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पोलैंड: सांविधानिक न्यायाधिकरण के अध्यक्ष को निलंबित किए जाने पर भड़के लोग, हिरासत में तीन प्रदर्शनकारी

Sat, 31 Oct 2026 05:43 PM IST
अमन मौर्या पीटीआई, वारसॉ
पीटीआई, वारसॉ Published by: अमन मौर्या Updated Sat, 31 Oct 2026 05:43 PM IST
सार

पोलैंड में सांविधानिक न्यायाधिकरण के अध्यक्ष बोगदान स्विएच्कोव्स्की के निलंबन के बाद न्यायाधिकरण के मुख्यालय के बाहर भारी विरोध प्रदर्शन हुआ। राष्ट्रपति कारोल नावरोकी विदेश दौरा बीच में छोड़कर स्वदेश लौटे हैं और आपात बैठक बुलाई है।

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poland constitutional tribunal president suspended Police detain protesters during overnight rally nawrocki
पोलैंड में सांविधानिक संकट - फोटो : एएनआई/रॉयटर्स

विस्तार

पोलैंड में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों ने रात भर एक शीर्ष अदालत के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। वे ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष को निलंबित किए जाने का विरोध कर रहे थे। इसके लिए वे देश की 'यूरोप-समर्थक' सरकार को जिम्मेदार मानते हैं। पुलिस ने बताया कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों पर कुछ चीजें फेंकीं और अदालत के चारों ओर लगी सुरक्षा घेराबंदी को तोड़ने की कोशिश की, इसके बाद पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में ले लिया।
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विदेश दौरे से वापस क्यों लौटे पोलैंड के राष्ट्रपति?
इस बीच, पोलैंड के राष्ट्रपति कारोल नावरोकी (जो 'यूरोप-समर्थक' सरकार के विरोधी हैं) ने शुक्रवार शाम सेनेगल की अपनी उड़ान को बीच में ही रोक दिया और देश की मौजूदा स्थिति को देखते हुए वापस लौट आए। उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, 'ऐसे समय में राष्ट्रपति का पोलैंड में होना जरूरी है। मैं सेनेगल की अपनी यात्रा बीच में ही खत्म कर रहा हूं और वापस लौट रहा हूं।'
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पोलैंड लौटने के बाद नावरोकी हंगामे के बावजूद सांविधानिक न्यायाधिकरण पहुंचे और बताया कि उन्होंने निलंबित न्यायाधिकरण अध्यक्ष को भी इमारत के अंदर जाने में मदद की। शनिवार सुबह नावरोकी ने कहा कि पोलैंड की संवैधानिक व्यवस्था का उल्लंघन हुआ है। उन्होंने राजनीतिक स्थिति को स्थिर करने के लिए संसदीय समूहों के प्रमुखों को शनिवार को एक आपातकालीन बैठक के लिए बुलाया है।

क्या है मुख्य विवाद?
सांविधानिक न्यायाधिकरण को लेकर हो रहे ये विरोध प्रदर्शन पोलैंड की 'यूरोप-समर्थक' सरकार और उसके विरोधियों मुख्य रूप से विपक्षी पार्टी 'लॉ एंड जस्टिस' के बीच टकराव को और बढ़ा सकते हैं। पोलैंड की शीर्ष न्यायिक संस्थाएं, जिनमें संवैधानिक अदालत भी शामिल है, दोनों पक्षों के बीच विवाद का मुख्य कारण रही हैं। पोलैंड और यूरोपीय संघ (ईयू) के आलोचकों का आरोप है कि 2015 से 2023 तक सत्ता में रही 'लॉ एंड जस्टिस' (पीआईएस) पार्टी ने प्रमुख न्यायिक संस्थानों पर अपना राजनीतिक नियंत्रण थोपने की कोशिश की। पीआईएस सरकार के दौरान किए गए सुधारों की वजह से यूरोपीय संघ ने पोलैंड पर जुर्माना भी लगाया था।


प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की 'यूरोप-समर्थक' सरकार 2023 में इस वादे के साथ सत्ता में आई थी कि वह न्यायपालिका की स्वतंत्रता को बहाल करेगी। तब से, पीआईएस से जुड़े दो लगातार राष्ट्रपतियों (जिनमें नाव्रोकी भी शामिल हैं) ने अपने वीटो अधिकारों का इस्तेमाल करके सरकार के इन प्रयासों को रोक दिया है। शुक्रवार शाम को, संवैधानिक न्यायाधिकरण की वेबसाइट पर कोर्ट के अध्यक्ष बोगडान स्विएच्कोव्स्की को निलंबित करने की घोषणा की गई। इसके तुरंत बाद प्रदर्शनकारियों (जिनमें पीआईएस नेता जारोस्लाव काजिन्स्की और दक्षिणपंथी राजनेता शामिल थे) ने इमारत के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

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सरकार का कहना है कि स्विएच्कोव्स्की ने बार-बार कानून तोड़ा है और न्यायाधिकरण के कामकाज को खतरे में डाला है। स्विएच्कोव्स्की पिछली पीआईएस सरकार के कार्यकाल में कोर्ट के प्रमुख बने थे। टस्क ने उन पर आरोप लगाया है कि उन्होंने संसदीय बहुमत से चुने गए जजों को न्यायाधिकरण में अपना पद संभालने से रोका।
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