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सियासी विवाद: नेपाल में हरे रंग में पार्टियों के चुनाव निशान छापने पर रार, पूर्व प्रधानमंत्री ओली ने जताई नाराजगी
Sun, 13 Mar 2022 05:40 PM IST
अभिषेक दीक्षित
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, काठमांडू
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, काठमांडू
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Sun, 13 Mar 2022 05:40 PM IST
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केपी शर्मा ओली
- फोटो :
ANI
विस्तार
नेपाल के निर्वाचन आयोग ने अगले स्थानीय चुनाव के लिए मतपत्रों पर हरे रंग में पार्टियों के चुनाव निशान छापने का फैसला किया है। इससे सियासी विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व प्रधानमंत्री और प्रमुख विपक्षी दल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनाइटेड मार्क्सिस्ट लेनिनिस्ट) के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली ने निर्वाचन आयोग के इस निर्णय पर गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि ये फैसला सत्ताधारी नेपाली कांग्रेस को फायदा पहुंचाने के लिए लिया गया है। नेपाली कांग्रेस का चुनाव निशान पेड़ है, जिसका रंग हरा होता है।
एक सभा में ओली ने पूछा कि क्या हरे रंग में चुनाव निशान छापने का फैसला इसलिए किया गया है कि जिनकी नजर कमजोर है, वे भी पेड़ को देख सकें? निर्वाचन आयोग पुराने पेड़ को नया जीवन प्रदान करने की कोशिश कर रहा है। इसे मंजूर नहीं किया जा सकता।
ओली के इस आरोप से नेपाली कांग्रेस भड़क गई है। पार्टी के प्रवक्ता प्रकाश शरण महत ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि क्या हमें इसलिए पेड़ों को काट देना चाहिए कि जंगल का रंग हरा है? पार्टी के महासचिव विश्व प्रकाश शर्मा ने आरोप लगाया कि ओली हार के डर से ग्रस्त हैं और इसीलिए उन्होंने ये मुद्दा उठाया है।
पर्यवेक्षकों का कहना है कि नेपाल की राजनीतिक पार्टियों में एक दूसरे पर कीचड़ उछालने की संस्कृति लगातार बढ़ती जा रही है, जबकि उन्हें मुख्य एजेंडे और अपने चुनाव घोषणापत्रों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। पर्यवेक्षकों ने अंदेशा जताया है कि मई में होने वाले चुनाव का माहौल गरमाने पर सियासी बदजुबानियां और बढ़ जाएंगी।
निर्वाचन आयोग ने बीते सोमवार को एलान किया था कि वह इस बार मतपत्रों पर हरे रंग का इस्तेमाल करेगा। जब मुख्य विपक्षी दल ने इसको लेकर सवाल उठाए, तो अपनी सफाई में आयोग ने कहा कि ये फैसला अधिकारियों के पिछले चुनाव के अनुभव के आधार पर लिया गया है। आयोग के प्रवक्ता शालीग्राम शर्मा पौडेल ने कहा कि सफेद मतपत्र पर नीले रंग की मुहर से मतदान किया जाता है। ऐसे में हरा रंग रहने पर कॉन्ट्रास्ट पैदा होगा, जिससे चुनाव निशानों को देख पाना आसान हो जाएगा।
पूर्व चुनाव अधिकारियों ने भी कहा है कि राजनीतिक दल तिल का ताड़ बना रहे हैं। यह इस बात का संकेत है कि नेपाल के राजनीतिक दलों के पास कोई खास एजेंडा नहीं बचा है। पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त भोजराज पोखारेल ने एक अखबार से कहा कि विकास, महंगाई, लोगों की आजीविका आदि से जुड़े कई मुद्दे हमारे सामने हैं, लेकिन पार्टियां ऐसे तुच्छ मुद्दे पर अपना समय बर्बाद कर रही हैं।
इस बीच नेपाल में कुछ सिविल सोसायटी संगठनों ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों से चुनाव कराने की वकालत की है। नेपाल में अभी तक इन मशीनों का इस्तेमाल शुरू नही हुआ है। नेपाल के राजनीतिक दलों में ये आम सहमति रही है कि मतपत्रों के जरिए चुनाव अधिक विश्वसनीय ढंग से होते हैं। उन्हें इस बात का अंदेशा रहा है कि वोटिंग मशीनों को हैक कर चुनाव नतीजों को प्रभावित किया जा सकता है।