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Auto Tariff: राष्ट्रपति ट्रंप का टैरिफ मस्क को भी नहीं भाया; कनाडा-फ्रांस, जर्मनी ने दी जवाबी कार्रवाई की धमकी

Fri, 28 Mar 2025 05:10 AM IST
शिव शुक्ला वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: शिव शुक्ला Updated Fri, 28 Mar 2025 05:10 AM IST
सार

ट्रंप के फैसले से अमेरिकी ऑटो उद्योग भी खुश नजर नहीं आ रहा क्योंकि उन्हें उच्च विनिर्माण लागत और कम ब्रिकी की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। इस बीच, कनाडा, फ्रांस जर्मनी ने टैरिफ मामले में जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है।

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President Trump's decision on auto tariffs is being criticized, Canada-France, Germany threaten retaliation
डोनाल्ड ट्रंप / एलन मस्क - फोटो : ANI

विस्तार

आयातित वाहनों और इसके कलपुर्जों पर 25 फीसदी टैरिफ की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा उनके मुख्य सलाहकार और टेस्ला के सीईओ एलन मस्क को भी रास नहीं आया है। मस्क ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि टैरिफ से उनकी कंपनी भी प्रभावित होगी। टेस्ला अपनी सभी कारें अमेरिका में बनाती है, लेकिन उसके लिए कुछ पार्ट्स आयात करती है। ट्रंप के फैसले से कंपनी के शेयर में भी 1.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। वाहन निर्माता जनरल मोटर्स और स्टेलेंटिस के शेयर में गिरावट दिखी, जबकि फोर्ड के शेयर ने मामूली बढ़त दर्ज की।

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 वहीं, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने ट्रंप के फैसले को प्रत्यक्ष हमला करार दिया और कहा, हम अपने कर्मचारियों की रक्षा करेंगे। अपनी कंपनियों की रक्षा करेंगे। अपने देश की रक्षा करेंगे। वहीं, जर्मनी के वित्त मंत्री रॉबर्ट हेबैक और फ्रांस के वित्त मंत्री एरिक लॉम्बार्ड ने भी जवाबी कार्रवाई की धमकी दी। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा, नया शुल्क अमेरिका और यूरोपीय संघ में उपभोक्ताओं के लिए समान रूप से बदतर है। चीन, जापान, दक्षिण कोरिया ने भी ट्रंप के फैसले की कड़ी आलोचना की है।  
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बड़े आपूर्तिकर्ताओं की मुश्किलें बढ़ेंगी
अमेरिका ने वर्ष 2024 में 474 अरब डॉलर के ऑटोमोटिव उत्पादों का आयात किया, जिसमें 220 अरब डॉलर की यात्री कारें शामिल हैं। मैक्सिको, जापान, दक्षिण कोरिया, कनाडा और जर्मनी, सभी करीबी अमेरिकी सहयोगी सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता थे। यूरोप के लिए ये शुल्क ऐसे समय में एक बड़ा झटका है, जब यूक्रेन युद्ध के  कारण अमेरिका के साथ उसके संबंध पहले से ही काफी बिगड़ गए हैं।
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अमेरिकी ही कर रहे आलोचना
ट्रंप भले ही कुछ भी दावे कर रहे हों, अमेरिकी विश्लेषक उनके फैसले की आलोचना कर रहे हैं। पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स की वरिष्ठ फेलो अर्थशास्त्री मैरी लवली का कहना है, हमें कम विकल्प देखने को मिलेंगे। नई कारों की औसत कीमत पहले ही करीब 49,000 अमेरिकी डॉलर हैं। ऐसे में नए शुल्क के बाद वे पुरानी गाड़ियां ही अपनाने को बाध्य होंगे। विश्लेषक अमेरिका में कारों का उत्पादन 30 फीसदी घटने की आशंका भी जता रहे हैं। चीन, जापान, दक्षिण कोरिया ने भी ट्रंप के फैसले की कड़ी आलोचना की है।

कलपुर्जा निर्माता भारतीय कंपनियों पर पड़ेगा असर
 अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आयाति वाहनों पर 25 प्रतिशत टैरिफ का भारत पर सीमित प्रभाव ही पड़ेगा, क्योंकि भारत से पूरी तरह से बनी कार अमेरिका को निर्यात नहीं होती है। विश्लेषकों का कहना है कि टैरिफ से ऑटो कलपुर्जा बनाने वाली भारतीय कंपनियां ज्यादा प्रभावित होंगी, क्योंकि यहां से अमेरिका को निर्यात काफी अधिक है। जेएटीओ डायनेमिक्स इंडिया के चेयरमैन रवि भाटिया ने कहा, ट्रंप के टैरिफ में भारत को निशाना नहीं बनाया गया है। यह टैरिफ देश के प्रतिस्पर्धियों पर भी लागू होता है। यह बहुत बड़ा झटका नहीं है। भारतीय आपूर्तिकर्ता इस बात पर काम करेंगे कि अमेरिका में अपना बाजार हिस्सा कैसे बनाए रखा जाए। ब्यूरो

 भारत के लिए और ज्यादा लाभकारी फैसला होगा
भाटिया ने कहा, भारत का कम लागत वाला विनिर्माण और भी अधिक लाभकारी हो जाएगा, क्योंकि टैरिफ में 25 % की वृद्धि से अमेरिका में वाहनों की कीमतें बढ़ेंगी। ट्रंप के नए कदम से  अमेरिकी बाजार में संभावनाएं तलाश रहे लोगों को विचार करना होगा। 

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 केवल 1.25 करोड़ डॉलर का रहा है ट्रक निर्यात
अमेरिका को ट्रक निर्यात केवल 1.25 करोड़ डॉलर रहा, जो भारत के वैश्विक ट्रक निर्यात का 0.89 % है। ऑटो पार्ट्स पर जरूर ध्यान देना होगा क्योंकि भारत ने 2024 में अमेरिका को 2.2 अरब डॉलर मूल्य के ऑटो पार्ट्स निर्यात किए, जो वैश्विक निर्यात का 29% है।

ऑटो शेयरों में 6 फीसदी तक गिरावट
ट्रंप के फैसले के बाद भारतीय शेयर बाजार में ऑटो शेयरों में तेज गिरावट देखी गई। टाटा मोटर्स सबसे अधिक 5.5%, अशोक लेलैंड 2.77%, महिंद्रा एंड महिंद्रा 0.35 %, मारुति सुजुकी में 0.09% व अपोलो टायर्स में 0.24 % की गिरावट हुई।

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