Bangladesh: आम चुनाव की तैयारियां तेज, मुख्य चुनाव आयुक्त बोले- अंतरिम सरकार की समयसीमा के आधार पर चल रहा काम
मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिरउद्दीन ने कहा कि हम अंतरिम सरकार द्वारा तय की गई समयसीमा के आधार पर आगे बढ़ रहे हैं। अंतरिम सरकार ने दिसंबर 2025 और बड़ा बदलाव होने पर जून 2026 तक चुनाव कराने की समयसीमा तय की है।आयोग की मंशा है कि चुनाव निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से हों।
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बांग्लादेश में आम चुनाव की तैयारियां तेज हो गईं हैं। चुनाव आयोग ने कहा कि हम अंतरिम सरकार द्वारा तय की गई समयसीमा के आधार पर आगे बढ़ रहे हैं। अंतरिम सरकार ने दिसंबर 2025 और बड़ा बदलाव होने पर जून 2026 तक चुनाव कराने की समयसीमा तय की है।
मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिरउद्दीन ने कॉकस बाजार में जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक में कहा कि अंतरिम सरकार ने चुनाव के लिए दो समय सीमाएं तय की हैं। चुनाव आयोग इन्हीं समयसीमाओं पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि आयोग की मंशा है कि चुनाव निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से हों और यह विश्वसनीय होने चाहिए, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार किए जाएंगे।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि आम चुनाव के लिए जून तक अंतिम मतदाता सूची जारी करने की तैयारी चल रही है। फिलहाल हमारा लक्ष्य सही मतदाता सूची तैयार करना है। 16 लाख मृत मतदाताओं को सूची से बाहर किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हमें अनुचित निर्णय और दबाव से बचने की जरूरत है। हम ऐसे अधिकारियों पर भरोसा जताएंगे तो निष्पक्ष होकर चुनावी जिम्मेदारी का पालन करेंगे।
मोहम्मद यूनुस ने दिए थे संकेत
यूनुस ने 16 दिसंबर को विजय दिवस के मौके पर अपने संबोधन में संकेत दिया था कि चुनाव 2026 की शुरुआत तक हो सकते हैं। उन्होंने कहा था, आम चुनाव 2025 के अंत और 2026 की पहली छमाही के बीच आयोजित किए जा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि मतदाता सूची अपडेट होने के बाद ही चुनाव कराए जाएंगे। वहीं खालिदा जिया के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने मांग की थी कि इस साल जुलाई-अगस्त तक आम चुनाव कराए जाएं।
आरक्षण के खिलाफ आंदोलन के चलते गई थी शेख हसीना की सरकार
बांग्लादेश में 5 जून को हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले से नौकरियों में 30% कोटा सिस्टम लागू किया था। इस कोटे का लाभ बांग्लादेश की आजादी की लड़ाई लड़ने वाले लोगों के परिजनों को दिया जाना था। इसके खिलाफ ढाका यूनिवर्सिटी में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। धीरे-धीरे ये विरोध प्रदर्शन की आग पूरे देश में फैल गई और लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों के दबाव में आरक्षण खत्म कर दिया गया, लेकिन फिर प्रदर्शनकारी शेख हसीना के इस्तीफे की मांग पर अड़ गए। इसके चलते हिंसा इतनी बढ़ी कि शेख हसीना को देश छोड़कर भागना पड़ा और उन्होंने भारत में शरण ली। इसके बाद सेना ने देश की कमान संभाल ली। बाद में एक अंतरिम सरकार ने सत्ता संभाली और नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को उसका मुख्य सलाहकार बनाया गया।
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