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लगातार युद्धाभ्यास करके पीएलए ने दिए अपने खतरनाक इरादों के संकेत

Wed, 17 Jun 2020 08:01 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला,नई दिल्ली/बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला,नई दिल्ली/बीजिंग Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 17 Jun 2020 08:01 PM IST
सार

  • कोरोना काल का फायदा उठाने की कोशिश में लगा है चीन, ऊंची पहाड़ियों पर ड्रिल जारी
  • पीएलए और तिब्बत मलिट्री कमांड की साझा ड्रिल में दुश्मनों के ठिकाने नष्ट करने का अभ्यास
  • हवाई और जमीनी हमले के सारे आधुनिक तौर तरीके अपनाने की कोशिशों में पीएलए
  • भारत भी मुंहतोड़ जवाब देने की रणनीति में जुटा, चीन की धोखेबाजी बर्दाश्त नहीं

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PLA gave indications of its dangerous intentions by frequent maneuvers
चीनी थलसेना - फोटो : For Refernce Only

विस्तार

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जब से कोरोना के असर से दुनिया तबाह है और चीन खुद को इससे मुक्त बताकर सामान्य गतिविधियों में लगा है, तभी से उसकी कोशिश अपनी तमाम सीमाओं पर सैन्य गतिविधियां बढ़ाना और इस मौके का फायदा उठाना रहा है।

अगर चीन की आधिकारिक वेबसाइट और अखबार ग्लोबल टाइम्स पर गौर करें तो पिछले कई महीनों से वह लगातार चीन की ऐसी हरकतों के बारे में दुनिया को बड़े गर्व से बताने में लगा है।

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चाहे अमेरिका हो या भारत, दोनों के प्रति उसका आक्रामक रवैया साफ तौर पर इन युद्धाभ्यासों के जरिये देखा जा सकता है।

भारत-चीन सीमा पर तनाव और अब गंभीर हिंसक झड़पों में कई भारतीय सैनिकों को शहीद कर देने के बाद से ये सवाल लगातार उठ रहा है कि आखिर चीन की मंशा क्या है और क्या वह सचमुच युद्ध चाहता है।
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अगर उसके हाल के युद्धाभ्यासों पर गौर करें तो ये साफ हो जाता है कि ऐसे वक्त में जब सारी दुनिया कोरोना से जंग लड़ रही है, लोगों के भीतर मौत का खौफ भर दिया गया है, चीन ये मान बैठा है कि उसके लिए यह माकूल मौका है जब वह जबरन उस भूभाग पर कब्जा कर सकता है जो दशकों से विवादों में है।

चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) और तिब्बत मिलिट्री कमांड (टीएमसी) ने लगातार उच्च ऊंचाई वाले इलाकों में युद्धाभ्यास किए हैं और उन ठिकानों को उड़ाने या उनपर कब्जा करने की रणनीति के तहत ऊंची और दुर्गम पहाड़ियों पर अपने इस अभियान को जारी रखा है।

चाइना न्यूज़ डॉट कॉम की खबर के मुताबिक ये दावा किया गया है कि 4700 मीटर की ऊंचाई वाले नियानक्विंग, तंगुला और न्येनचेन तंगुला की पहाड़ियों पर अग्नेयास्त्रों और रासायनिक उपकरणों के इस्तेमाल करके हुए इस युद्धाभ्यास में पीएलए और टीएमसी ने खुद को लगातार सक्रिय रखा है।

इस ड्रिल के तहत दुश्मनों के ठिकानों पर हमले करने और उसे नेस्तनाबूद करने की रणनीतियों को अंजाम दिया जाता रहा है।

15 और 16 जून को हुए ताजा युद्धाभ्यास में पीएलए और टीएमसी ने हवाई से लेकर जमीनी हमले के तमाम आधुनिक तौर तरीके आजमाए और खुद को किसी भी स्थिति के लिए तैयार किया।

जाहिर है इन खबरों के जरिये चीन दुनिया के ये बताने की कोशिश कर रहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो वह किसी भी वक्त पूरी तैयारी के साथ हमले कर सकता है।

पिछले कुछ हफ्तों से फिर से उभर आए सीमा विवाद और सैन्य स्तर की बातचीत करने के बावजूद चीन की इस हरकत से भारतीय सेना सतर्क हो गई है।

खासकर सोमवार रात की हिंसक झड़पों में अपने 20 जवानों को खोने के बाद अब भारत अपनी कूटनीतिक और रक्षा तैयारियों का जायजा ले रहा है और अगली रणनीति पर गंभीर मंथन हो रहा है।


प्रधानमंत्री ने सर्वदलीय बैठक बुला ली है। चीन ने जिस तरह पिछली संधियों को तोड़ा है, वह एक गंभीर संकेत है और बेशक भारत ने इसे बेहद गंभीरता से लिया है।

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने तीनों सेना प्रमुखों से बात की है, प्रधानमंत्री मोदी को पल पल की जानकारी दी जा रही है और भारत ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि धोखेबाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और चीन को समझौते का पालन करते हुए मई से पहले वाली यथास्थिति बनाए रखना होगा।

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