फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Pakistan ›   Pakistan gives shelter to the murderer of Indian diplomats

भारतीय राजनयिक के हत्यारों को पाकिस्तान ने दी थी पनाह!

Tue, 01 Aug 2017 09:55 AM IST
amarujala.com- Presented by: ऋतुराज त्रिपाठी
amarujala.com- Presented by: ऋतुराज त्रिपाठी Updated Tue, 01 Aug 2017 09:55 AM IST
विज्ञापन
Pakistan gives shelter to the murderer of Indian diplomats
- फोटो : BBC

फरवरी 1984 में ब्रिटेन के लेस्टरशर में भारतीय राजनयिक रवींद्र म्हात्रे की हत्या के बाद तीन संदिग्ध हत्यारे पाकिस्तान भाग गए थे, लेकिन उन्हें पकड़ने की ब्रितानी सरकार की कोशिशों में पाकिस्तान ने सहयोग नहीं किया। ब्रिटेन के नेशनल आर्काइव ने कुछ गोपनीय दस्तावेजों को सार्वजनिक किया है जिसके आधार पर हिंदुस्तान टाइम्स ने ये रिपोर्ट पब्लिश की है। सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों से पता चलता है कि रवींद्र म्हात्रे के संदिग्ध हत्यारों की पाकिस्तान में मौजूदगी को नकारा गया या उन्हें ढूंढ पाने में बार-बार असमर्थता जताई गई। 

विज्ञापन


म्हात्रे के बदले की गई थी मकबूल बट की मांग
बर्मिंघम में भारतीय वाणिज्य दूतावास में तैनात रवींद्र म्हात्रे का अपहरण करके उनकी हत्या कर दी गई थी। 3 फरवरी 1984 को अगवा किए रवींद्र म्हात्रे का शव दो दिन बाद लेस्टर में मिला था।48 वर्षीय म्हात्रे की हत्या में जिन कश्मीरी चरमपंथियों का हाथ था, उन्होंने म्हात्रे के अपहरण के बाद नकद फिरौती मांगी थी और अपने नेता मकबूल बट्ट को रिहा करने की मांग की थी।
विज्ञापन


इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार करके ब्रिटेन में सजा सुनाई गई थी। अब सामने आए दस्तावेजों से पता चलता है कि वेस्ट मिडलैंड पुलिस ने पाकिस्तान को बताया था कि तीन संदिग्ध हत्यारे पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में हैं, लेकिन पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने उन्हें पकड़ने और ब्रिटेन के हवाले करने की दिशा में कुछ नहीं किया। 
विज्ञापन
विज्ञापन


पाकिस्तान ने भरी थी प्रत्यर्पण की हामी
उस वक्त पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल जिया उल हक थे। पाकिस्तान सरकार ने कहा था कि अगर ये लोग पाकिस्तान में हुए तो उनका ब्रिटेन प्रत्यर्पण कर दिया जाएगा लेकिन पाकिस्तान ने कभी नहीं माना कि वे वहां थे। दस्तावेजों के मुताबिक, ब्रितानी हाई कमिश्नर रिचर्ड फिजिश-वॉकर ने अपने अधिकारियों को लिखा, उन्होंने प्रत्यर्पण की बात मानी तो है, लेकिन पहला कदम ये पक्का करना होगा कि ये लोग पाकिस्तान में हैं, मुझे इस बात का विश्वास नहीं है कि पाकिस्तानी उन्हें ढूंढने या पकड़ने के मामले में कितने गंभीर हैं।  

हाई कमिश्नर वॉकर ने 4 मार्च 1985 को लंदन एक पत्र भेजा जिसमें उन्होंने बताया कि पाकिस्तानी राजनयिक डॉक्टर हैदर को जब पता चला कि हम इस मामले को उठाने वाले हैं तो "उन्होंने मुझे विस्तार से बताया कि इन लोगों को ढूंढने में क्या दिक्कतें आ रही हैं" वॉकर ने ब्रितानी विदेश मंत्रालय को लिखा, "मेरे ख़्याल से ये काम बहुत आसान था, हमने उनको पते दिए थे, हम चाहते थे कि वे चेक कर लें कि ये लोग उन पतों पर थे या नहीं। हमें पाकिस्तानियों पर दबाव बनाए रखना होगा।" ब्रितानी विदेश मंत्रालय ने अपने अधिकारियों को PoK भेजने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन उस पर भी कोई प्रगति नहीं हो पाई। 

पाकिस्तानी अधिकारी से आया कुबूलनामा
एक अन्य टेलीग्राफिक संदेश में एक अधिकारी एसजी फॉकनर ने लिखा था कि पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी शफकत सईद ने इन तीन लोगों की कश्मीर में मौजूदगी की बात स्वीकार की थी। फॉकनर ने अपने 30 मई 1985 के संदेश में लिखा था कि सईद ने कहा, "दिक्कत ये है कि कश्मीर कानूनन हमारा हिस्सा नहीं है, वहां की सरकार से बातचीत की जा रही है और अगर इन लोगों को कानूनन पकड़ा जा सकता है तो जरूर पकड़ा जाएगा और ब्रिटेन भेजा जाएगा, लेकिन उनकी बातों में एक बड़ा सा अगर है। 


अपहर्ताओं ने म्हात्रे की रिहाई के लिए एक मिलियन पाउंड की रकम और कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के नेता मकबूल बट्ट की रिहाई की मांग की थी। भारत में तिहाड़ जेल में मकबूल बट्ट को फांसी दे दी गई थी और ब्रिटेन में तीन संदिग्धों को अदालत ने दोषी करार दिया था, जिनमें से दो ब्रिटेन में पकड़े गए थे और तीसरा व्यक्ति अमरीका से गिरफ्तार किया गया था। PoK में जाकर छिपे तीन लोगों को कभी पकड़ा नहीं जा सका। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news, Crime all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed