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श्रीलंका: आतंकवाद रोधी विधेयक के खिलाफ उत्तर पूर्वी प्रांतों में व्यापक विरोध प्रदर्शन, जानें पूरा मामला

Tue, 25 Apr 2023 04:12 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 25 Apr 2023 04:12 PM IST
सार

नया आतंकवाद निरोधक कानून (एटीए) 1979 के आतंकवाद निरोधक अधिनियम (पीटीए) की जगह लेगा। पीटीए को 1979 में तमिल अल्पसंख्यक उग्रवादी समूहों द्वारा अलगाववादी हिंसा के अभियान का मुकाबला करने के लिए एक अस्थायी व्यवस्था के रूप में पेश किया गया था।

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Protests in Sri Lanka's northern eastern provinces over anti-terror bill
श्रीलंका - फोटो : अमर उजाला (फाइल)

विस्तार

श्रीलंका के उत्तरी और पूर्वी प्रांतों में मंगलवार को तमिल नेशनल अलायंस (टीएनए) पार्टी नए विवादास्पद आतंकवाद निरोधक विधेयक के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन कर रही है। इसके कारण सामान्य जनजीवन बाधित हो गया है। टीएनए तमिलों की प्रमुख पार्टी है।  

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नया आतंकवाद निरोधक कानून (एटीए) 1979 के आतंकवाद निरोधक अधिनियम (पीटीए) की जगह लेगा। पीटीए को 1979 में तमिल अल्पसंख्यक उग्रवादी समूहों द्वारा अलगाववादी हिंसा के अभियान का मुकाबला करने के लिए एक अस्थायी व्यवस्था के रूप में पेश किया गया था। प्रधानमंत्री दिनेश गुणावर्धने ने एक अप्रैल को संवाददाताओं से कहा था कि नया आतंकवाद निरोधक कानून इस महीने के अंत में लाया जाएगा।
 

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दोनों प्रांतों के राजनीतिक सूत्रों ने बताया कि तमिल नेशनल अलायंस (टीएनए) द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन नए आतंकवाद निरोधक कानून (एटीए) के खिलाफ हैं। उन्होंने बताया कि उत्तरी जाफना के तेनमाराच्ची, कोडिकामम और चावाकचचेरी तीनों संभागों में सभी दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद होने से जनजीवन ठप हो गया।
 

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सरकार ने मार्च के मध्य में नए विधेयक को अधिसूचित किया था जो पीटीए की जगह लेने के लिए तैयार है। लिट्टे के तीन दशकों के सशस्त्र संघर्ष के दौरान सैनिकों द्वारा पीटीए का व्यापक रूप से इस्तेमाल किया गया था। लिट्टे देश के उत्तर और पूर्व में एक अलग तमिल मातृभूमि स्थापित करना चाहता था। 

 

अंतरराष्ट्रीय अधिकार समूहों और तमिल पार्टियों ने पीटीए के उन प्रावधानों की आलोचना की है जो अदालतों में आरोप दायर किए बिना कई वर्षों तक मनमाने ढंग से हिरासत में रखने की अनुमति देते हैं। लिट्टे के साथ संलिप्तता के लिए 20 साल से अधिक समय तक बिना किसी आरोप के तमिलों को हिरासत में लिए जाने के उदाहरण सामने आए हैं।
 

सरकार पर यूरोपीय संघ (ईयू) से भी पीटीए को निरस्त करने का दबाव है। 2016 से ईयू सरकार से पीटीए को निरस्त करने और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नए आतंकवाद निरोधक कानून लाने का आग्रह कर रहा है। ईयू की संसद ने 2021 के मध्य में प्रस्ताव दिया था कि श्रीलंकाई निर्यात के लिए जीएसपी प्लस की तरजीही व्यापार सुविधा को खत्म कर दिया जाना चाहिए जब तक कि सरकार पीटीए को निरस्त करने के लिए कार्रवाई नहीं करती है।

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