बदली जिंदगी: अमेरिका में महामारी से न्यूज और इंटरटेनमेंट की संस्कृति में आया बड़ा बदलाव, वीडियो स्ट्रीमिंग साइट्स की बढ़ी संख्या
लॉकडाउन के कारण अमेरिकियों ने स्मार्ट स्पीकर्स जैसे उपकरणों की बड़े पैमाने पर खरीदारी की। इस कारण ऑडियो से संबंधित उपकरण और कंटेंट बनाने वाले कंपनियों/ संस्थाओं को भारी लाभ हुआ। साथ ही लोगों में स्पोर्ट्स बेटिंग (सट्टेबाजी) की लोकप्रियता बढ़ी...
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कोविड-19 महामारी ने अमेरिका के न्यूज कल्चर में जबरदस्त बदलाव ला दिया है। इसका सबसे बड़ा असर यह हुआ है कि अब अधिक से अधिक लोग समाचार के लिए डिजिटल माध्यमों पर निर्भर हो गए हैं। वे समाचार के साथ-साथ अपने लिए जरूरी दूसरी सूचनाएं भी इंटरनेट पर सर्च करने लगे हैं। ये बात एक नए विश्लेषण से सामने आई है। इस विश्लेषण का यह भी निष्कर्ष है कि डिजिटल स्रोतों पर खबरों के लिए बढ़ी निर्भरता से समाज में राजनीतिक और वैचारिक ध्रुवीकरण बढ़ा है। डिजिटल स्रोतों पर निर्भर लोग ज्यादातर मनमाफिक खबर देने वाले स्रोतों की तलाश कर लेते हैं। इस तरह वे वैकल्पिक तथ्यों और विचारों से वंचित हो जाते हैं। विशेषज्ञों ने कहा है कि ऐसे लोग एक इको-चैंबर यानी मन-माफिक सूचनाओं के दायरे में बंद हो जाते हैं।
इसका नतीजा यह हुआ है कि अमेरिका में मुख्यधारा के मीडिया में लोगों का भरोसा तेजी से घटा है। खासकर इसमें रिपब्लिकन पार्टी के समर्थकों के भरोसे में तेजी से ह्रास से हुआ है। मेनस्ट्रीम मीडिया में अविश्वास को लेकर डेमोक्रेटिक पार्टी और रिपब्लिकन पार्टी के समर्थकों के बीच खाई 2020 में सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गई। वेबसाइट एक्सियोस.कॉम पर छपी रिपोर्ट के मुताबिक न्यूज हासिल करने के मामले में रिपब्लिकन पार्टी में भी बंटवारा है। एक खेमा ऐसा है जो अभी भी मेनस्ट्रीम मीडिया को फॉलो करता है। लेकिन एक तबका बिल्कुल ही इसे फॉलो नहीं करता।
डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थक फिलहाल मेनस्ट्रीम मीडिया और फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स दोनों से समाचार हासिल करते हैं। लेकिन रिपब्लिकन पार्टी के समर्थकों में बहुत बड़ा तबका ऐसा है, जो सिर्फ उन सोशल मीडिया स्रोतों को फॉलो करते हैं, जो सिर्फ उनके नजरिए से खबर और विश्लेषण मुहैया कराते हैं।
पिउ रिसर्च सेंटर के विश्लेषण के मुताबिक दोनों दलों के समर्थकों के बीच एक आम बात यह है कि दोनों के लिए खबर का सबसे बड़ा स्रोत टीवी बना हुआ है। दोनों तबके राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय से ज्यादा स्थानीय खबरों पर ध्यान देते हैं। लेकिन इन टीवी चैनलों की खबरों को ज्यादातर ऑनलाइन माध्यमों पर देखा जाता है। पिउ रिसर्च के सर्वे में सामने आया कि पिछले साल ज्यादातर अमेरिकियों ने कोरोना महामारी और चुनाव संबंधी खबरें देखीं।
लेकिन न्यूजगार्ड नामक एक संस्था के अध्ययन में पाया गया कि पिछले साल ऐसी वेबसाइटों की लोकप्रियता में भारी इजाफा हुआ, जिनकी विश्वसनीयता संदिग्ध है। लॉकडाउन के कारण घरों पर रहने को मजबूर हुए लोगों के बीच वीडियो स्ट्रीमिंग साइटों पर हॉलीवुड की फिल्में खूब देखी गईं। इसी कारण हॉलीवुड और सिलिकॉन वैली ने ऐसी साइटों पर अपना निवेश बढ़ा दिया है। बीते साल कई नई स्ट्रीमिंग सेवाएं लॉन्च हुईं। उनमें एचबीओ मैक्स, पीकॉक, पैरामाउंट+, डिस्कवरी+ आदि शामिल हैं। ई-मेकर नाम की एजेंसी के मुताबिक बीते साल स्ट्रीमिंग सब्सक्रिप्शन में में 33.9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
इस एजेंसी के मुताबिक लॉकडाउन के कारण अमेरिकियों ने स्मार्ट स्पीकर्स जैसे उपकरणों की बड़े पैमाने पर खरीदारी की। इस कारण ऑडियो से संबंधित उपकरण और कंटेंट बनाने वाले कंपनियों/ संस्थाओं को भारी लाभ हुआ। खासकर पॉडकास्ट की लोकप्रियता में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई। चूंकि महामारी के कारण लाइव खेल देखने को नहीं मिले, इसलिए लोगों में स्पोर्ट्स बेटिंग (सट्टेबाजी) की लोकप्रियता बढ़ी। कई अमेरिकी राज्यों ने ऐसी सट्टेबाजी को कानूनी बना दिया।
जानकारों का कहना है कि अब जो लोगों ने नई आदतें अपना ली हैं, उन्हें छोड़ना उनके लिए आसान नहीं होगा। इसका मतलब है कि ऑनलाइन खबर और मनोरंजन का बना नया कल्चर स्थायी रूप ले सकता है। इसका लोगों के मनोविज्ञान और समाज और राजनीति पर क्या असर होगा, अब जानकार उसका अनुमान लगा रहे हैं।