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'कुलभूषण जाधव का जिंदा रहना ही पाकिस्तान के हक में'

Tue, 26 Dec 2017 07:05 PM IST
मरियाना बाबर, इस्लामाबाद
मरियाना बाबर, इस्लामाबाद Updated Tue, 26 Dec 2017 07:05 PM IST
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Kulbhushan Jadhav survival is in interest of Pakistan
कुलभूषण जाधव से मुलाकात करतीं उनकी मां और पत्नी - फोटो : BBC
पाकिस्तान में फांसी की सजा पाए भारतीय कुलभूषण जाधव से उनकी पत्नी और मां को इस्लामाबाद में मिलवाया गया। पाकिस्तान ने इसे इंसानियत का तकाजा बताया है, लेकिन ये एक दिन की प्रक्रिया का नतीजा नहीं है। 
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इस मामले में पाकिस्तान बहुत सोच समझ कर फैसले ले रहा है। कुलभूषण जाधव को मौत की सजा देकर कुछ भी हासिल नहीं होने वाला। कसाब की तरह जाधव कोई इतने बड़े दहशतगर्द नहीं रहे हैं। हालांकि उन्होंने कथित तौर पर खुद ये बात कबूल की है कि 'पाकिस्तान में दहशतर्दी के मामलों में वो शामिल रहे हैं और वे भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के लिए काम करते रहे हैं।' 
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जाधव का जिंदा रहना और सेहतमंद रहना ही पाकिस्तान के हक में है। इससे पाकिस्तान को ये मौका मिलता है कि वो जाधव का हवाला देकर दुनिया और भारत को ये याद दिलाता रहे कि भारत ने बलूचिस्तान में ऐसा व्यक्ति भेजा था। 
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काउंसलर एक्सेस देने के संकेत
इस मुलाकात का दूसरा बड़ा कारण जाधव की अपील थी जिसमें उन्होंने अपनी पत्नी से मिलने की गुजारिश की थी। इस मायने में पाकिस्तान ने अलग तरीके से बर्ताव किया है। दुनिया में कहां ऐसा होता है कि एक जासूस पकड़ा जाए और वो अपने गुनाह कबूल करे और फिर उसके साथ अच्छा सलूक किया जाए। 

कुलभूषण जाधव का मामला इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस तक पहुंच चुका है। काउंसलर एक्सेस देने के मसले पर पाकिस्तान का कहना है कि जाधव उस श्रेणी में नहीं आते, वो कोई राजनयिक नहीं हैं।हालांकि इस मुलाकात की पूर्व संध्या पर पाकिस्तानी विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि हो सकता है कि पाकिस्तान उन्हें काउंसलर एक्सेस भी दे दे। 

असल में पाकिस्तान जाधव की नजीर पूरी दुनिया को दिखा रहा है। जब जाधव की पत्नी ने कहा कि वो अकेली पाकिस्तान नहीं जाना चाहती हैं तो अधिकारियों ने सोच विचार कर उनके साथ एक और महिला यानी कुलभूषण की मां को आने की इजाजत दी। बड़ी इज्जत के साथ दोनों को पाकिस्तान लाया गया और मिलवाया गया। 

पेंशन बुक पर मोदी सरकार खामोश

Kulbhushan Jadhav survival is in interest of Pakistan
कुलभूषण जाधव की मां और पत्नी - फोटो : BBC
पेंशन बुक पर भारत खामोश
दिलचस्प बात ये है कि पाकिस्तान इस मामले को लेकर बहुत आत्मविश्वास में है। छोटे मोटे एजेंट दोनों देशों में पकड़े जाते हैं लेकिन पाकिस्तान को इतना बड़ा शिकार कभी मिला नहीं था। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों ने जाधव पर दो साल तक नजर रखा था और मौका देखकर उन्हें गिरफ्तार किया। 

भारत का तर्क है कि जाधव एक रिटायर्ड फौजी हैं। लेकिन पाकिस्तान जब उनकी पेंशन बुक दिखाने की बात कहता है तो मोदी सरकार खामोशी अख्तियार कर लेती है। अगर पेंशन बुक दिखा दी जाती तो इससे जाधव का केस मजबूत ही होता। जाधव के पास से दूसरे नामों के पासपोर्ट जब्त किए गए। इसका भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। 

द्विपक्षीय संबंध
हालांकि पाकिस्तान ने कहा है कि ये मुलाकात केस जीतने के लिए नहीं, बल्कि इंसानी जज्बे के तहत कराई गई है। लेकिन असल बात ये है कि दुनिया में हर देश ऐसे कुछ विश्वासबहाली के कदम उठाता है जिससे दुनिया में उसकी छवि मानवीय स्टेट के रूप में जाए। 

बहरहाल, इस कूटनीति में जाधव की पत्नी और मां को अपने करीबी से मिलने का वक्त मिल गया। जहां तक लगता है, इस मुलाकात से दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में कोई खास बदलाव नहीं आने जा रहा है।

ये एक द्विपक्षीय लेन-देन का मसला है। इस मुलाकात के पहले ही भारत ने कुछ पाकिस्तानी कैदियों को भी रिहा किया था। 
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