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Report: वायु प्रदूषण के कहर की भेंट चढ़ रहे लोग; 2021 में 81 लाख की गई जान; भारत का आंकड़ा जानकर चौंक जाएंगे
Wed, 19 Jun 2024 03:28 PM IST
काव्या मिश्रा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: काव्या मिश्रा
Updated Wed, 19 Jun 2024 03:28 PM IST
सार
यूनिसेफ के साथ साझेदारी में अमेरिका स्थित एक स्वतंत्र शोध संगठन हेल्थ इफेक्ट्स इंस्टीट्यूट (एचईआई) ने बुधवार को रिपोर्ट जारी की। इसमें कहा गया कि तीन साल पहले चीन में 21 लाख और भारत में 23 लाख लाख लोगों की मौत वायु प्रदूषण के चलते हुई।
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वायु प्रदूषण का कहर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अगर 21वीं सदी को विकास के लिहाज से एशिया की सदी कहा जाता है तो इसे समस्याओं की सदी कहना भी गलत नहीं होगा। खासकर जब बात पर्यावरण, प्रदूषण और प्राकृतिक आपदाओं की हो तो। आज प्रदूषण की समस्या से भारत जैसे विकासशील देश जूझ रहे हैं। इसकी गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि दुनियाभर में साल 2021 में वायु प्रदूषण के कारण 81 लाख लोगों को अपनी जान गवानी पड़ी।
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इतने बच्चों को लीला
यूनिसेफ के साथ साझेदारी में अमेरिका स्थित एक स्वतंत्र शोध संगठन हेल्थ इफेक्ट्स इंस्टीट्यूट (एचईआई) ने बुधवार को रिपोर्ट जारी की। इसमें कहा गया कि तीन साल पहले चीन में 21 लाख और भारत में 23 लाख लाख लोगों की मौत वायु प्रदूषण के चलते हुई। वहीं, वायु प्रदूषण का कहर बच्चों पर भी बरपा था। भारत में पांच साल से कम उम्र के 1,69,400 बच्चों की मौत हुई थी। इसके बाद नाइजीरिया में 1,14,100, पाकिस्तान में 68,100, इथोपिया में 31,100 और बांग्लादेश में 19,100 बच्चों की जान गई थी।
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यह भी जान जानें का कारण
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि दक्षिण एशिया में जान जानें का प्रमुख कारण वायु प्रदूषण है। इसके बाद हाई ब्लड प्रेशर, आहार और तंबाकू जैसे कारक मौत का कारण बन रहे हैं। साल 2021 में किसी भी पिछले वर्ष के अनुमान की तुलना में वायु प्रदूषण से जुड़ी अधिक मौतें देखी गईं। एक अरब से अधिक आबादी वाले भारत और चीन दोनों मिलकर कुल वैश्विक रोग भार का 54 प्रतिशत हिस्सा हैं।
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इन देशों पर भी पड़ा सबसे ज्यादा असर
देश मौतें
पाकिस्तान 2,56,000
बांग्लादेश 2,36,300
म्यांमार 1,01,600
इंडोनेशिया 2,21,600
वियतनाम 99,700
फिलीपींस 98,209
नाइजीरिया 2,06,700
मिस्र 1,16,500
78 लाख लोगों की जान का कारण पीएम 2.5
रिपोर्ट में बताया गया कि पीएम 2.5 और ओजोन से होने वाले वायु प्रदूषण के कारण 2021 में 81 लाख मौतें होने का अनुमान है - जो कुल वैश्विक मौतों का लगभग 12 प्रतिशत है। वैश्विक वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों में से 90 प्रतिशत से अधिक यानी 78 लाख लोगों की जान पीएम 2.5 वायु प्रदूषण के कारण जाती है, जिसमें परिवेशी पीएम 2.5 और घरेलू वायु प्रदूषण भी शामिल है।
क्या है वायु प्रदूषण?
ये सूक्ष्म कण, जिनका व्यास 2.5 माइक्रोमीटर से भी कम है, इतने छोटे होते हैं कि वे फेफड़ों में रह जाते हैं और रक्तप्रवाह में प्रवेश कर सकते हैं, जिससे कई अंग प्रणालियां प्रभावित होती हैं और वयस्कों में हृदय रोग, स्ट्रोक, मधुमेह, फेफड़ों का कैंसर और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) जैसी गैर-संचारी बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है।
प्रदूषण का स्वास्थ्य पर बहुत अधिक असर
एचईआई की अध्यक्ष एलेना क्राफ्ट ने कहना है कि हमें उम्मीद है कि हमारी स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर रिपोर्ट बदलाव के लिए जानकारी और प्रेरणा दोनों प्रदान करेगी। वहीं, एचईआई की वैश्विक स्वास्थ्य प्रमुख पल्लवी पंत ने कहा कि वायु प्रदूषण का स्वास्थ्य पर बहुत अधिक असर पड़ता है। यह नई रिपोर्ट मानव स्वास्थ्य पर वायु प्रदूषण के महत्वपूर्ण प्रभावों की याद दिलाती है, जिसमें युवा बच्चों, वृद्ध आबादी और निम्न- और मध्यम-आय वाले देशों पर बहुत अधिक बोझ पड़ता है।