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Myanmar: बिजली संकट में डूबा म्यांमार, पर्यावरण की कीमत पर बांध के निर्माण को हरी झंडी

Tue, 07 Jun 2022 07:33 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यंगून
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यंगून Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 07 Jun 2022 07:33 PM IST
सार

बर्मी भाषा के अखबार खित थित की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक लोडशेडिंग का फैसला सैनिक शासन ने लिया था, लेकिन बिना घोषित किए उस पर अमल किया गया। अप्रैल में म्यांमार में कई त्योहार पड़े। उस दौरान बिजली संकट और गंभीर हो गया...

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power crisis in Myanmar has deepened, military rulers approved the construction of a controversial energy project
म्यांमार जनरल मिन आंग हलिंग - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

म्यांमार में बिजली का संकट और गहरा गया है। इसे देखते हुए अब सैनिक शासकों ने एक विवादास्पद ऊर्जा परियोजना के निर्माण को मंजूरी दे दी है। कार्यकर्ता समूह इस परियोजना के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं। देश में बिजली उत्पादन गिरने के कारण बीते मार्च से देश में अघोषित लोडशेडिंग चल रही है। बर्मी भाषा के अखबार खित थित की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक लोडशेडिंग का फैसला सैनिक शासन ने लिया था, लेकिन बिना घोषित किए उस पर अमल किया गया। अप्रैल में म्यांमार में कई त्योहार पड़े। उस दौरान बिजली संकट और गंभीर हो गया। खबरों के मुताबिक म्यांमार में बिजली की कमी का साफ असर आम जीवन और कारोबार पर देखा जा सकता है।

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इसी संकट के कारण सैन्य शासन ने शान स्टेट में एक पनबिजली परियोजना के तहत बांध बनाने को मंजूरी दी है। साथ ही ऊर्जा और बिजली मंत्रालयों के ढांचे में भारी बदलाव लाया गया है। फरवरी 2021 में हुए सैनिक तख्ता पलट के पहले नागरिक सरकार में बिजली एवं ऊर्जा मंत्रालय के सलाहकार रह गुइलौमे दे लांग्रे ने कहा है- ‘तख्ता पलट के बाद लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) संचालित संयंत्रों को बंद कर दिया गया। पूर्व नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) सरकार के तहत जिन सौर ऊर्जा परियोजनाओं की योजना बनी थी, उन्हें रद्द कर दिया गया। बिजली की लाइनों को क्षतिग्रस्त किया गया। चूंकि सारे देश पर सैनिक शासन का नियंत्रण नहीं है, इसलिए इलेक्ट्रिकल इंजीनियर क्षतिग्रस्त लाइनों की मरम्मत करने की स्थिति में नहीं हैं।’

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40 फीसदी जनता बिजली से दूर!

वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक दे लांग्रे म्यांमार में बिजली क्षेत्र के सर्व प्रमुख विशेषज्ञों में एक हैं। उन्होंने इस वेबसाइट से कहा- ‘म्यांमार में तख्ता पलट के पहले जितना बिजली उत्पादन होता था, उस स्तर तक देश इस साल के अंत तक नहीं लौट पाएगा। अब पूरी आबादी तक बिजली पहुंचाने की परियोजना लागू करने में भी पहले से ज्यादा वक्त लगेगा।’ आंकड़ों के मुताबिक म्यांमार की तकरीबन 40 फीसदी जनता बिजली से दूर है। ग्रामीण इलाकों में दो तिहाई से ज्यादा घर रोशनी के लिए मोमबत्तियों, केरोसीन, और बैटरियों पर निर्भर हैं।

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वेबसाइट निक्कई एशिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक तख्ता पलट से पहले पानी की कमी के कारण बरसात के अलावा बाकी सीजन में म्यांमार सिर्फ 3,100 मेगावाट बिजली पैदा कर पाता था। देश में एलएनजी से चलने वाले दो प्लांट थे, जो 750 मेगावाट बिजली पैदा करते थे। इन संयंत्रों का संचालन एक चीनी कंपनी के हाथ में था। तख्ता पलट के बाद ये संयंत्र बंद कर दिए गए। उससे बिजली संकट और गहरा गया।

इकोसिस्टम को पहुंचेगा नुकसान

इन्हीं हालात के बीच सैनिक शासन ने मेइस्तोने डैम के निर्माण को मंजूरी दी है। 457 फीट ऊंचाई वाले इस डैम के तैयार होने पर इससे छह हजार मेगावाट बिजली बनेगी। लेकिन इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचने का अंदेशा है। परियोजना का विरोध कर रहे संगठन जस्टिस फॉर म्यांमार ने कहा है- ‘म्यांमार की जनता सैनिक शासन के विरोध में एकजुट है। वह मेइत्सोने बांध के प्रति अपना विरोध दिखा चुकी है। इससे उस क्षेत्र के पूरे इकोसिस्टम को नुकसान पहुंचेगा। इसलिए इस परियोजना को तुरंत रद्द किया जाना चाहिए।’ विश्लेषकों के मुताबिक डैम के बढ़ रहे विरोध का एक और कारण यह है कि इसे बनाने का काम एक चीनी कंपनी को दिया गया है। जबकि चीन के प्रति देश में पहले से विरोध भाव मौजूद है।

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