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नेपाली संसद के सत्र से पहले तक कायम है सियासी संशय, क्या नेपाली कांग्रेस बनेगी 'किंगमेकर'

Sat, 06 Mar 2021 01:49 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 06 Mar 2021 01:49 PM IST
सार

नेपाली कांग्रेस के नेता भीमसेन दास प्रधान ने काठमांडू पोस्ट से कहा- नैतिक और राजनीतिक रूप से कांग्रेस को ओली का समर्थन नहीं करना चाहिए। नेपाली कांग्रेस ने ओली सरकार के कई कदमों को असंवैधानिक बताया है...

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Political confusion still remains before Nepal parliament session, will Nepal congress give support to fraction of Dahal-Madhav of Nepal communist party
KP sharma OLI and Pushp Kamal Dahal - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट से नया जीवन पाने के बाद नेपाल की संसद के निचले सदन का अधिवेशन शुरू होने से ठीक पहले तक यह साफ नहीं हो सका है कि क्या संसद सत्र के दौरान कोई बहुमत प्राप्त सरकार देश को मिल पाएगी। सत्ताधारी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी में गहरा विभाजन कायम है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस पार्टी के दोनों गुटों ने विपक्षी नेपाली कांग्रेस को सरकार बनाने के लिए समर्थन देने की पेशकश की है। लेकिन नेपाली कांग्रेस ने इस बारे में अभी कोई फैसला नहीं किया है। 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में नेपाली कांग्रेस के महज 63 सदस्य हैं। लेकिन कम्युनिस्ट पार्टी के दोनों में से किसी एक गुट के समर्थन से वह सरकार बनाने की स्थिति में है।

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यहां के अखबार काठमांडू पोस्ट के एक आकलन के मुताबिक नेपाली कांग्रेस का झुकाव नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के पुष्प कमल दहल- माधव कुमार नेपाल गुट की तरफ बनने की संभावना ज्यादा मजबूत है। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने जब प्रतिनिधि सभा को भंग कराने का फैसला किया था, तब नेपाली कांग्रेस ने उसकी कड़ी आलोचना की थी। जानकारों का कहना है कि उसके बाद ओली गुट से हाथ मिलाने से नेपाली कांग्रेस की छवि पर खराब असर पड़ेगा। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक नेपाली कांग्रेस के नेता इसी कारण दहल-नेपाल गुट की तरफ झुक सकती है।
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नेपाली कांग्रेस के नेता भीमसेन दास प्रधान ने काठमांडू पोस्ट से कहा- नैतिक और राजनीतिक रूप से कांग्रेस को ओली का समर्थन नहीं करना चाहिए। नेपाली कांग्रेस ने ओली सरकार के कई कदमों को असंवैधानिक बताया है। ऐसे में उन्हें समर्थन देकर कांग्रेस उन्हें प्रधानमंत्री बनाए रखने में मददगार नहीं बन सकती।
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बताया जाता है कि नेपाली कांग्रेस के संसदीय दल की शुक्रवार को हुई बैठक में ज्यादातर कांग्रेस सांसदों ने ओली से हाथ मिलाने के खिलाफ राय जताई। लेकिन बहुमत की राय यह भी थी कि नेपाली कांग्रेस को कम्युनिस्ट पार्टी के किसी एक गुट के समर्थन से खुद नई सरकार का नेतृत्व करना चाहिए।

नेपाली कांग्रेस के नेताओं ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि सदन में वे प्रधानमंत्री ओली से इस्तीफे की मांग करेंगे। ओली यह कह चुके हैं कि वे सदन का सामना करेंगे। यानी विश्वास मत के पहले इस्तीफा देने की संभावना को वे सिरे से नकार चुके हैं। इसलिए संभावना यह है कि रविवार को सदन की बैठक शुरू होते ही दहल-नेपाल गुट सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करेगा। कुछ मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि मुमकिन है कि दहल-नेपाल गुट नेपाली कांग्रेस के नेता शेर बहादुर देउबा का नाम नए प्रधानमंत्री के रूप में पेश करे।

देउबा का अभी तक यही रुख है कि उनकी पार्टी इंतजार की मुद्रा में है। वह इस बारे में अभी कोई रुख तय नहीं करेगी कि उसे विपक्ष में बैठना चाहिए या सरकार का नेतृत्व करना चाहिए। ये फैसला नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के दोनों गुटों की चालों को देखने के बाद किया जाएगा। नेपाली कांग्रेस को शुरू से ये अंदेशा है कि कम्युनिस्ट पार्टी के दोनों गुट आखिरी वक्त में एकजुट हो सकते हैं। बताया जाता है कि दोनों गुटों के जमीनी कार्यकर्ताओं का अपने-अपने नेताओं पर मतभेद भुलाकर फिर से एकजुट हो जाने के लिए जोरदार दबाव पड़ रहा है।

इस मामले में एक और पहलू नेपाली कांग्रेस के अंदरूनी मतभेद हैं। पार्टी में देउबा विरोधी गुट नहीं चाहता कि देउबा प्रधानमंत्री बनें। देउबा के विरोधी माने जाने वाले राम चंद्र पौडेल साफ कह चुके हैं कि नेपाली कांग्रेस को विपक्ष में बैठने का जनादेश मिला था। पार्टी को जनादेश का सम्मान करना चाहिए।


देउबा के ओली से बेहतर रिश्ते रहे हैं। इसीलिए उनके विरोधी गुट ने पार्टी के अंदर ये माहौल बनाया है कि नेपाली कांग्रेस को किसी हालत में ओली का समर्थन नहीं करना चाहिए। जानकारों का कहना है कि इन सब हालात के कारण ही देउबा अपने कार्ड सावधानी से खेल रहे हैं। इस कारण सियासी अनिश्चय बना हुआ है, जो अब संसद का सत्र शुरू होने के बाद ही दूर होगा।

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