फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Pakistan ›   wusat blog hospital

'एंबुलेंस थी, अस्पताल था, पर आसिम को मरना ही था'

Mon, 12 Sep 2016 01:01 PM IST
वुसअतुल्लाह खान/बीबीसी
वुसअतुल्लाह खान/बीबीसी Updated Mon, 12 Sep 2016 01:01 PM IST
विज्ञापन
wusat blog hospital
- फोटो : BBC

मुझे मालूम है कि ये कहानी आपको सिर्फ बोर करेगी, फिर भी पढ़ लें। आसिम अपने दो साल के बच्चे को गाड़ी में साथ बिठाकर कुछ सौदा खरीदने घर से बाहर निकला। अभी वो दुकान के सामने पहुंचकर गाड़ी से बाहर निकलने ही वाला था कि मोटरसाइकिल पर दो लड़के तेजी से आए।

विज्ञापन


एक ने आसिम की कनपटी पर पिस्तौल रखकर मोबाइल फोन छीनना चाहा। डाकू शायद अनाड़ी थे, लिहाजा छीनाझपटी में गोली चल गई और आसिम के सीने में घुस गई। लड़के फरार हो गए। कार के इर्द गिर्द भीड़ लग गई। आसिम होश में था, उसने अपने एक दोस्त को फोन किया। दोस्त दस मिनट के अंदर पहुंच गए।
विज्ञापन


पीछे पीछे एंबुलेंस भी आ गई। आसिम को एंबुलेंस में डालकर अब्बासी शहीद अस्पताल ले जाया गया, जो उस जगह से 15 मिनट की ड्राइव पर था। अब्बासी के इमरजेंसी वालों ने कहा कि मरीज को आप जिन्ना हॉस्पीटल ले जाएं, क्योंकि हमारे पास सीने के गहरे जख्म की जांच का कोई इंतजाम नहीं। एंबुलेंस जिन्ना अस्पताल की ओर चल पड़ी जो कि कराची के दूसरे कोने पर 40 मिनट की दूरी पर था।
विज्ञापन
विज्ञापन


जिन्ना अस्पताल के इमरजेंसी वाले डॉक्टरों ने कहा कि गोली चूंकि दिल के करीब लगी है लिहाजा आसिम को फौरन दिल के वार्ड में ले जाया जाए। आसिम को वॉर्ड तक पहुंचाने में पंद्रह मिनट और लग गए। दिल के वॉर्ड के इंचार्ज डॉक्टर ने कहा हम तो सिर्फ हॉर्ट अटैक के मरीजों को देखते हैं, ये तो जख्मी मरीज है, हमें इन्हें नहीं देख सकते। बेहतर होगा कि आप इन्हें लियाकत नेशनल अस्पताल ले जाएं।

डेथ सर्टिफिकेट कहां से बनेगा

wusat blog hospital

आसिम के दोस्तों ने बक-बक झक-झक में टाइम बर्बाद करने के बजाए एंबुलेंस को लियाकत नेशनल अस्पताल की ओर मुड़वा लिया। जिस वक्त एंबुलेंस गेट के अंदर दाखिल हो रही थी, आसिम की आंखें बंद हो गईं। लियाकत अस्पताल के इमरजेंसी वॉर्ड के डॉक्टर ने कहा, बहुत देर हो गई सर, मरीज इंटरनल ब्लीडिंग की वजह से मर चुका है।

आसिम के दोस्तों ने पूछा कि डेथ सर्टिफिकेट कहां से बनेगा। डॉक्टर ने कहा जिस इलाके में मरीज रहता था, उस इलाके के बड़े अस्पताल से। इसके बाद एंबुलेंस ने एक बार फिर अब्बासी शहीद अस्पताल का रुख किया जहां आसिम को जख्मी होने के बाद सबसे पहले ले जाया गया था। अब्बासी अस्पताल वालों ने चंद कागज भरवाने के बाद 20 मिनट में 38 साल के आसिम की मौत का सर्टिफिकेट बना दिया।

आसिम की मौत की खबर किसी न्यूज चैनल पर नहीं आई, किसी अखबार में नहीं छपी, क्योंकि ढाई करोड़ आबादी वाले कराची में रोजाना ऐसी 36 खबरें रूलती फिरती हैं। आज सिंध के मुख्यमंत्री ने कराची में आम जनता के लिए एक और आधुनिक अस्पताल बनाने की खुशखबरी सुनाई है। सब चैनल इसे ब्रेकिंग न्यूज के तौर पर चला रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news, Crime all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed