US China: बाइडन ने चीन पर बढ़ाया दबाव, अब तिब्बत भी बना मोर्चा, भारतीय मूल की राजनयिक को बनाया विशेष संयोजक
हाल में अमेरिका का ज्यादा ध्यान शिनजियांग प्रांत और हांगकांग में मानव अधिकारों के कथित हनन पर रहा है। अब उसने उन मुद्दों के साथ तिब्बत के पुराने मसले को भी जोड़ने की कोशिश की है। चीन का आरोप रहा है कि अमेरिका तिब्बत को 'अस्थिर' करना चाहता है।
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अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन ने चीन पर दबाव और बढ़ा दिया है। अब उसने तिब्बत से जुड़े मुद्दों के लिए एक विशेष संयोजक (कोऑर्डिनेटर) को नियुक्त किया है, जिसकी जिम्मेदारी चीन सरकार और दलाई लामा के बीच ठोस वार्ता की शुरुआत करवाने, और मानवाधिकारों व मूलभूत स्वतंत्रताओं की रक्षा करने की होगी। व्हाइट हाउस के बयान के मुताबिक भारतीय मूल की वरिष्ठ राजनयिक उज्रा जेया नई विशेष संयोजक होंगी। जेया बाइडन प्रशासन में नागरिक सुरक्षा, लोकतंत्र, और मानव अधिकार विभाग की उप मंत्री भी हैं।
तिब्बतियों की धार्मिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों का सम्मान सुनिश्चित करेंगी जेया
जेया की नियुक्ति के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने एक बयान में कहा कि अपनी नई भूमिका में जेया ऐसे प्रयास करेंगी कि तिब्बत के लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता सहित मानव अधिकारों और मूलभूत स्वतंत्रताओं का सम्मान सुनिश्चित किया जा सके। इसके साथ ही वे तिब्बत की खास ऐतिहासिक, भाषाई, सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत की रक्षा के प्रयासों को भी अपना समर्थन देंगी। एंटनी ब्लिंकेन ने आगे कहा है कि उज्रा जेया विस्थापित तिब्बतियों की मानवीय जरूरतों को पूरा करने की कोशिशों को भी आगे बढ़ाएंगी।
2002 में बनाया गया था तिब्बत कोऑर्डिनेटर का पद, 10 महीने से चल रहा था खाली
अमेरिका में कोऑर्डिनेटर का कार्यालय विदेश मंत्रालय के अंदर ही होता है। तिब्बत कोऑर्डिनेटर का पद 2002 में बनाया गया था। ट्रंप प्रशासन के दौरान ये पद तीन साल तक खाली रहा था और आखिरी वर्ष में रॉबर्ट देस्त्रो को नियुक्त किया गया था, जिसकी चीन ने कड़ी आलोचना की थी। तब चीन ने कहा था कि अमेरिका चीन के अंदरूनी मामले में दखल देने और तिब्बत को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है। इस साल जब जनवरी में बाइडन राष्ट्रपति बने तो देस्त्रो विदेश मंत्रालय से चले गए थे। तब से 10 महीनों तक ये पद खाली था।
चीन ने की आलोचना, कहा- चीन के अंदरूनी मामलों में दखल देना बंद करे अमेरिका
अब इस ताजा नियुक्ति की भी चीन ने कड़ी आलोचना की है। अमेरिका स्थित चीनी दूतावास के प्रवक्ता लिउ पेंगयू ने एक समाचार एजेंसी से कहा कि अमेरिका को चीन के अंदरूनी मामलों में दखल देना या तिब्बत को अस्थिर करने की कोशिश से बाज आना चाहिए। उन्होंने कहा कि चीन अपने हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। खबरों के मुताबिक तिब्बत को लेकर चीन काफी पहले से ही अपनी तैयारियों में जुटा रहा है। इसके साथ ही चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी इसी साल जुलाई में तिब्बत की यात्रा की थी।
तब उन्होंने स्थानीय अधिकारियों से कहा था कि वे अपने अपनी मातृभूमि और कम्युनिस्ट पार्टी के साथ पहचान को मजबूत बनाएं। पर्यवेक्षकों का कहना है कि जेया की नियुक्ति से अमेरिक और चीन के बीच तनाव और बढ़ेगा। अमेरिका और उसके कुछ साथी देशों ने फरवरी में बीजिंग में होने वाले विंटर ओलिपिंक खेलों के बहिष्कार का एलान किया है। उससे भी तनाव बढ़ा है। विश्लेषकों के मुताबिक बाइडन प्रशासन की ओर से जेया की नियुक्ति ऐसे समय में की गई है, जब कई मुद्दों पर अमेरिका और चीन के बीच टकराव बढ़ रहा है।