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पाक में मदरसों पर सरकार की नजर, 50 से 70 संवेदनशील

Tue, 01 Mar 2016 05:38 PM IST
Updated Tue, 01 Mar 2016 05:38 PM IST
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पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में हाल ही में पूरी की गई मदरसों के पंजीकरण की प्रक्रिया के दौरान 50 से 70 के करीब मदरसों को अति संवेदनशील बताया गया है। उन पर कड़ी नज़र रखी जा रही है।

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पंजाब सरकार का दावा है कि चरमपंथ के खिलाफ राष्ट्रीय कार्य योजना के तहत एक वर्ष के दौरान राज्य में लगभग 13,800 मदरसों का पंजीकरण हुआ है और उनकी 'जियो टैगिंग' कर ली गई है यानी उनकी इमारत, स्थान आदि के बारे में पूरी जानकारी एकत्र कर ली गई हैं।
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इससे पहले कराची में 2,122 और हैदराबाद के साढ़े 1500 के करीब मदरसों की जियो टैगिंग की गई थी। इस प्रक्रिया के दौरान 167 मदरसों को सील कर दिया गया था। जियो टैगिंग के लिए तकनीकी संसाधन और सहायता पंजाब सूचना प्रौद्योगिकी बोर्ड दे कर रहा है।
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पंजाब सूचना प्रौद्योगिकी बोर्ड अध्यक्ष उमर सैफ ने बताया कि अगर किसी मदरसे से कोई खतरा है या वहां से चरमपंथ की कोई घटना होने की आशंका है तो उसे 'ए' कैटेगरी में रखा जाता है। पंजाब के 50 से 70 मदरसों को इस कैटेगरी में रखा गया है।

जानकारियों की गहराई से समीक्षा

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उमर सैफ ने कहा कि पंजाब सरकार की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी क्षमता बढ़ी है। इससे न केवल जांच में मदद मिलती है बल्कि किसी अप्रिय घटना को होने से पहले रोका भी जा सकता है।

उन्होंने कहा कि सुरक्षा एजेंसी मदरसों के बारे में एकत्र की गई सभी जानकारियों की गहराई से समीक्षा कर रही हैं और संदिग्ध या खतरनाक मदरसों की निगरानी कर रही हैं। एक साल पहले तक पंजाब सरकार में किसी भी संस्था के पास मदरसों के संबंध में पूरी जानकारी नहीं थी।

लेकिन मदरसों का पंजीकरण और जियो टैगिंग के माध्यम से सुरक्षा एजेंसियां ये सभी डेटा हासिल कर चुकी हैं। लाहौर में एक मदरसे के रजिस्ट्रार मोहम्मद अकरम कश्मीरी ने बीबीसी से बात करते हुए इस प्रक्रिया के बारे में कहा कि पुलिस वालों ने मदरसे के छात्रों, पाठ्यक्रम और प्रशासन के बारे में जानकारी ली हैं।

उन्होंने कहा कि प्रशासनिक तौर पर अगर सरकार कोई सहयोग चाहती है तो वह इसके लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा, "हमारा धर्म कहता है कि अगर हुकूमत दूसरे धर्म की हो और वह तुम्हारे धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप न करे तो उसकी भी बात मानो लो।" साथ ही उन्होंने कहा कि वह किसी को अपने धर्म में हस्तक्षेप की अनुमति नहीं देंगे।

पेशावर में आर्मी पब्लिक स्कूल पर हमले के बाद जब चरमपंथ के खिलाफ रणनीति बनी, तो अधिक सख़्ती से मदरसों की पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई और इस उद्देश्य के लिए एक ऐप्लिकेशन बनाया गया ताकि उन्हें जियो टैग किया जा सके। लाहौर ही में जामिया अशरफिया का पंजीकरण करने वाले थानेदार खालिद परवेज ने बताया, "हमने पहले अपने क्षेत्र के मदरसों के कार्यकारी बोर्ड से संपर्क किया और उन्हें समझाया कि हम देश के सुधार और मौजूदा स्थितियों की गंभीरता के कारण जियो टैगिंग कर रहे हैं।"

मदरसों की समय-समय पर जांच करते रहते

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खालिद परवेज ने बताया कि वह अपने क्षेत्र के मदरसों की समय-समय पर जांच करते रहते हैं और उनकी गतिविधियों पर नजर भी रखते हैं। मदरसों के बाद प्रांत में रह रहे अफ़गान शरणार्थियों की जियो टैगिंग की प्रक्रिया शुरू की गई है लेकिन इस काम की रफ्तार धीमी है।

कानून प्रवर्तन विभाग का मानना है कि इस समय राज्य में अफगान शरणार्थियों की संख्या ढाई लाख से अधिक है। इनमें से एक तिहाई ऐसे हैं जो इन स्थानों पर मौजूद नहीं जहां उन्हें परमिट दिया गया था। यही कारण है कि इन शरणार्थियों के ठिकानों को खोजने और जियो टैग करने में कठिनाई हो रही है।

जियो टैगिंग के दौरान कई अवैध प्रवासियों को वापस भेजा गया है जबकि सैकड़ों नए परमिट जारी किए जा चुके हैं। हालांकि पंजाब सूचना प्रौद्योगिकी बोर्ड के अध्यक्ष उमर सैफ कहते हैं कि पंजाब में होने वाली प्रगति के बावजूद ऐसी योजनाओं से वास्तविक लाभ तब होगा जब सभी प्रांतों के डेटा ऑनलाइन उपलब्ध हो।

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