मानवाधिकार का मुद्दा: आखिर दबाव में आया श्रीलंका, लेकिन मुख्य मांग कायम
श्रीलंका की एक अदालत ने सोमवार को वकील हिजाज हिज्बुल्लाह को जमानत दे दी। हिज्बुल्लाह को 2009 में ईस्टर संडे के दिन हुए बम धमाकों के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप है कि वे इस बम धमाकों के लिए रची गई साजिश में शामिल थे। हिज्बुल्लाह की गिरफ्तारी तकरीबन दो साल पहले हुई थी...
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मानवाधिकार हनन के मुद्दे पर दुनिया भर में तेज हुई आलोचना का असर श्रीलंका सरकार पर होता दिख रहा है। आतंकवाद निरोधक कानून (पीटीए) के तहत गिरफ्तार एक वकील को मिली जमानत को इस बात का ही प्रमाण बताया जा रहा है। लेकिन इससे मानवाधिकार कार्यकर्ता संतुष्ट ही हुए हैं। जबकि यह संभावना भी जताई गई है कि इससे विपक्षी दलों को राष्ट्रपति गोताबया राजपक्षे को घेरने का एक नया मुद्दा मिल सकता है। खास कर दक्षिणपंथी बौद्ध गुट उन पर विदेशी दबाव में झुकने का आरोप लगाएंगे, इसकी पूरी संभावना है।
बिना मुकदमा चुलाए रखा जेल में
श्रीलंका की एक अदालत ने सोमवार को वकील हिजाज हिज्बुल्लाह को जमानत दे दी। हिज्बुल्लाह को 2009 में ईस्टर संडे के दिन हुए बम धमाकों के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप है कि वे इस बम धमाकों के लिए रची गई साजिश में शामिल थे। हिज्बुल्लाह की गिरफ्तारी तकरीबन दो साल पहले हुई थी। तब से उन पर बिना कोई मुकदमा चलाए उन्हें जेल में रखा गया था। श्रीलंका के प्रिवेंशन ऑफ टेररिज्म एक्ट में ऐसा प्रावधान है कि इस कानून के तहत गिरफ्तार व्यक्ति को बिना मुकदमा चलाए जेल में रखा जा सकता है।
हिज्बुल्लाह का मामला दुनिया भर में चर्चित हुआ। मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि श्रीलंका सरकार के पास हिज्बुल्लाह के खिलाफ कोई सबूत नहीं है। उन्हें सिर्फ संदेह के आधार पर जेल में डाला गया। यही बात कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भी कही है।
साल 2019 में ईस्टर संडे के दिन श्रीलंका में कई चर्च और होटलों पर बम धमाके हुए थे। उनमें 279 लोगों की मौत हो गई थी। बड़ी संख्या में लोग जख्मी भी हुए थे। हिज्बुल्लाह की गिरफ्तारी अप्रैल 2020 में हुई। श्रीलंकाई पुलिस का दावा है कि हिज्बुल्लाह के तार आतंकवादी गुटों से जुड़े हुए हैं। ईस्टर संडे को हुए हमलों के लिए एक स्थानीय गुट को दोषी ठहराया गया था। लेकिन अभियोजक इस बात के साक्ष्य कोर्ट में पेश नहीं कर पाए कि उस गुट से हिज्बुल्लाह का संबंध है।
श्रीलंका के इस एक्ट की हुई बदनामी
हिज्बुल्लाह के मामले में श्रीलंका का प्रिवेंशन ऑफ टेररिज्म एक्ट दुनिया भर में आलोचना का शिकार बना है। खबर है कि इस पर जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार परिषद की अगली बैठक में भी चर्चा होने वाली है। समझा जाता है कि उस मौके पर श्रीलंका के बचाव को मजबूत करने के लिए हिज्बुल्लाह को जमानत मिली है।
श्रीलंका के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने हिज्बुल्लाह को मिली जमानत का स्वागत किया है। लेकिन उन्होंने कहा है कि असल मुद्दा पीटीए में संशोधन का है। मानवाधिकार कार्यकर्ता भवानी फोन्सेका ने एक ट्विट में कहा- इस कानून में अनिश्चित काल तक किसी को भी बिना मुकदमा चलाए जेल में रखने का प्रावधान है, जिसे बदला जाना चाहिए। उन्होंने कहा- ‘इस जमानत से पीटीए को रद्द करने की मांग से ध्यान नहीं हटना चारिए। यूरोपीय संघ और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भी कहा है कि सिर्फ दिखावटी फेरबदल से काम नहीं चलेगा।’ ईस्टर बम धमाकों के पहले से हिज्बुल्लाह श्रीलंका में एक चर्चित नाम रहे हैं। उऩ्हें श्रीलंकाई मुस्लिम समुदाय का मुखर पैरोकार माना जाता है।