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तालिबान से टकराने वाली लड़की पर हमला

Wed, 10 Oct 2012 12:26 PM IST
बीबीसी हिन्दी
बीबीसी हिन्दी Updated Wed, 10 Oct 2012 12:26 PM IST
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malala yousafzai in critical condition in chm
मलाला को मंगलवार को देश के उत्तर-पश्चिम में स्वात घाटी में गोली मार दी गई थी. पहले बताया गया था कि वे खतरे से बाहर हैं लेकिन अब डॉक्टर उसकी हालत नाजुक बता रहे हैं। मलाला युसुफ़ज़ई पर क्षेत्र के मुख्य शहर मिंगोरा में हमला तब हुआ जब वो स्कूल से घर वापस लौट रही थी।
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पाकिस्तानी तालिबान ने कहा है कि हमला उसने किया है. एहसानउल्लाह एहसान ने बीबीसी उर्दू को बताया कि मलाला पर इसलिए हमला किया गया क्योंकि वो तालिबान के खिलाफ थी, धर्म निर्पेक्ष थी और उसे बख्शा नहीं जाएगा।
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हमले की निंदा
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी ने कहा है कि इस हमले से इस्लामिक चरमपंथियों से लड़ने की पाकिस्तान की प्रतिबद्धता पर असर नहीं पड़ेगा। वहीं प्रधानमंत्री राजा परवेज़ अशरफ ने कहा, "हमें उस मानसिकता से लड़ना होगा जो हमले के लिए ज़िम्मेदार है. हमें इसकी निंदा करनी होगी। मलाला मेरी बेटी की तरह है, वो आपकी भी बेटी है. अगर ऐसी ही मानसिकता रही तो किसकी बेटी सुरक्षित रहेगी।"
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मलाला पहली बार सुर्खियों में वर्ष 2009 में आईं जब 11 साल की उम्र में उन्होंने तालिबान के साए में ज़िंदगी के बारे में बीबीसी उर्दू के लिए डायरी लिखना शुरु किया। इसके लिए उन्हें वर्ष 2011 में बच्चों के लिए अंतरराष्ट्रीय शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था। पाकिस्तान की स्वात घाटी में लंबे समय तक तालिबान चरमपंथियों को दबदबा था लेकिन पिछले साल सेना ने तालिबान को वहां से निकाल फेंका।

बहादुरी के लिए पुरस्कार भी मिला
मलाला सिर्फ़ 11 वर्ष की थीं जब तालिबान ने स्वात घाटी में लड़कियों के स्कूल बंद करने का फ़रमान जारी किया था। मलाला ने गुल मकाई नाम से बीबीसी उर्दू के लिए डायरी लिखी जिसमें उन्होंने तालिबान के शासन की वजह से लोगों को हो रही मुसीबतों का खुलासा किया। उनकी पहचान लोगों के सामने तब आई जब स्वात से तालिबान को खदेड़ा जा चुका था. बाद में उन्हें वीरता के लिए राष्ट्रीय पुरुस्कार मिला और वो बच्चों के एक अंतरराष्ट्रीय शांति पुरुस्कार के लिए नामांकित की गईं।

राजनेता बनने की इच्छा
पिछले साल बीबीसी से बातचीत में उन्होंने बताया कि लड़कियां डरती थीं कि "तालिबान उनके चेहरे पर तेज़ाब फेंक सकते हैं या उनका अपहरण कर सकते हैं।" मलाला ने बताया था, "इसलिए उस वक्त हम कुछ लड़कियां वर्दी की जगह सादे कपड़ों में स्कूल जाती थीं ताकि लगे कि हम छात्र नहीं हैं। अपनी किताबें हम शॉल में छुपा लेते थे।"


तालिबान के लड़कियों की शिक्षा पर प्रतिबंध लगाने के बारे में मलाला की डायरी का एक हृदयस्पर्शी अंश कुछ इस प्रकार है: "आज स्कूल का आखिरी दिन था इसलिए हमने मैदान पर कुछ ज़्यादा देर खेलने का फ़ैसला किया। मेरा मानना है कि एक दिन स्कूल खुलेगा लेकिन जाते समय मैंने स्कूल की इमारत को इस तरह देखा जैसे मैं यहां फिर कभी नहीं आऊंगी।"

बड़े होकर मलाला क़ानून की पढ़ाई करने और राजनीति में जाना चाहती हैं। उन्होंने कहा था, "मैंने ऐसे देश का सपना देखा है जहां शिक्षा सर्वोपरि हो।"
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