बनारसी से कांजीवरम तक: टाइम्स स्क्वायर पर भारत की साड़ियों का जलवा, वॉकथॉन में दिखी विरासत और कारीगरी की मिसाल
न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर पर 'उमा ग्लोबल' के 'साड़ी गोज ग्लोबल' कार्यक्रम में भारतीय साड़ियों, हथकरघा परंपराओं और सांस्कृतिक विविधता का भव्य प्रदर्शन हुआ। असमिया बुनाई, चिकनकारी, बनारसी सिल्क और कांजीवरम से लेकर आधुनिक डिजाइन तक, कार्यक्रम में भारत की समृद्ध टेक्सटाइल विरासत की झलक दिखाई दी।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भारत की अलग-अलग परंपराओं और रंगों से सजी साड़ियों ने न्यूयॉर्क के मशहूर टाइम्स स्क्वायर को रविवार को रंगों से भर दिया। प्रवासी भारतीय समुदाय की महिलाओं और लड़कियों ने खास कार्यक्रम में साड़ी की सदाबहार खूबसूरती, समृद्ध विरासत और देश की सांस्कृतिक विविधता को पूरे गर्व के साथ दुनिया के सामने रखा। न्यूयॉर्क की समाजसेवी संस्था 'उमा ग्लोबल' की ओर से आयोजित 'साड़ी गोज ग्लोबल' कार्यक्रम के तीसरे संस्करण में देश के अलग-अलग हिस्सों की पारंपरिक बुनाई और कारीगरी की शानदार झलक देखने को मिली। रंग-बिरंगी साड़ियों में सजी महिलाओं ने राष्ट्रीय ध्वज लहराए, साथ में नृत्य किया, तस्वीरें खिंचवाईं और अपनी साड़ियों के साथ जुड़ी संस्कृति और विरासत की कहानियां साझा कीं।
असमिया बुनाई से बनारसी सिल्क तक दिखी विविधता
कार्यक्रम में महिलाओं ने शानदार कढ़ाई, पेंटिंग और सजावट वाली साड़ियां पहनकर भारतीय टेक्सटाइल की विविधता पेश की। इनमें पारंपरिक असमिया बुनाई, लखनऊ की चिकनकारी, बनारसी सिल्क और खूबसूरत कांजीवरम जैसी साड़ियां शामिल थीं। नौ गज के इस पारंपरिक परिधान ने भारत के अलग-अलग क्षेत्रों की बुनाई, रंगों और कारीगरी को एक ही मंच पर ला दिया। महिलाओं ने पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी साड़ियों का प्रदर्शन किया और बताया कि यह परिधान केवल फैशन का हिस्सा नहीं, बल्कि उनकी पहचान और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ा हुआ है।
कैथी होचुल ने महिलाओं की विरासत को सराहा
कार्यक्रम में पढ़े गए अपने संदेश में न्यूयॉर्क की गवर्नर कैथी होचुल ने कहा कि यह आयोजन उन महिलाओं का जश्न है, जो टाइम्स स्क्वायर में अपनी विरासत को गर्व के साथ प्रदर्शित करते हुए समुदाय में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। होचुल ने महिलाओं, अल्पसंख्यकों और कारोबारी पेशेवरों के लिए 'उमा ग्लोबल' को एक महत्वपूर्ण संसाधन बताया। उन्होंने कहा कि विविधता और समावेशन से जुड़े कार्यक्रमों, कॉर्पोरेट परामर्श और मेंटरशिप के जरिए संस्था लोगों और व्यवसायों को अपने लक्ष्य तय करने और उन्हें हासिल करने में मदद कर रही है। उनके मुताबिक, सभी वर्गों और पृष्ठभूमियों के लोगों को आगे बढ़ने का अवसर देकर एक बेहतर और अधिक समावेशी भविष्य बनाया जा सकता है।
साड़ी को भारतीय विरासत की जीवंत मिसाल बताया
न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास में कॉन्सल (ट्रेड) राजलक्ष्मी अप्पासाहेब कदम ने साड़ी को भारतीय कला, परंपरा, संस्कृति और मेहनती बुनकरों की जीवंत विरासत बताया। उन्होंने कहा कि बिना सिली जाने वाली साड़ी एक ऐसा सदाबहार परिधान है, जो भारत की विरासत का सम्मान करने के साथ टिकाऊ हथकरघा परंपराओं से जुड़े स्थानीय कारीगरों को भी सशक्त बनाता है। समय के साथ फैशन में बदलाव आने के बावजूद साड़ी ने पीढ़ियों से चली आ रही कहानियों और परंपराओं को अपने भीतर संजोकर रखा है।
सिंधु घाटी सभ्यता से आधुनिक फैशन तक साड़ी का सफर
कदम ने कहा कि साड़ी की जड़ें सिंधु घाटी सभ्यता तक जाती हैं और आज यह परिधान आधुनिक फैशन का भी हिस्सा बन चुका है। युवा डिजाइनर पारंपरिक बुनाई को आधुनिक कट और नए प्रयोगों के साथ जोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं शादियों से लेकर कार्यस्थल और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों तक साड़ी को गर्व के साथ पहन रही हैं। उनके मुताबिक, साड़ी टिकाऊ और कम अपशिष्ट वाली जीवनशैली के लिए भी एक बेहतर विकल्प बनी हुई है।
उपलब्धि हासिल करने वाली महिलाओं का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं को सम्मानित भी किया गया। इनमें इंटीरियर डिजाइनर और 'बंगलो' की क्रिएटिव डायरेक्टर शैला रिज़वी शामिल थीं। न्यूयॉर्क का 'बंगलो' मशहूर रेस्टोरेंट है, जिसे मिशेलिन-स्टार शेफ विकास खन्ना और रेस्टोरेंट मालिक जिमी रिज़वी ने शुरू किया है। शैला रिजवी को उनकी रचनात्मक उपलब्धियों और 'बंगलो' के खास इंटीरियर डिजाइन को आकार देने में उनकी भूमिका के लिए सम्मानित किया गया। वहीं, गेस्ट रिलेशंस मैनेजर और 'बंगलो' टीम की लोकप्रिय सदस्य मायशा रिज़वी को अपनी मिलनसार शैली और शानदार मेहमाननवाजी के लिए सराहा गया।
'साड़ी गोज ग्लोबल' सिर्फ परिधान का उत्सव नहीं
'उमा ग्लोबल' की प्रेसिडेंट डॉ. रीता काकती-शाह ने कहा कि टाइम्स स्क्वायर को उन महिलाओं और लड़कियों से भरा देखना बेहद खास अनुभव था, जो गर्व के साथ भारत की बुनाई की अद्भुत विविधता पेश कर रही थीं। उन्होंने पुरुषों के धोती पहनकर कार्यक्रम में शामिल होने का भी स्वागत किया। उन्होंने कहा कि 'साड़ी गोज़ ग्लोबल' केवल कपड़ों या फैशन का कार्यक्रम नहीं है। यह आत्मविश्वास, विरासत और आपसी जुड़ाव का उत्सव है, जहां अलग-अलग संस्कृतियों और समुदायों को एक साथ आने और अपनी पहचान का जश्न मनाने का अवसर मिलता है।
न्यूयॉर्क की विविधता को बताया शहर की ताकत
न्यूयॉर्क शहर के मेयर के M/WBEs कार्यालय में डिप्टी चीफ बिजनेस डायवर्सिटी ऑफिसर और MWBE बिजनेस अवसरों के वरिष्ठ सलाहकार दिलीप चौहान ने अपने संदेश में न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ममदानी की सोच यह दर्शाती है कि न्यूयॉर्क की सफलता कुछ लोगों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। शहर में रहने वाले लोगों को उनकी पृष्ठभूमि, संस्कृति या मूल स्थान से परे समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यूयॉर्क का विविध समुदाय शहर की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
संगीत, नृत्य और साड़ी रैंप वॉक ने बांधा समां
कार्यक्रम में संगीत और नृत्य के साथ शानदार साड़ी रैंप वॉक भी आयोजित किया गया। 'डांस एक्स स्टूडियो' की प्रस्तुति, लाइव संगीत और बांसुरी तथा ढोल की धुनों ने पूरे आयोजन को उत्सव का रंग दे दिया। कार्यक्रम का खास आकर्षण टाइम्स स्क्वायर पर आयोजित फ्लैश डांस रहा। इसे सेलिब्रिटी कोरियोग्राफर जयश्री श्रीकांत और 'डांस एक्स स्टूडियो' के डांसर्स ने नेतृत्व दिया। इसमें 'साड़ी गोज़ ग्लोबल' के प्रतिभागियों के साथ आम लोगों ने भी उत्साह से हिस्सा लिया।
रैंप पर दिखी पूरे भारत की बुनाई
होस्ट कमेटी की सदस्य गरिमा अग्रवाल की अगुवाई में हुए रैंप वॉक में भारत के अलग-अलग हिस्सों की साड़ियों और पारंपरिक बुनाई को प्रदर्शित किया गया। इसमें क्षेत्रीय टेक्सटाइल, साड़ी पहनने की अलग-अलग शैलियों और स्थानीय कारीगरी की विविधता को खास तौर पर सामने रखा गया। रैंप पर नजर आईं साड़ियों ने यह दिखाया कि भारत में एक ही परिधान कितनी अलग-अलग बुनाई, रंग, तकनीक और सांस्कृतिक पहचान को अपने भीतर समेटे हुए है।
साड़ी वॉकथॉन के साथ हुआ भव्य समापन
कार्यक्रम का समापन टाइम्स स्क्वायर के बीचों-बीच आयोजित खास 'साड़ी वॉकथॉन' के साथ हुआ। इसमें प्रतिभागियों, परिवारों और समर्थकों ने एक साथ हिस्सा लिया और सांस्कृतिक गर्व तथा एकता का संदेश दिया। इस आयोजन ने भारतीय समुदाय को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ न्यूयॉर्क के अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की टेक्सटाइल विरासत को प्रदर्शित करने का अवसर भी दिया।
साड़ी बनी साझा विरासत और अपनत्व का माध्यम
ब्रिटेन में 'साड़ी गोज ग्लोबल' पहल की संस्थापक डॉ. दीप्ति जैन ने कहा कि साड़ियां साझा विरासत का जश्न मनाने और लोगों में अपनत्व की भावना मजबूत करने का शानदार माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि साड़ी केवल पहनावा नहीं है, बल्कि यह अलग-अलग पीढ़ियों, संस्कृतियों और समुदायों को जोड़ने वाली पहचान भी है।
ये भी पढ़ें: अमेरिका में AI की वजह से नहीं जाएगी शिक्षकों की नौकरी: शिक्षा मंत्री बोलीं- मशीन नहीं ले सकता इंसान की जगह
शिक्षा और नेतृत्व के जरिए महिलाओं को सशक्त बनाती है उमा ग्लोबल
न्यूयॉर्क स्थित 'उमा ग्लोबल' एक समाजसेवी संस्था है, जो शिक्षा, नेतृत्व विकास और विभिन्न संस्कृतियों को जोड़ने वाली पहलों के जरिए युवाओं और महिलाओं को सशक्त बनाने का काम करती है। 'साड़ी गोज़ ग्लोबल' इसी उद्देश्य का एक हिस्सा है, जिसमें भारतीय संस्कृति और टेक्सटाइल विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने के साथ महिलाओं के आत्मविश्वास, नेतृत्व और सामुदायिक जुड़ाव को भी बढ़ावा दिया जाता है।