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Congo: रवांडा समर्थित विद्रोहियों ने पूर्वी कांगो के तीसरे शहर पर किया हमला, जानिए क्या है पूरा विवाद
Wed, 19 Feb 2025 10:14 AM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दाकर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दाकर
Published by: नितिन गौतम
Updated Wed, 19 Feb 2025 10:14 AM IST
सार
रवांडा समर्थित विद्रोही संगठन एम23 के उग्रवादियों ने मंगलवार को पूर्वी कांगो के प्रमुख शहर बुटेम्बो में कांगो सेना के ठिकानों पर हमला किया। करीब डेढ़ लाख की आबादी वाले इस शहर में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं और उग्रवादी संगठन तेजी से अपनी स्थिति को मजबूत कर रहे हैं।
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रवांडा समर्थित विद्रोही कांगो में लगातार हो रहे मजबूत
- फोटो : यूएन
विस्तार
रवांडा समर्थित विद्रोही संगठनों ने मंगलवार को पूर्वी कांगो के तीसरे शहर पर हमला किया है। विद्रोही संगठन पहले ही पूर्वी कांगो के दो प्रमुख शहरों पर कब्जा कर चुके हैं। गौरतलब है कि पूर्वी कांगो खनिजों के मामले में काफी धनी है और अहम वैश्विक तकनीक के लिए ये खनिज बेहद अहम हैं और इसी वजह से पूरी दुनिया की नजरें कांगो के हालात पर टिकी हुई हैं।
गोमा शहर पर कब्जे के दौरान मारे गए थे तीन हजार लोग
रवांडा समर्थित विद्रोही संगठन एम23 के उग्रवादियों ने मंगलवार को पूर्वी कांगो के प्रमुख शहर बुटेम्बो में कांगो सेना के ठिकानों पर हमला किया। करीब डेढ़ लाख की आबादी वाले इस शहर में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं और उग्रवादी संगठन तेजी से अपनी स्थिति को मजबूत कर रहे हैं। बीते महीने एम23 और अन्य उग्रवादी संगठनों ने पूर्वी कांगो के गोमा शहर पर कब्जा किया था। उस लड़ाई में करीब 3000 लोग मारे गए थे। बुटेम्बो और गोमा के बीच की दूरी करीब 210 किलोमीटर है। ऐसे में उग्रवादी संगठनों की लगातार मजबूत हो रही स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। इसी हफ्ते विद्रोहियों ने पूर्वी कांगो के बुकावु शहर पर भी कब्जा कर लिया था। गौरतलब है कि इस क्षेत्र में सोने और कोल्टन के भंडार हैं। साथ ही मोबाइल फोन, लैपटॉप में इस्तेमाल होने वाले कैपिसेटर्स को बनाने में जिन खनिजों का इस्तेमाल होता है, उनके भी भंडार पूर्वी कांगो में मौजूद हैं।
मंगलवार को विद्रोही गुटों ने कामनयोला शहर पर भी कब्जा कर लिया और अब विद्रोही गुटों के रणनीतिक रूप से अहम यूविरा शहर पर भी कब्जा करने की आशंका बढ़ गई है। विश्लेषकों का मानना है कि विद्रोही कांगो में राजनीतिक ताकत हासिल करना चाहते हैं और इसी के तहत उन्होंने गोमा शहर पर कब्जे के बाद वहां अपना मेयर भी नियुक्त कर दिया है। साथ ही गोमा में जनगणना कराने का भी एलान कर दिया गया है। माना जा रहा है कि विद्रोही शहर पर अपना कब्जा बरकरार रखेंगे।
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क्या है लड़ाई की वजह
100 से ज्यादा विद्रोही संगठन मिलकर कांगो पर हमला कर रहे हैं। इनमें एक प्रमुख संगठन है एम23। इस संगठन में करीब चार हजार लड़ाके रवांडा के हैं। रवांडा का आरोप है कि साल 1994 में रवांडा के अल्पसंख्यकों तुत्सीस और उदारवादी हुतुस जनजाति के लोगों का नरसंहार किया गया और इस नरसंहार के पीछे कट्टरपंथी हुतु लोग शामिल थे। रवाडां का कहना है कि अब उन्हीं कट्टरपंथी हुतु जनजाति के लोगों को कांगो की सेना में भर्ती किया जा रहा है। रवांडा का कहना है कि वे तुत्सीस और उदारवादी हुतु लोगों की सुरक्षा के लिए कांगो में बदलाव लाना चाहता है और उसे एक असफल राष्ट्र से आधुनिक राष्ट्र बनाना चाहता है। हालांकि विश्लेषकों को रवांडा के इस दावे पर शक है और उनका कहना है कि रवांडा की नजरें कांगो के खरबों डॉलर की कीमत वाली खनिज संपदा पर है और रवांडा कांगो पर कब्जा कर उसकी खनिज संपदा का अपने फायदे के लिए दोहन करना चाहता है।
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गोमा शहर पर कब्जे के दौरान मारे गए थे तीन हजार लोग
रवांडा समर्थित विद्रोही संगठन एम23 के उग्रवादियों ने मंगलवार को पूर्वी कांगो के प्रमुख शहर बुटेम्बो में कांगो सेना के ठिकानों पर हमला किया। करीब डेढ़ लाख की आबादी वाले इस शहर में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं और उग्रवादी संगठन तेजी से अपनी स्थिति को मजबूत कर रहे हैं। बीते महीने एम23 और अन्य उग्रवादी संगठनों ने पूर्वी कांगो के गोमा शहर पर कब्जा किया था। उस लड़ाई में करीब 3000 लोग मारे गए थे। बुटेम्बो और गोमा के बीच की दूरी करीब 210 किलोमीटर है। ऐसे में उग्रवादी संगठनों की लगातार मजबूत हो रही स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। इसी हफ्ते विद्रोहियों ने पूर्वी कांगो के बुकावु शहर पर भी कब्जा कर लिया था। गौरतलब है कि इस क्षेत्र में सोने और कोल्टन के भंडार हैं। साथ ही मोबाइल फोन, लैपटॉप में इस्तेमाल होने वाले कैपिसेटर्स को बनाने में जिन खनिजों का इस्तेमाल होता है, उनके भी भंडार पूर्वी कांगो में मौजूद हैं।
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मंगलवार को विद्रोही गुटों ने कामनयोला शहर पर भी कब्जा कर लिया और अब विद्रोही गुटों के रणनीतिक रूप से अहम यूविरा शहर पर भी कब्जा करने की आशंका बढ़ गई है। विश्लेषकों का मानना है कि विद्रोही कांगो में राजनीतिक ताकत हासिल करना चाहते हैं और इसी के तहत उन्होंने गोमा शहर पर कब्जे के बाद वहां अपना मेयर भी नियुक्त कर दिया है। साथ ही गोमा में जनगणना कराने का भी एलान कर दिया गया है। माना जा रहा है कि विद्रोही शहर पर अपना कब्जा बरकरार रखेंगे।
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क्या है लड़ाई की वजह
100 से ज्यादा विद्रोही संगठन मिलकर कांगो पर हमला कर रहे हैं। इनमें एक प्रमुख संगठन है एम23। इस संगठन में करीब चार हजार लड़ाके रवांडा के हैं। रवांडा का आरोप है कि साल 1994 में रवांडा के अल्पसंख्यकों तुत्सीस और उदारवादी हुतुस जनजाति के लोगों का नरसंहार किया गया और इस नरसंहार के पीछे कट्टरपंथी हुतु लोग शामिल थे। रवाडां का कहना है कि अब उन्हीं कट्टरपंथी हुतु जनजाति के लोगों को कांगो की सेना में भर्ती किया जा रहा है। रवांडा का कहना है कि वे तुत्सीस और उदारवादी हुतु लोगों की सुरक्षा के लिए कांगो में बदलाव लाना चाहता है और उसे एक असफल राष्ट्र से आधुनिक राष्ट्र बनाना चाहता है। हालांकि विश्लेषकों को रवांडा के इस दावे पर शक है और उनका कहना है कि रवांडा की नजरें कांगो के खरबों डॉलर की कीमत वाली खनिज संपदा पर है और रवांडा कांगो पर कब्जा कर उसकी खनिज संपदा का अपने फायदे के लिए दोहन करना चाहता है।