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पाकिस्तान आम चुनाव : सहानुभूति के सहारे नवाज शरीफ तो इमामों के भरोसे इमरान खान

Sat, 21 Jul 2018 04:33 PM IST
एजेंसी, इस्लामाबाद
एजेंसी, इस्लामाबाद Updated Sat, 21 Jul 2018 04:33 PM IST
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Pakistan election: Nawaz Sharif depends on sympathy whereas Imran Khan relying on clerics
नवाज शरीफ, इमरान खान

पाकिस्तान में चुनाव की बिसातें बिछ चुकी हैं। हालांकि इन चुनावों में कई क्षेत्रीय और धार्मिक दल उभरे हैं जो कट्टरपंथ के नाम पर मतों के ध्रुवीकरण में जुटे हैं लेकिन मुख्य मुकाबला नवाज शरीफ की पार्टी पीएमएल-एन और क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान की पार्टी पीटीआई के बीच है। शरीफ की पार्टी को उनके और उनकी बेटी मरियम के जेल में बंद होने से सहानुभूति का पूरा सहारा मिलना तय है तो दूसरी तरफ इमरान का रुख इमामों और मौलवियों के दर की तरफ बढ़ गया है। इमरान को सेना का साथ मिलने का भी आरोप शरीफ ने लगाया है।

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2016 के पनामा पेपर लीक मामले में पाक सत्ता से बेदखल पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ अब भी उनकी पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) का चेहरा हैं। जेल में बंद होने के चलते उनकी तरफ से फिलहाल शरीफ के भाई शहबाज शरीफ प्रचार अभियान की बागडोर संभाले हुए हैं। पार्टी की कोशिश है कि वह मतदाताओं के बीच यह संदेश दे कि उन्हें गैर कानूनी ढंग से हटाया गया है और अपनी बेगुनाही के लिए वे खुद आगे होकर बेटी के साथ अपनी पत्नी को बीमार हालत में लंदन छोड़कर देश वापस लौटे हैं। जबकि उनके साथ पाक में कैदियों जैसा बर्ताव हो रहा है।
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द नेशन अखबार के मुताबिक नवाज शरीफ की पार्टी उनको पीड़ित के रूप में पेश कर रही है तो दूसरी तरफ इमरान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) कट्टरपंथियों के समर्थन के लिए इमामों और मौलानाओं के भरोसे है। उनकी पार्टी से चुनाव लड़ रहे सभी उम्मीदवार पहले मस्जिद जाते हैं और फिर चुनाव प्रचार करते हैं। खुद इमरान खान ने अब तक करीब 52 बड़े इमामों से निजी मुलाकात की है। इसका फर्क यह पड़ा कि इमामों और मौलानाओं ने भी इमरान को समर्थन दिया। उधर, पाक सेना इमरान के कट्टरपंथी झुकाव को लेकर परोक्ष रूप से समर्थन दे रही है।

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‘मुझे क्यों निकाला’ का फैसला करेंगे शरीफ समर्थक

Pakistan election: Nawaz Sharif depends on sympathy whereas Imran Khan relying on clerics
Nawaz Sharif, Maryam Sharif

इमरान पर सेना के समर्थन का भी आरोप

पाकिस्तान की सियासत में वैसे तो हमेशा से ही सेना और आईएसआई अपनी हुकूमत चलाती रही हैं लेकिन इस बार उस पर इमरान खान की पार्टी को समर्थन देने के आरोप लगे हैं। शहबाज शरीफ के अलावा मरियम नवाज भी खुले तौर पर यह आरोप लगा चुकी हैं। यही नहीं बल्कि इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने भी पाक सेना और आईएसआई को चुनाव से ठीक एक सप्ताह पहले अन्य विभागों के काम में हस्तक्षेप न करने का आदेश दिया है। जस्टिस शौकत अजीज सिद्दीकी ने कहा कि खुफिया एजेंसियों को यह एहसास होना चाहिए कि उन्हें संविधान के दायरे में रहकर काम करना है।

‘मुझे क्यों निकाला’ का फैसला करेंगे शरीफ समर्थक

नवाज शरीफ ने नारा दिया है कि ‘मुझे क्यों निकाला...’, और 25 जुलाई को मतपेटियों में बंद होने वाले प्रत्याशियों के भाग्य इस बात का चुनाव परिणाम के रूप में फैसला करेंगे। चुनाव विश्लेषक सोहेल बराइच के मुताबिक यदि अवाम इस बात से राजी हो जाती है कि उन्हें गैर कानूनी ढंग से हटाया गया है तो उनकी पार्टी और भी ताकत के साथ वापसी करेगी। अन्य विश्लेषक अहमद बिलाल ने कहा कि शरीफ खुद को एक पीड़ित के रूप में पेश करने में सफल रहे हैं और जनता उन्हें सुन रही है।

Pakistan election: Nawaz Sharif depends on sympathy whereas Imran Khan relying on clerics
imran khan

पत्नी कुलसुम के प्रति सहानुभूति भी शरीफ के साथ

नवाज शरीफ की पत्नी कुलसुम इन दिनों गंभीर रूप से बीमार हैं और उनका लंदन में इलाज चल रहा है। पिछले साल अगस्त में उनके कैंसर का पता चला था जबकि गत कई दिनों से वह लंदन के अस्पताल में वेंटिलेटर पर हैं। इन कठिन हालातों में शरीफ और उनकी बेटी लंदन छोड़कर अपने देश लौटे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि उनकी बीमारी ने मतदाताओं में शरीफ और पार्टी के लिए सहानुभूति पैदा की है। शरीफ पिछले चुनाव में तानाशाह राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की ज्यादतियों का संदेश जनता में फैलाकर सहानूभूति की लहर के चलते सत्ता में लौटे थे।

पाक की मुख्य राजनीतिक पार्टियां

पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) ----------- शहबाज शरीफ
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ------------------- बिलावल भुट्टो जरदारी
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ --------------- इमरान खान
मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट -------------------- खालिद मकबूल सिद्दीकी

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