नेपाल में उथल-पुथल: नेता चोर हैं, राजतंत्र समर्थक लिंग्डेन के इस बयान से गरमाई नेपाली राजनीति
पर्यवेक्षकों के मुताबिक नेपाल के ज्यादातर दूसरे दलों ने लिंग्डेन की इस टिप्पणी को उनके लोकतंत्र को बदनाम करने के इरादे का संकेत माना है। राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी देश में राजतंत्र और हिंदू राष्ट्र की वापसी चाहती है। जबकि बाकी तमाम प्रमुख दल लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता के समर्थक हैं...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
नेपाल के राजनीतिक हलकों में राजतंत्र समर्थक राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के नए अध्यक्ष राजेंद्र लिंग्डेन की एक टिप्पणी से हलचल मची हुई है। लिंग्डेन ने एक बयान सत्ताधारी नेपाली कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन में दिया था। नेपाल की परंपरा के मुताबिक नेपाली कांग्रेस ने अपने राष्ट्रीय अधिवेशन के उद्घाटन सत्र में दूसरे दलों के नेताओं को भी आमंत्रित किया। उसी दौरान लिंग्डेन ने कहा- जब नेता गांवों में जाते हैं, तो गांव के लोग कहते हैं कि देखो चोर आया है।
राजतंत्र और हिंदू राष्ट्र की वापसी
पर्यवेक्षकों के मुताबिक नेपाल के ज्यादातर दूसरे दलों ने लिंग्डेन की इस टिप्पणी को उनके लोकतंत्र को बदनाम करने के इरादे का संकेत माना है। राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी देश में राजतंत्र और हिंदू राष्ट्र की वापसी चाहती है। जबकि बाकी तमाम प्रमुख दल लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता के समर्थक हैं। नेपाली मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक लिंग्डेन की इस टिप्पणी से नेपाली कांग्रेस के उद्घाटन सत्र में आए तमाम दलों के नेता भड़क गए। उनमें कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफिड सोशलिस्ट) के अध्यक्ष माधव कुमार नेपाल, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) के अध्यक्ष पुष्प कमल दहल, और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली शामिल हैं।
इन नेताओं ने न सिर्फ लिंग्डेन के बयान की आलोचना की है, बल्कि इसी बहाने नेपाल के आखिरी राजा ज्ञानेंद्र पर भी हमला बोला है। माधव कुमार नेपाल ने कहा कि हटाए गए राजा अब फिर से सत्ता में लौटने का सपना देख रहे हैं। लेकिन लोग उनकी इस प्रतिगामी कोशिश को स्वीकार नहीं करेंगे। दहल ने कहा कि नेता चोर हैं, जैसा शोर वही तत्व मचाते हैं, जो लोकतंत्र और शांति के लिए संघर्ष करने वाले लोगों को बदनाम करना चाहते हैं। उन्होंने कहा- ये बयान तानाशाही कायम करने की साजिश का हिस्सा है। पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने नेपाली कांग्रेस के मंच पर ही लिंग्डेन को चेतावनी दी कि वे फिर से राजतंत्र स्थापित करने का सपना ना देखेँ।
लेकिन पर्यवेक्षकों ने इस बात पर ध्यान दिया है कि नेपाली कांग्रेस के नेताओं ने लिंग्डेन के बयान को मोटे तौर पर नजरअंदाज कर दिया। हालांकि बाद में नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष और प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने ज्ञानेंद्र को खुली चुनौती दी कि वे अपनी पार्टी बनाएं और चुनाव लड़ें।
घट रहा है जनता का भरोसा
लोकतंत्र समर्थक राजनेताओं की सख्त प्रतिक्रिया के बावजूद राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि देश में सचमुच लोगों का राजनेताओं में भरोसा घटा है। त्रिभुवन यूनिवर्सिटी में राजनीति शास्त्र विभाग के प्रमुख रामकृष्ण तिवारी ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘नेता अच्छी तरह जानते हैं कि जनता का उनमें भरोसा घट रहा है। इसीलिए उन्होंने एक राजतंत्र समर्थक नेता के तुच्छ बयान पर इतनी कड़ी प्रतिक्रिया जताई है।’ लोकतंत्र समर्थक एतिहासिक जन आंदोलन के बाद राजा ज्ञानेंद्र जून 2008 में राजभवन छोड़ कर चले गए थे। तब से वे काठमांडू के पास ही नागार्जुन पहाड़ी पर बने एक भवन में रहते हैं।
जानकारों का कहना है कि राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी जैसी राजतंत्र समर्थक दल के अलावा देश में ऐसे गिने-चुने समूह ही हैं, जो राजतंत्र की वापसी चाहते हैं। आम लोगों में राजतंत्र के प्रति समर्थन ज्यादा नहीं है। इसके बावजूद राजतंत्र समर्थक बयानों से नेताओं के कान खड़े हो जाना आश्चर्यजनक है।