी के लिए एक चेतावनी है। इस रिपोर्ट ने यह बता दिया है कि इंग्लिश क्रिकेट में पूर्वाग्रह भरे पड़े हैं, जिन्हें अब छिपाया नहीं जा सकता। अखबार के विश्लेषक जोनाथन लिउ ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए लिखा है- ‘एक खेल जिसके नियम धनी जमींदारों के आपसी मुकाबले के लिए तय किए गए थे और जिसे दुनिया भर में इस वादे के साथ जबरन फैलाया गया कि इससे असभ्य समुदाय सभ्य बनेंगे, असल में उतना प्रगतिशील नहीं है।’

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ईसीबी ने इंग्लैंड के क्रिकेट में संस्थागत भेदभाव के आरोपों की जांच के लिए कमीशन फॉर इक्विटी इन क्रिकेट (क्रिकेट में न्याय के लिए आयोग) का गठन किया था। विश्लेषकों ने कहा है कि आयोग ने अपनी रिपोर्ट में वही बातें कही हैं, जिनकी तरफ दशकों से ध्यान खींचा जा रहा था। रिपोर्ट ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि इंग्लिश क्रिकेट में महिलाओं, अश्वेत लोगों और गरीब पृष्ठभूमि से आए लोगों के साथ भेदभाव होता है। यह भेदभाव कई पीढ़ियों से जारी है।

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ईसीबी ने इस रिपोर्ट की रोशनी में उन सबसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है, जो भेदभाव का शिकार हुए हैं। लेकिन जानकारों ने कहा है कि ऐसा करना काफी नहीं है। जरूरत इस बात की है कि इंग्लिश क्रिकेट के ढांचे में मौजूद लिंगभेद और रंगभेद को खत्म करने के कारगर उपाय किए जाएं।

आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कोई ठोस आंकड़ों का हवाला दिया है। इसके मुताबिक इंग्लैंड में क्रिकेट खेलने वाले 87 फीसदी पाकिस्तानी और बांग्लादेशी मूल के खिलाड़ियों ने अपने साथ भेदभाव होने की शिकायत की है। ऐसी शिकायत भारतीय मूल के 82 फीसदी खिलाड़ियों ने की है। ब्लैक समुदाय के जिन खिलाड़ियों से बात की गई, उनमें से 75 फीसदी उनके साथ हुए भेदभाव की जानकारी दी। आयोग इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि श्वेत पुरुष कप्तानों, कोच और ईसीबी के वरिष्ठ अधिकारियों ने ऐसी शिकायतों को नजरअंदाज किया है।

आयोग ने बताया है कि इंग्लैंड में मौजूद खिलाड़ियों में 28 फीसदी दक्षिण एशियाई मूल के हैं, जबकि खेल की संचालन संस्था में सिर्फ 2.8 प्रतिशत दक्षिण एशियाई मूल के अधिकारी हैं। क्रिकेट प्रशासन में ब्लैक समुदाय का प्रतिनिधित्व तो और भी कम है। इंग्लिश क्रिकेट के अभिजात्यवादी स्वरूप की चर्चा करते हुए आयोग ने कहा है कि इंग्लैंड के पुरुष श्वेत क्रिकेटरों में 58 प्रतिशत ऐसे हैं, जिनकी पढ़ाई-लिखाई महंगे प्राइवेट स्कूलों में हुई है, जबकि ब्रिटेन की कुल आबादी में ऐसे लोगों की संख्या सिर्फ सात प्रतिशत है।

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