प्राउड ब्वॉयज : अब अपनी रणनीति बदल ली है अमेरिका धुर-दक्षिणपंथी गुटों ने, 6 जनवरी को हिंसा में थे शामिल
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अमेरिका में छह जनवरी को कैपिटल हिल (संसद भवन) पर हुए हमले के सिलसिले में डोनाल्ड ट्रंप समर्थक गुट प्राउड ब्वॉयज के चार सदस्यों पर अभियोग लगाया गया है। उन पर सरकारी कार्यवाही में बाधा डालने, कानून पर अमल में रुकावट डालने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और साजिश रचने के आरोप में मुकदमा चलेगा। प्राउड ब्वॉयज ने ही छह जनवरी को ट्रंप समर्थक रैली का आयोजन किया था, जिसमें शामिल लोगों ने कैपिटल हिल पर धावा बोल दिया।
इस बीच खबर है कि छह जनवरी की घटना के बाद ट्रंप समर्थक धुर दक्षिणपंथी गुटों ने अपनी रणनीति बदल दी है, लेकिन उनकी सक्रियता बनी हुई है। वेबसाइट कन्वर्सेशन.कॉम पर छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक प्राउड ब्वॉयज, ओथ कीपर्स, ग्रोयपर्स आदि जैसे गुटों ने नई रणनीति के तहत अपने राष्ट्रीय नेताओं से खुद को अलग कर लिया है।
टेरियो से संपर्क छोड़ा
प्राउड ब्वॉयज ने अपने राष्ट्रीय नेता एनरिक टेरियो से संपर्क काट लिया है। टेरियो को छह जनवरी की घटना से कुछ दिन पहले गिरफ्तार किया गया था। लेकिन बाद में खबर आई कि टेरियो लंबे समय अमेरिकी खुफिया एजेंसी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टीगेशन (एफबीआई) के लिए सूचनादाता का काम भी कर रहा था। उसकी मदद से एफबीआई ने नशीली दवाओं की बिक्री, गैम्बलिंग और मानव तस्करी जैसे कई मामलों को हल किया था।
नाम बदलकर काम करेंगे
प्रतिबंधों का बुरा असर पड़ा
हालिया रिपोर्टों के मुताबिक छह जनवरी के बाद फेसबुक, ट्विटर, एपल, गूगल और अमेजन जैसी बड़ी टेक कंपनियों की तरफ से लगाए गए प्रतिबंधों का धुर-दक्षिणपंथी गुटों पर बुरा असर पड़ा है। ये गुट इन्हीं माध्यमों से अपने सदस्यों से संपर्क करते थे और अपने नफरत भरे संदेश फैलाते थे। लेकिन इन प्लैटफॉर्म्स ने पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप, उनके समर्थक गुटों और उनके लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पार्लर को प्रतिबंधित कर दिया। इससे इन गुटों के लिए अब ऑनलाइन संदेश फैलाना कठिन हो गया है। छह जनवरी की घटना के बाद अमेरिकी समाज में ऐसे समूहों को लेकर विरोध भाव भी बढ़ा है। इसका नुकसान भी उन्हें हो रहा है।
और ज्यादा कट्टर हो सकते हैं चरमपंथी
विशेषज्ञों ने कहा है कि इन नए हालात से देश में ध्रुवीकरण घटने की संभावना नहीं है। बल्कि आशंका यह है कि कटिबद्ध चरमपंथी और ज्यादा कट्टर हो जाएंगे। दक्षिणपंथी बुद्धिजीवी अभी जो बाइडन प्रशासन की वैधता पर सवाल उठा रहे हैं और उसके खिलाफ माहौल बनाने में जुटे हुए हैं। लुइजियाना स्टेट यूनिवर्सिटी में समाज-शास्त्र के प्रोफेसर मैथ्यू वालासिक और यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलाइना में आपराधिक न्याय एवं अपराध विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर शेनॉन रीड ने लिखा है- ‘हम और अन्य पर्यवेक्षक ऐसी संभावना देख रहे हैं कि चरमपंथी छह जनवरी की घटना को आधुनिक गृह युद्ध की शुरुआती झड़प के रूप में देखेंगे। वे अमेरिकी लोकतंत्र को खत्म करने और एक ऐसे नए समाज की शुरुआत करने की कोशिश जारी रखेंगे, जिसमें आव्रजकों, यहूदियों, अश्वेतों, समलैंगिक- ट्रांसजेंडर लोगों और बहुसंस्कृति की अहमियत बताने वाले लोगों के लिए कोई जगह ना हो। हमारा अनुमान है कि ये समूह अधिक से अधिक चरम दक्षिणपंथी होते जाएंगे, जिनसे बड़ी या छोटी हिंसा का खतरा बना रहेगा।’