PM Modi Israel Visit: आज से इस्राइल दौरे पर प्रधानमंत्री मोदी, 71 हजार करोड़ के रक्षा सौदों पर टिकीं निगाहें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज दो दिवसीय इस्राइल यात्रा पर रवाना होंगे इस दौरे में आयरन डोम वायु रक्षा प्रणाली, करीब 71 हजार करोड़ रुपये के संभावित रक्षा सौदे और एआई आधारित ड्रोन तकनीक पर अहम चर्चा होने की उम्मीद है। जानिए पीएम मोदी के इस्राइली दौरे में क्या होगा खास...
विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार से दो दिन की इस्राइल यात्रा पर रहेंगे। यह यात्रा इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के निमंत्रण पर हो रही है। विदेश मंत्रालय ने दौरे के बारे में मंगलवार को बयान जारी कर कहा पीएम मोदी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नेतन्याहू से मुलाकात करेंगे।
बयान में कहा गया है दोनों नेता भारत-इस्राइल रणनीतिक साझेदारी में हुई महत्वपूर्ण प्रगति की समीक्षा करेंगे और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, नवाचार, रक्षा एवं सुरक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, व्यापार एवं अर्थव्यवस्था तथा जन-समुदायों के बीच आदान-प्रदान सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के अवसरों पर चर्चा करेंगे। दोनों नेताओं के बीच पारस्परिक हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होने की उम्मीद है। पीएम मोदी इस्राइल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग से भी मुलाकात करेंगे।
पीएम मोदी की दूसरी इस्राइल यात्रा
बतौर प्रधानमंत्री मोदी की यह दूसरी इस्राइल यात्रा है। इससे पहले उन्होंने 2017 में इस्राइल की यात्रा की थी और तब वे इस यहूदी बहुल देश का दौरा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने थे। पीएम मोदी का यह दौरा भारत के सैन्य आधुनिकीकरण में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
पीएम के दौरे से ठीक पहले मंगलवार को इस्राइल के भारत स्थित महावाणिज्यदूत यानिव रेवाच ने कहा, हम अपनी विश्व प्रसिद्ध आयरन डोम वायु रक्षा प्रणाली, तकनीक के साथ भारत को देने के लिए तैयार हैं। यह केवल एक खरीद सौदा नहीं होगा, बल्कि मेक इन इंडिया के तहत इन प्रणालियों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा।
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जाहिर है पीएम मोदी का दौरा केवल राजनीतिक और कूटनीतिक नहीं, बल्कि गहरी रक्षा साझेदारी का अध्याय लिखने जा रहा है। यही नहीं, भारत में इस्राइल के राजदूत रूवेन अजर ने भी कहा कि इस्राइल भारत को ऐसी गोपनीय तकनीकें देने को तैयार है, जैसी अब तक नहीं दी गई हैं। अजर ने कहा कि भारत और इस्राइल आतंकवाद की चुनौतियों से निपटने के लिए नए तौर तरीकों का मिलकर विकास करेंगे। दोनों देश मिसाइल रक्षा प्रणालियों पर भी मिलकर काम करेंगे।
क्या है आयरन डोम
आयरन डोम इस्राइल की उन्नत, मोबाइल और हर मौसम में काम करने वाली कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली है। इससे मुख्य रूप से 4 किमी से 70 किमी की सीमा के भीतर दागे गए रॉकेट और मोर्टार के गोले आदि हवा में ही पहचान कर नष्ट किए जा सकते हैं। ऑपरेशन सिंदूर के अनुभव ने यह साबित किया है कि सीमावर्ती क्षेत्रों और महत्वपूर्ण शहरों की सुरक्षा के लिए एक ऐसी प्रणाली जरूरी है जो रॉकेट और ड्रोन जैसे खतरों को रिहायशी इलाकों में गिरने से पहले ही हवा में नष्ट कर दे।
एआई चालित ड्रोन
रूवेन ने कहा कि यह यात्रा रक्षा और एआई को केंद्र में रखकर दोनों देशों को एक अटूट सुरक्षा सूत्र में बांधेगी। आने वाले समय में एआई से लैस ड्रोन विकसित किए जाएंगे। उनके बयान से पता चलता है कि दोनों देश ऐसे ड्रोन बनाने पर काम करेंगे जो मानवीय हस्तक्षेप के बिना खुद निर्णय लेकर हमला करने में सक्षम हों।
71 हजार करोड़ के रक्षा सौदे संभव
भारत सरकार के सूत्रों के मुताबिक मोदी की यात्रा के दौरान लगभग 71,000 करोड़ रुपये के रक्षा समझौतों पर मुहर लग सकती है। इनमें स्पाइस 1000 प्रिसिशन बम, हवा से जमीन पर वार करने वाली रैम्पेज मिसाइल और एयर लोरा बैलिस्टिक मिसाइलें शामिल हैं। इसके अलावा कम दूरी के खतरे बेअसर करने के लिए आधुनिक लेजर हथियारों पर तकनीकी सहयोग पर भी बात बन सकती है।
रक्षा समझौतों के साथ ही इस्राइल की ओर से प्रस्तावित नए गठबंधन पर भी चर्चा होगी। यह कट्टरपंथ और क्षेत्रीय अस्थिरता के खिलाफ भारत, इस्राइल, ग्रीस और साइप्रस जैसे देशों का एक सुरक्षा नेटवर्क होगा। प्रधानमंत्री मोदी जब इस्राइली संसद नेसेट को संबोधित करेंगे, तो पूरी दुनिया की नजरें इस नई रक्षा धुरी पर टिकी होंगी।
यात्रा ऐतिहासिक : नेतन्याहू
इस्राइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने रविवार को इस यात्रा को ऐतिहासिक करार दिया और कहा कि दोनों देशों की साझेदारी नई ऊंचाइयां छू रही है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी को प्रिय मित्र बताया और दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक तालमेल पर प्रकाश डाला। इस्राइली प्रधानमंत्री ने बताया कि पीएम मोदी अपने दौरे पर इस्राइली संसद नेसेट में भाषण देंगे और यरूशलम में एक नवाचार कार्यक्रम में भाग लेंगे। वे होलोकॉस्ट पीड़ितों के लिए इस्राइल के आधिकारिक स्मारक, याद वाशेम भी जाएंगे। नेतन्याहू ने बताया कि दोनों देशों के बीच एआई और क्वांटम कंप्यूटिंग समेत उच्च तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग को भी बढ़ावा देने पर बात होगी।
पहले के प्रधानमंत्री बचते रहे इस्राइल जाने से
मोदी से पहले के सभी प्रधानमंत्री फलस्तीन के साथ एकजुटता दिखाने के लिए इस्राइल के दौरे पर जाने से बचते रहे। मोदी ने सत्ता में आने के बाद फलस्तीन के प्रति समर्थन बनाए रखते हुए इस्राइल से भी रिश्ते सुधारने का प्रयास किया और इसी का परिणाम है कि दोनों देशों के संबंध इतिहास में सबसे बेहतरीन दौर में हैं।
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