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Report: खराब जीवनशैली का महिलाओं की सेहत पर घातक असर, US-यूरोप और भारत की ताजा रिपोर्टों में बड़ा खतरा उजागर

Thu, 25 Sep 2025 06:18 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाशिंगटन
अमर उजाला नेटवर्क, वाशिंगटन Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Thu, 25 Sep 2025 06:18 AM IST
सार

पश्चिमी देशों के साथ-साथ भारत में भी खराब खानपान, तनाव, शारीरिक निष्क्रियता, नींद की कमी से महिलाएं समय पूर्व गंभीर बीमारियों की चपेट में हैं। इसका असर उनके नवजातों पर भी पड़ रहा है। 

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Poor lifestyles devastating effects on women health recent reports from US, Europe, and India highlight danger
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Freepik.com

विस्तार

आधुनिक जीवनशैली महिलाओं की सेहत के लिए तेजी से घातक बनती जा रही है। पश्चिमी देशों के साथ-साथ भारत में भी खराब खानपान, तनाव, शारीरिक निष्क्रियता, नींद की कमी से महिलाएं समय पूर्व गंभीर बीमारियों की चपेट में हैं। इसका असर उनके नवजातों पर भी पड़ रहा है। जर्नल ऑफ द अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन (जामा नेटवर्क, 2025) की रिपोर्ट में यह तथ्य उभरे हैं।

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अध्ययन में 25,000 अमेरिकी और यूरोपीय महिलाओं को शामिल किया गया। यह शोध 2019 से 2024 तक चला और इसमें दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चंडीगढ़, लखनऊ, चेन्नई और हैदराबाद की महिलाएं भी शामिल की गई थीं।
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प्रजनन स्वास्थ्य की वैश्विक तस्वीर
भारत में जहां प्रजनन स्वास्थ्य की समस्याओं में पीसीओएस और अनियमित पीरियड्स की दर 40% तक बढ़ गई है, वहीं पश्चिमी देशों में भी स्थिति तेजी से बिगड़ रही है। अमेरिका और यूरोप में 18 से 45 वर्ष की महिलाओं में पीसीओएस की दर 15 से 20% है और पांच वर्षों में इसमें 25% वृद्धि दर्ज की गई।

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  • शहरी क्षेत्रों और जंक फूड पर निर्भर महिलाओं में पीसीओएस की दर 18% तक पहुंच गई। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सान फ्रांसिस्को की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. एमी जॉनसन कहती हैं, पश्चिमी समाजों में पीसीओएस अब केवल प्रजनन स्वास्थ्य की समस्या नहीं रह गया है। यह मोटापा, डायबिटीज और मानसिक तनाव से जुड़कर एक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का रूप ले चुका है। पीसीओएस एक पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम एक हॉर्मोनल विकार है।

मां की जीवनशैली का बच्चों की सेहत पर पड़ रहा असर
अध्ययन यह भी बताता है कि महिलाओं की खराब जीवनशैली का असर अगली पीढ़ी पर भी पड़ रहा है। जिन माताओं का बीएमआई ज्यादा था, उनके बच्चों में जन्म के समय ही मोटापे और ब्लड शुगर असंतुलन का खतरा बढ़ गया। गर्भावस्था के दौरान तनाव और अवसाद से बच्चों के दिमागी विकास और व्यवहार पर असर पड़ा। वहीं भारत में  जंक फूड खाने वाली गर्भवती माताओं के बच्चों में लो बर्थ वेट और इम्यूनिटी की कमजोरी देखी गई। एम्स के पीडियाट्रिक विशेषज्ञ डॉ. अरुण खन्ना ने कहा, मां की जीवनशैली गर्भस्थ शिशु की सेहत की बुनियाद तय करती है।

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