President Biden visit to Saudi Arabia: विश्लेषक बोले, उसूल का सौदा करके भी तेल उत्पादन ज्यादा नहीं बढ़वा पाएंगे बाइडन
व्हाइट हाउस ने इस यात्रा को अमेरिका की पश्चिम एशिया रणनीति का हिस्सा बताया है। लेकिन विश्लेषकों में आम राय है कि इसके पीछे बाइडन का मकसद सऊदी अरब को कच्चे तेल का अधिक उत्पादन करने के लिए राजी करना है। अमेरिका में इस समय तेल और प्राकृतिक गैस की महंगाई आसमान छू रही है। इस कारण बाइडन की लोकप्रियता में तेजी से गिरावट आई है...
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अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन पश्चिम एशिया की चार दिन की यात्रा पर निकल चुके हैं। इस दौरान वे इस्राइल, वेस्ट बैंक (इजराइल-फिलस्तीन के बीच विवादित क्षेत्र), और सऊदी अरब जाएंगे। इसके पहले सोमवार को बाइडन ने अमेरिकी अखबार द वाशिंगटन पोस्ट में एक लेख लिख कर अपनी इस यात्रा के बारे में सफाई दी। 2020 में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान बाइडन ने वादा किया था कि सत्ता में आने के बाद वे सऊदी अरब के युवराज प्रिंस सलमान को दुनिया में ‘पराया’ बना देंगे। लेकिन अब उन्हीं सलमान से मिलने वे सऊदी अरब जा रहे हैं, तो इसको लेकर उठे सवालों का जवाब बाइडन ने अपने लेख में देने की कोशिश की।
व्हाइट हाउस ने इस यात्रा को अमेरिका की पश्चिम एशिया रणनीति का हिस्सा बताया है। लेकिन विश्लेषकों में आम राय है कि इसके पीछे बाइडन का मकसद सऊदी अरब को कच्चे तेल का अधिक उत्पादन करने के लिए राजी करना है। अमेरिका में इस समय तेल और प्राकृतिक गैस की महंगाई आसमान छू रही है। इस कारण बाइडन की लोकप्रियता में तेजी से गिरावट आई है। समझा जाता है कि अगले नवंबर में होने वाले संसदीय चुनावों में सत्ताधारी डेमोक्रेटिक पार्टी को इसकी महंगी कीमत चुकानी पड़ेगी। इसीलिए बाइडन किसी तरह महंगाई की समस्या का समाधान चाहते हैं।
सऊदी अरब तेल के सबसे बड़े उत्पादक देशों में है। साथ ही तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक में उसकी आवाज सबसे ज्यादा मायने रखती है। रूस को भी अपने साथ शामिल कर ओपेक अब ओपेक प्लस के नाम से जाना जाने लगा है। इसी कारण मौजूदा ऊर्जा संकट के बावजूद ये संगठन तेल उत्पादन बढ़ाने पर राजी नहीं हो सका है। बाइडन की कोशिश इसके लिए सऊदी अरब पर दबाव बनाने की होगी।
टीकाकारों ने कहा है कि तेल और गैस की महंगाई का हल ढूंढने की कोशिश में बाइडन ने अपने ‘उसूल आधारित’ विदेश नीति से समझौता कर लिया है। अमेरिकी जांच एजेंसियां इस नतीजे पर पहुंची थीं कि प्रिंस सलमान ने ही अखबार द वाशिंगटन पोस्ट के स्तंभकार जमाल खशोगी की हत्या का आदेश दिया था। इसीलिए बाइडन ने उन्हें दंडित करने का वादा किया था। लेकिन यूक्रेन युद्ध छिड़ने के बाद से वे सलमान को मनाने की कोशिश में लगे रहे हैं। अब वे सीधे उनसे मिलने जा रहे हैं।
वाशिंगटन स्थित थिंक कंसल्टैंसी फर्म गल्फ स्टेट एनालिटिक्स में विदेशी नीति एवं ऊर्जा संबंधी वरिष्ठ रणनीतिकार उमुद शोकरी के मुताबिक सऊदी अरब अपने तेल उत्पादन में रोज दस लाख बैरल की बढ़ोतरी करने में सक्षम है। उधर संयुक्त अरब अमीरात रोज तीन से सात लाख बैरल तक तेल का अतिरिक्त उत्पादन कर सकता है। लेकिन यूबीएस बैंक के विश्लेषक गिओवानी स्ताउनोवो ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से बातचीत में कहा कि सऊदी अरब के पास जितनी क्षमता है, वह अपने उत्पादन को उतना बढ़ा चुका है। इसलिए बाइडन को अपनी यात्रा के मकसद में ज्यादा कामयाबी नहीं मिलेगी।
स्ताउनोवो के मुताबिक यूएई के पास जरूर कुछ अतिरिक्त क्षमता है। लेकिन उन्होंने कहा कि अगर तेल उत्पादन का बढ़ाने का इन देशों ने फैसला किया भी, तो उससे बाजार में घबराहट बढ़ेगी। आखिर उन देशों का भंडार सीमित है। तब ये आशंका पैदा होगी कि उनका भंडार समय से पहले चूक जाएगा।