Iran: राष्ट्रगान न गाकर हिजाब विरोधी प्रदर्शनों का किया गया समर्थन? ईरानी अधिकारी ने दिया यह जवाब
जेबेली ने कहा कि ईरानी नागरिक देश और इससे बाहर की घटनाओं पर अपने विचार व्यक्त करने के लिए स्वतंत्र हैं। आईआरआईबी प्रमुख ने कहा, ईरानी खिलाड़ियों द्वारा राष्ट्रगान गाने से इनकार करना हिजाब विरोधी प्रदर्शनों का समर्थन करना नहीं था।
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फीफा वर्ल्ड कप में इंग्लैंड के खिलाफ मैच के दौरान हाल ही में ईरान की फुटबॉल टीम के खिलाड़ियों ने राष्ट्रगान नहीं गाया था। इस दौरान सभी खिलाड़ी अपने सिर झुकाकर खड़े रहे। खिलाड़ियों के इस व्यवहार को ईरान में चल रहे हिजाब विरोध प्रदर्शनों से जोड़कर देखा गया था। अब इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (आईआरआईबी) के प्रमुख पेमैन जेबेली ने कहा कि खिलाड़ियों द्वारा राष्ट्रगान न गाना हिजाब विरोधी प्रदर्शनों का समर्थन करना नहीं थी। देश में महसा अमीनी नाम की युवती की मौत के बाद हिजाब विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे।
एक इंटरव्यू के दौरान जेबेली ने कहा कि ईरानी नागरिक देश और इससे बाहर की घटनाओं पर अपने विचार व्यक्त करने के लिए स्वतंत्र हैं। आईआरआईबी प्रमुख ने कहा, ईरानी खिलाड़ियों द्वारा राष्ट्रगान गाने से इनकार करना हिजाब विरोधी प्रदर्शनों का समर्थन करना नहीं था।
21 नवंबर को ईरानी फुटबॉल टीम के खिलाफ इंग्लैंड के खिलाफ शुरुआती मैच खेल रहे थे। खेल शुरू होने से पहले उन्होंने कथित तौर प्रदर्शनकारियों के समर्थन में एकजुटता जताते हुए राष्ट्रगान गाने से इनकार कर दिया था। जैसे ही राष्ट्रगान शुरु हुआ, खिलाड़ी खड़े हो गए। लेकिन उन्हें राष्ट्रगान नहीं गाया।
आईआरआईबी प्रमुख ने आगे कहा, फुटबॉल टीम के खिलाड़ियों द्वारा फीफा मैच के दौरान राष्ट्रगान गाने से इनकार करने से ईरान को कोई समस्या नहीं है। हमारे पास ऐसा कोई नियम नहीं है जिसमें ईरान के लोग राष्ट्रगान के दौरान खड़े होकर देश के लिए सम्मान दिखाते हैं। उन्होंने पश्चिमी मीडिया पर समय बर्बाद करने और ईरान विरोध कहानियों में ज्यादा दिलचस्पी लेने का आरोप लगाया।
जेबेली ने कहा, राष्ट्रगान के मुद्दे पर पश्चिमी और मुख्यधारा के मीडिया को ईरान के खिलाफ करने में बहुत दिलचस्पी है। हिजाब विरोधी प्रदर्शन का समर्थन करने वाले भारतीयों पर प्रतिक्रिया देते हुए जेबेली ने कहा, हिजाब को लेकर सभी के अलग-अलग विचार और मत हैं और वे ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं। सितंबर माह में महसा अमीनी (22 वर्षीय) की नैतिकता पुलिस की हिरासत में मौत हो गई थी। जिसके बाद बड़े पैमाने पर देशभर में हिजाब विरोधी प्रदर्शन हुए। इन प्रदर्शनों के दौरान कई लोगों की मौत हुई।