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'पेट बाइज्जत हल्का कैसे हो, ये जनता जाने!'

Mon, 21 Nov 2016 02:36 PM IST
वुसतुल्लाह खान/ पाकिस्तान
वुसतुल्लाह खान/ पाकिस्तान Updated Mon, 21 Nov 2016 02:36 PM IST
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Water Aid NGO  report

सेहत और सफाई पर काम करने वाले एक एनजीओ वाटर ऐड ने पिछले सप्ताह एक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार इस समय दुनिया के 70 करोड़ लोगों के लिए ऐसा साफ-सुथरा शौचालय एक सपना है, जिसके कमोड पर बैठकर वो मेरी तरह अखबार पढ़ सकें। इस विश्व के वो देश जहाँ एक बाइज्जत शौचालय से वंचित लोग सुबह ही सुबह खुद को हल्का करने के बारे में सोच में पड़ जाते हैं, उनमें भारत तो चोटी पर है ही, उससे जरा नीचे पाकिस्तान और बांग्लादेश भी हैं।

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और अच्छी खबर ये है कि हम तीनों देश अकेले नहीं हैं। हमारे साथ चीन, रूस, ब्राजील और इंडोनेशिया जैसे देश भी आगे-पीछे जुड़े हुए हैं। कैसी आश्चर्यजनक बात है कि सब सरकारों को ये परेशानी तो रहती है कि जनता का पेट भरा रहना चाहिए। मगर पेट बाइज्जत तरीके से खाली कैसे किया जाए, ये जनता जाने।।। 
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जरा सोचिए कि वो कैसा मंजर होगा कि एक व्यक्ति भारत या पाकिस्तान में किसी झाड़ी में छुपकर या रेलवे ट्रैक पर मुंह फेरकर इधर-उधर देखते हुए खुद को हल्का कर रहा हो और ऊपर से पृथ्वी या गौरी मिसाइल गुजर जाए, और वो उठकर खुशी से नारे लगाना शुरू कर दे!
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मेरी तो समझ में नहीं आता कि रोटी, कपड़ा, मकान, सेहत और रोजगार के साथ टॉयलेट की जरूरत को भी मूलभूत अधिकारों की सूची में कैसे शामिल किया जाए, ताकि हम कम से कम ये कहने योग्य हो सकें कि इंसान और घोड़े में बुनियादी फर्क ये है कि घोड़े के पास टॉयलेट नहीं होता।

जरा सोचिए आपको घर से पांच या छह घंटे घर से बाहर रहना पड़ जाए

Water Aid NGO  report

क्या भोंडा मजाक है कि इस दुनिया में हर साल साढ़े तीन लाख बच्चे सिर्फ इसलिए दस्त और पेट की दूसरी बीमारियों से मर जाते हैं कि उनकी किस्मत में एक साफ-सुथरा शौचालय ही नहीं, जहां वो पेट हल्का करने के बाद ढंग से हाथ धो सकें। कहने को भारत-पाकिस्तान के बड़े-बड़े शहरों में नाम को पब्लिक टॉयलेट बने हुए हैं, मगर मैंने तो आज तक इनमें किसी महिला को आते-जाते नहीं देखा।

जरा सोचिए आपको घर से पांच या छह घंटे घर से बाहर रहना पड़ जाए और आप महिला भी हों तो आपके दिल-दिमाग और बदन की क्या हालत होगी। इस दुनिया में करोड़ों महिलाएं हर रोज इसी अत्याचार से गुजरती हैं और पुरुषों की दुनिया को अहसास तक नहीं होता।

अगर प्रगति इसे कहते हैं कि किस देश के पास कितने परमाणु बम और मिसाइल हैं तो ये इसलिए क्योंकि जो लोग ये सब कुछ बना रहे हैं और उनके बारे में निर्णय ले रहे हैं, उन्हें खुद एक साफ-सुथरे टॉयलेट की सुविधा उपलब्ध है।

जरा तसव्वुर करें कि यदि मोदी जी या नवाज शरीफ किसी ऐसी जगह 24 घंटे के लिए फंस जाए जहां दूर-दूर तक सिवाय खेतों के कोई टॉयलेट ना हो। कोई-कोई पत्रकार उनके साथ-साथ दौड़ता हुआ पूछ ले कि श्रीमान टॉयलेट को डालिए नरक में और ये बताइए कि काला धन कैसे खत्म होगा।।।।? और कश्मीर की समस्या का आपकी नजर में क्या समाधान है।।।?
सोचिए कैसा करारा जवाब मिलेगा।

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