शांति वार्ता में अड़चन!: क्या पाकिस्तान मानेगा तहरीक-ए-तालिबान की ‘मुख्य’ मांग?
पाकिस्तान सरकार और टीटीपी के बीच बातचीत अफगान तालिबान की मध्यस्थता में चल रही है। बातचीत में खुद मेहसूद ने भाग लिया है। बातचीत में पाकिस्तानी दल का नेतृत्व पेशावर कॉर्प कमांडर कर रहे हैं...
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आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और पाकिस्तान सरकार के बीच चल रही शांति वार्ता में अड़चन पैदा होने के संकेत हैं। टीटीपी ने साफ कह दिया है कि पूर्व संघ शासित कबीलाई क्षेत्र (फाटा) के पाकिस्तान के राज्य खैबर पख्तूनवा में विलय को वह स्वीकार नहीं करेगा। उसने इस विलय को खत्म कर फाटा की बहाली को वार्ता में प्रगति के लिए अपनी एक प्रमुख शर्त बना लिया है। टीटीपी पाकिस्तान में सक्रिय आतंकवादी गुट है, जिसके अड्डे अफगानिस्तान में हैं।
टीटीपी के प्रमुख मुफ्ती नूर वली महसूद ने यूट्यूब पर डाले गए अपने इंटरव्यू में यह बात कही है। टीटीपी पर पाकिस्तान में प्रतिबंध लगा हुआ है। वह 2007 के बाद पाकिस्तान में हुए कई भीषण आतंकवादी हमलों की जिम्मेदारी स्वीकार कर चुका है। पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक मुल्ला फजलुल्लाह की मौत के बाद नूर वली महसूद टीटीपी का प्रमुख बना। फजलुल्लाह की 2018 में एक अमेरिकी ड्रोन हमले में मौत हो गई थी।
पाकिस्तानी दल का नेतृत्व पेशावर कॉर्प कमांडर
पाकिस्तान सरकार और टीटीपी के बीच बातचीत अफगान तालिबान की मध्यस्थता में चल रही है। बातचीत में खुद महसूद ने भाग लिया है। बातचीत में पाकिस्तानी दल का नेतृत्व पेशावर कॉर्प कमांडर कर रहे हैं। यूट्यूब पर डाले गए इंटरव्यू में महसूद ने कहा कि पाकिस्तान के टीटीपी की ‘तार्किक मांगों’ को स्वीकार कर लेने के बाद ही ये गुट हथियार डालने और पाकिस्तान के संविधान में आस्था जताने की पाकिस्तान की शर्त पर विचार करेगा। उसने कहा कि पाकिस्तान की गैर-जरूरी मांगों को टीटीपी स्वीकार नहीं करेगा।
महसूद ने इस बात से इनकार किया कि हाल में पाकिस्तानी फौज की जवाबी कार्रवाई में उसे भारी नुकसान हुआ है। लेकिन उसने यह माना कि टीटीपी के भीतर इस समय अंदरूनी मतभेद गहरे हो गए हैं। महसूद ने कहा कि अंदरूनी टकराव खड़ा होने की वजह टीटीपी में में जारी पुनर्गठन है। उसने इस बात का भी खंडन किया कि टीटीपी ने अफगान तालिबान के दबाव के कारण पाकिस्तान से बातचीत दोबारा शुरू की।
पाकिस्तानी रक्षा विश्लेषकों के मुताबिक फाटा संबंधी टीटीपी की मांग को मानना पाकिस्तान सरकार के लिए कठिन होगा। इसके बावजूद महसूद के इस बयान को अहम माना गया है कि फाटा की बहाली को अब टीटीपी की मुख्य मांग है। इसके पहले टीटीपी पाकिस्तान के मौजूदा संविधान को बदल कर शरिया कानून लागू करने की मांग करता रहा है।
आर्मी पब्लिक स्कूल पर हमले से टीटीपी का इनकार
महसूद के इस बयान को भी टीटीपी के रुख में एक बदलाव समझा गया है कि पेशावर के आर्मी पब्लिक स्कूल पर हुए हमले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। दिसंबर 2014 में इस स्कूल पर हुए हमले में 150 से ज्यादा छात्र मारे गए थे। मुल्ला फजलुल्लाह ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी। तब उसके प्रवक्ता ने कहा था कि ये हमला उत्तरी वजीरीस्तान में सैनिक कार्रवाई का बदला लेने के लिए किया गया। उस हमले की दुनिया भर में निंदा हुई थी, लेकिन तब टीटीपी के प्रवक्ता खालिद खोरासानी कहा था- ‘हम चाहते हैं कि वे लोग दर्द महसूस करें।’
लेकिन अब महसूद ने उस हमले में टीटीपी का हाथ होने से इनकार किया है। कुछ विश्लेषकों के मुताबिक यह भी एक सकारात्मक संकेत है।