पाकिस्तान में सेना के निशाने पर मंदिर, हिंदुओं में रोष
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पाकिस्तान में फिर एक मंदिर को तोड़े जाने की आशंका है, जिससे हिंदु अल्पसंख्यकों में रोष है। वाल्मीकि का ये मंदिर रावलपिंडी में है। सेना मंदिर को तोड़कर बैरक बनाना चाहती है। हालांकि स्थानीय हिंदु समुदाय इसका विरोध कर रहा है।
सन् 1935 में बना महर्षि वाल्मीकि का मंदिर रावलपिंडी मे रह रहे हिंदुओं की आस्था और धार्मिक क्रियाकलापों का एकमात्र केंद्र है।
रावालपिंडी पाकिस्तानी सेना का हेडक्वार्टर है और मंदिर अधिक सुरक्षा वाले क्षेत्र में र्है। मंदिर के चारों ओर फ्रंटियर वर्क्स ऑर्गनाइजेशन (एफडब्ल्यूओ) के दफ्तर और आवास बने हुए हैं।
मंदिर को तोड़ने की कोशिश
पाकिस्तान की सेना ने मंदिर को तोड़ने के साथ एक कमरे वाले 53 छोटे घरों को भी तोड़े जाने का निर्णय लिया है। प्रशासन वहां सैनिकों के लिए बैरक बनाना चाहता है।
18 जुलाई को मंदिर को तोडे़ जाने का आदेश दिया गया था, हालांकि बाद में आदेश को 12 अगस्त तक स्थगित कर दिया गया। इसके विरोध में हिंदू समुदाय ने अदालत में याचिका भी दायर की थी।
स्थानीय निवासी रनिश दास कहना है कि विभाजन के पहले से वह पाकिस्तान में रह रहें है। परंतु अब जिंदगी इतनी सामान्य नहीं है जितना 1992 से पहले थी। हमारे परिवार को यहां से अन्य जगह विस्थापित करने के लिए दबाव डाला जाता रहा है।
स्थानीय निवासी जावेद भाटी का कहना भी यहीं है। एफडब्ल्यूओ प्रशासन ने वादा किया है कि वह हमें रहने के लिए फ्लैट्स मुहैया कराएगी, लेकिन हमें यह शर्त मंजूर नहीं है।