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चिंताजनक: संकट में ध्रुवीय भालू, आबादी बढ़ाना हो रहा मुश्किल; सदी के अंत तक हो सकते हैं गायब
Mon, 23 Dec 2024 05:57 AM IST
शुभम कुमार
अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क
Published by: शुभम कुमार
Updated Mon, 23 Dec 2024 05:57 AM IST
सार
रिपोर्ट के अनुसार ध्रुवीय भालुओं के लिए सबसे बड़ा खतरा समुद्री बर्फ का कम होना है। समुद्री बर्फ कम होने से ध्रुवीय भालुओं के लिए सील का शिकार करना, संभोग करना और यात्रा करना मुश्किल हो रहा है। दुनिया में सबसे ज्यादा ध्रुवीय भालू अलास्का, रूस, ग्रीनलैंड और नॉर्वे (स्वालबार्ड) में पाए जाते हैं
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ध्रुवीय भालू
- फोटो : ANI
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विस्तार
जलवायु परिवर्तन के चलते आर्कटिक सर्कल देशों में ध्रुवीय भालुओं की आबादी में सदी के अंत तक भारी गिरावट आ सकती है। नेचर क्लाइमेट चेंज की रिपोर्ट के अनुसार जलवायु परिवर्तन ध्रुवीय भालुओं के लिए सबसे बड़ा खतरा है। इस बदलाव का असर सबसे पहले और सबसे बुरा आर्कटिक में महसूस किया जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार ध्रुवीय भालुओं के लिए सबसे बड़ा खतरा समुद्री बर्फ का कम होना है। समुद्री बर्फ कम होने से ध्रुवीय भालुओं के लिए सील का शिकार करना, संभोग करना और यात्रा करना मुश्किल हो रहा है। दुनिया में सबसे ज्यादा ध्रुवीय भालू अलास्का, रूस, ग्रीनलैंड और नॉर्वे (स्वालबार्ड) में पाए जाते हैं। ये आर्कटिक सर्कल के उत्तर में रहते हैं। हालांकि कुछ आबादी कनाडा के मैनिटोबा की हडसन बे जैसे ज्यादा दक्षिणी इलाकों में भी पाई जाती है।
एक नजर रिपोर्ट के दावे पर
रिपोर्ट के अनुसार ध्रुवीय भालू की वैश्विक आबादी का अनुमान लगाना मुश्किल है क्योंकि उनकी सीमा का पूर्ण अध्ययन नहीं किया गया है तथापि जीवविज्ञानी दुनियाभर में करीब 20 से 25 हजार ध्रुवीय भालू होने का अनुमान लगाते हैं।
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तेल-गैस कारोबार घातक
तेल और गैस का कारोबार आर्कटिक में तेजी से बढ़ रहा है क्योंकि दक्षिण में ज्यादा सुलभ भंडार सूख रहे हैं। नियमित उत्सर्जन और रिसाव सीधे समुद्र या समुद्री बर्फ में छोड़े जा रहे हैं। तेल रिसाव के संपर्क में आने से भालू के फर का इन्सुलेटिंग प्रभाव कम होता है। तब भालू को गर्म रहने के लिए अधिक ऊर्जा का उपयोग करना पड़ता है और अपने कैलोरी सेवन को बढ़ाकर क्षतिपूर्ति करनी पड़ती है जो उसके आगे के जीवन में मुश्किलें पैदा करता है।
समुद्री बर्फ को बचाना जरूरी
पोलर बियर इंटरनेशनल एक ऐसा संगठन है जो ध्रुवीय भालुओं और उनके आवास के संरक्षण के लिए समर्पित है। इसका कहना है कि पश्चिमी हडसन बे ध्रुवीय भालुओं का घर है। यहां 2060 से 2090 के बीच इनके गायब होने का अनुमान है, जब तक कि पेरिस जलवायु समझौते में निर्धारित तापमान के लक्ष्यों को पूरा नहीं करते। इसलिए ध्रुवीय भालुओं की रक्षा करने का एकमात्र तरीका ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को बहुत कम करना है जो समुद्री बर्फ को पिघला रहा है।
ध्रुवीय भालू जलवायु में बदलाव के कारण समुद्री बर्फ के नुकसान के कारण भूमि पर अधिक समय बिताते हैं, इसलिए उनका मनुष्यों के साथ सामना बढ़ रहा है। मैनिटोबा के चर्चिल शहर ने दुनिया का पहला ध्रुवीय भालू स्मार्ट समुदाय बनने के लिए पोलर बियर इंटरनेशनल के साथ सहयोग किया है। अगर इन्हें बचाने के समुचित प्रयास किए जाएंगे तो दुनिया भविष्य में भी इस शानदार जानवर के साथ रह सकेगी।
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रिपोर्ट के अनुसार ध्रुवीय भालुओं के लिए सबसे बड़ा खतरा समुद्री बर्फ का कम होना है। समुद्री बर्फ कम होने से ध्रुवीय भालुओं के लिए सील का शिकार करना, संभोग करना और यात्रा करना मुश्किल हो रहा है। दुनिया में सबसे ज्यादा ध्रुवीय भालू अलास्का, रूस, ग्रीनलैंड और नॉर्वे (स्वालबार्ड) में पाए जाते हैं। ये आर्कटिक सर्कल के उत्तर में रहते हैं। हालांकि कुछ आबादी कनाडा के मैनिटोबा की हडसन बे जैसे ज्यादा दक्षिणी इलाकों में भी पाई जाती है।
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एक नजर रिपोर्ट के दावे पर
रिपोर्ट के अनुसार ध्रुवीय भालू की वैश्विक आबादी का अनुमान लगाना मुश्किल है क्योंकि उनकी सीमा का पूर्ण अध्ययन नहीं किया गया है तथापि जीवविज्ञानी दुनियाभर में करीब 20 से 25 हजार ध्रुवीय भालू होने का अनुमान लगाते हैं।
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तेल-गैस कारोबार घातक
तेल और गैस का कारोबार आर्कटिक में तेजी से बढ़ रहा है क्योंकि दक्षिण में ज्यादा सुलभ भंडार सूख रहे हैं। नियमित उत्सर्जन और रिसाव सीधे समुद्र या समुद्री बर्फ में छोड़े जा रहे हैं। तेल रिसाव के संपर्क में आने से भालू के फर का इन्सुलेटिंग प्रभाव कम होता है। तब भालू को गर्म रहने के लिए अधिक ऊर्जा का उपयोग करना पड़ता है और अपने कैलोरी सेवन को बढ़ाकर क्षतिपूर्ति करनी पड़ती है जो उसके आगे के जीवन में मुश्किलें पैदा करता है।
समुद्री बर्फ को बचाना जरूरी
पोलर बियर इंटरनेशनल एक ऐसा संगठन है जो ध्रुवीय भालुओं और उनके आवास के संरक्षण के लिए समर्पित है। इसका कहना है कि पश्चिमी हडसन बे ध्रुवीय भालुओं का घर है। यहां 2060 से 2090 के बीच इनके गायब होने का अनुमान है, जब तक कि पेरिस जलवायु समझौते में निर्धारित तापमान के लक्ष्यों को पूरा नहीं करते। इसलिए ध्रुवीय भालुओं की रक्षा करने का एकमात्र तरीका ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को बहुत कम करना है जो समुद्री बर्फ को पिघला रहा है।
ध्रुवीय भालू जलवायु में बदलाव के कारण समुद्री बर्फ के नुकसान के कारण भूमि पर अधिक समय बिताते हैं, इसलिए उनका मनुष्यों के साथ सामना बढ़ रहा है। मैनिटोबा के चर्चिल शहर ने दुनिया का पहला ध्रुवीय भालू स्मार्ट समुदाय बनने के लिए पोलर बियर इंटरनेशनल के साथ सहयोग किया है। अगर इन्हें बचाने के समुचित प्रयास किए जाएंगे तो दुनिया भविष्य में भी इस शानदार जानवर के साथ रह सकेगी।