फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Pakistan ›   pakistani Army threat, Pakistani stop criticizing of pak army in social media

सेना की धमकी, सोशल मीडिया पर सेना की आलोचना बंद करें पाकिस्तानी

Tue, 16 May 2017 06:26 PM IST
amarujala.com- Submitted by: मुकेश झा
amarujala.com- Submitted by: मुकेश झा Updated Tue, 16 May 2017 06:26 PM IST
विज्ञापन
pakistani Army threat, Pakistani stop criticizing of pak army in social media

पाकिस्तान सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ तनाव कम करने की कोशिश में देश की सरकार ने नागरिकों को चेतावनी दी है कि वो सोशल मीडिया पर सेना की आलोचना ना करें।

विज्ञापन

देश के गृह मंत्रालय ने कहा है कि कोई भी व्यक्ति ऐसा पोस्ट ना करे जिससे 'सेना की प्रतिष्ठा और उसके सम्मान का अपमान हो।'

इस चेतावनी के दो दिन पहले टीवी चैनलों को इस संबंध में आदेश जारी कर दिए गए थे। एक प्रेस लीक के संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय की जांच रिपोर्ट को सेना ने खारिज कर दिया था जिसके बाद सेना पर गणतंत्र का अपमान करने का आरोप लगया गया था। मामला बीते साल अक्तूबर में हुए कथित "डॉन लीक" से जुड़ा है जब डॉन अखबार ने सरकार और सैन्य अधिकारियों के बीच तनाव के बारे में लिखा था।

विज्ञापन

क्या कहते हैं लोग

pakistani Army threat, Pakistani stop criticizing of pak army in social media

हाल के दिनों में पाकिस्तान में कई लोगों ने सोशल मीडिया के जरिए सेना के आला अधिकारियों पर हमले किए हैं। इनमें से कइयों के निशाने पर नए सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल कमर जावेद बाजवा रहे हैं। एक व्यक्ति ने पूर्व सेना प्रमुख राहिल शरीफ का चित्र ट्वीट किया और लिखा, "हम आपको मिस कर रहे हैं।"

एक अन्य ट्वीट में लिखा था, "मैं सेना के साथ खड़ा होना चाहता हूं, लेकिन कोई मुझे बताए कि सेना कहां पर खड़ी है।" कई लोगों ने सेना की तरफ बदलते रवैए की बात की थी। सैयद तलत हुसैन ने एक ट्वीट में लिखा "29 अप्रैल को रवैया था- बढ़िया काम किया जनरल बाजवा, आप हमारे आदमी है। 10 मई को रवैया था- आपने ये क्या कर दिया, आप हमारे आदमी नहीं हैं।"
 




इस तरह की टिप्पणियों के बाद गृह मंत्रालय के चौधरी निसार अली खान ने पाकिस्तान के कुछ लोगों पर "बिना कारण सोशल मीडिया पर सेना का अपमान करने और उनके सम्मान को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया।" उन्होंने चेतावनी दी है कि ये एक गंभीर अपराध है और ऐसा करने वालों के साथ "बेहद सख्ती से पेश आया जाएगा।" उन्होंने कहा है कि "अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर" सेना या सेना के अधिकारियों का अपमान करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सेना को इससे कितना नुकसान होगा

pakistani Army threat, Pakistani stop criticizing of pak army in social media
पाकिस्तान के पूर्व सेना प्रमुख जनरल राहिल शरीफ

इस्लामाबाद से बीबीसी संवाददाता एम इलियास ख़ान बताते हैं कि जिस दिन से डॉन ने सेना और सरकार के बीच तनाव की खबर दी, उस दिन के कई तरह की प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई लोगों ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बताया तो कई ने कहा कि डॉन ने वही बताया जो दशकों से जनता की नजर में था।

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि 1947 में आजादी के बाद से लगभग हमेशा ही देश में बड़े फैसले प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सेना के अधीन ही रहे हैं। राजनीतिक समूहों समेत समाज के एक वर्ग इस आधार पर इसकी पैरवी करते रहे हैं कि पाकिस्तान पर शासन करने वाली कई पार्टियों के नेता भ्रष्ट हैं और "राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा" हैं।

पिछले तीन सालों में सेना के जनसंपर्क शाखा, इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस यानी आईएसपीआर ने व्यापक तौर पूर्व सेना प्रमुख जनरल राहिल शरीफ को "एक रक्षक" के रूप में पेश करने की कोशिश की। लेकिन 10 मई के बाद, आईएसपीआर के 29 अप्रैल के किए गए विवादास्पद ट्वीट वापस लेने के बाद, सेना के कई समर्थकों ने इसे सेना का आत्मसमर्पण कहा। आईएसपीआर ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री कार्यालय के जारी आदेशों को "खारिज" कर दिया था।

विज्ञापन

किसे मिलेगा इससे फायदा

pakistani Army threat, Pakistani stop criticizing of pak army in social media
पाकिस्तान में अगवा उदारवादी ब्लॉगर की रिहाई के लिए प्रदर्शन

पाकिस्तान में माना जाता है कि सेना सोशल मीडिया पर आलोचना को ले कर संवेदनशील है। सेना पर जनवरी में कई ऐसे उदारवादी ब्लॉगर्स को "अगवा करने" का आरोप है जिनके विचार सेना से मिलते नहीं थे।इस मुद्दे पर सेना का कथित समर्थन करने वालों और न्यापालिका ने कुछ हलकों ने कुछ सोशल मीडिया पोस्ट को 'ईशनिंदा' से संबंधित मान कर सरकार पर इसे ब्लॉक करने के लिए दवाब बनाया।

इसकी तुलना में 'डॉन लीक' के विरोध में उठ रही आवाज़ें सीधे तौर पर सेना के विरोध करती नजर आ रही हैं और किसी तरह के पोस्ट को ईशनिंदा बताते हुए ब्लॉक नहीं किया जा सकता। मामले पर नजर रखने वालों का मानना है कि 2007 में सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ द्वारा चीफ जस्टिस को बर्ख़ास्त किए जाने और साल 2011 में ऐबटाबाद में अमरीकी सेना द्वारा ओसामा बिन लादेन के मारे जाने के बाद से यह अब तक का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है। हालांकि आलोचकों का कहना है कि वैध नागरिक सरकार का सेना सम्मान नहीं करती।

माना जा रहा है कि इस मुद्दे पर सेना के "अपने कदम पीछे हटाने" का सीधा फायदा प्रधानमंत्री नवाज शरीफ़ की सरकार को पहुंचेगा। देश में अगले साल आम चुनाव हैं। लेकिन मज़बूत सैन्य शासन वाले इस देश में इस तरह की आलोचना को जारी रहने देना सेना को पसंद नहीं आएगा। मामले पर नजर रखने वालों का मानना है कि हालांकि सेना ने 29 अप्रैल को किए ट्वीट "वापिस ले लिए" लेकिन ये अभी भी उसके मुख्य मीडिया अकाउंट पर मौजूद हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news, Crime all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed