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कश्मीर मामला: पाकिस्तान के विदेश मंत्री कुरैशी ने इस्लामिक सहयोग संगठन के महासचिव से की बात
Tue, 27 Aug 2019 03:41 AM IST
देव कश्यप
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 27 Aug 2019 03:41 AM IST
सार
- पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) के महासचिव से की बात।
- कश्मीर के हालात के बारे में जानकारी दी।
- कहा- क्षेत्रीय स्थिति के बारे में दुनिया को अवगत कराने के सतत राजनयिक प्रयासों का हिस्सा।
- कुरैशी ने कहा- पाकिस्तान कश्मीरियों के अधिकारों की रक्षा के लिये किसी भी हद तक जाएगा।
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शाह महमूद कुरैशी (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
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विस्तार
पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे पर लगभग हर देश से मदद मांगने की कोशिश कर रहा है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भारत के खिलाफ माहौल बनाने के लिए जीतोड़ मेहनत कर रहा है, लेकिन अबतक उसे हर तरफ से नाकामी ही हाथ लगी है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने सोमवार को इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) के महासचिव यूसुफ अल उसीमीन से बात की और उन्हें कश्मीर के हालात के बारे में जानकारी दी।
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पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि यह क्षेत्रीय स्थिति के बारे में दुनिया को अवगत कराने के पाकिस्तान के सतत राजनयिक प्रयासों का हिस्सा था। बयान के मुताबिक, विदेश मंत्री ने कश्मीर पर भारत के कदम से क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा को उत्पन्न होने वाले गंभीर खतरे को भी ओआईसी को अवगत कराया।
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कुरैशी ने महासचिव के साथ कश्मीर मुद्दे पर प्रस्ताव साझा किये और मुद्दे पर ओआईसी की प्रतिक्रिया पर भी विचार-विमर्श किया। दोनों नेता अगले कदमों को लेकर संपर्क बनाए रखने पर सहमत हुए।
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इस बीच यहां कश्मीर पर आयोजित एक सेमीनार में कुरैशी ने कहा कि पाकिस्तान कश्मीरियों के अधिकारों की रक्षा के लिये किसी भी हद तक जाएगा। उन्होंने कहा कि हाल ही में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा पचास साल बाद कश्मीर पर बंद कमरे में विचार विमर्श ने कश्मीर पर पाकिस्तान के संकल्पों की वैधता की पुष्टि हुई।
कुरैशी ने दावा किया कि भारत का आधिपत्य का मंसूबा क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरा है और इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है। उन्होंने कहा, 1965 और 1971 के युद्धों में सिंधु जलसंधि का सम्मान किया गया था, लेकिन यह पहली बार है जब भारत ने इस मानसून के मौसम में पाकिस्तान के साथ जल आंकड़े साझा नहीं किये।
दरअसल भारत द्वारा पांच अगस्त को जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकतर खंडों को समाप्त कर दिया गया था तब से दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से स्पष्ट तौर पर कह दिया है कि अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाया जाना उसका अंदरूनी मामला है। साथ ही भारत पाकिस्तान को वास्तविकता स्वीकार करने की भी सलाह दे चुका है।