कौन है बाजवा जिनसे पाकिस्तान जाकर गले मिले सिद्धू, जानें क्या है उनका कश्मीर से कनेक्शन
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पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा को कश्मीर मुद्दों का जानकार माना जाता है। उनके पास भारत के साथ लगी नियंत्रण रेखा का भी लंबा अनुभव है। वैसे वह पूर्व में कह चुके हैं कि पाकिस्तान को भारत से ज्यादा घरेलू आतंकवादियों से खतरा है। लेकिन भारत इस बात से आश्वस्त नहीं हो सकता। क्योंकि एक हकीकत यह भी है कि नियंत्रण रेखा पर पाक सेना की हर रणनीति भी उन्हीं की देख-रेख में बनती रही है।
ऐसे में नियंत्रण रेखा पार कर भारत में आतंकी भेजने की पाकिस्तानी सेना की साजिशों से वह न सिर्फ वाकिफ होंगे, बल्कि उसे अमली जामा पहनाने में भी उनकी भूमिका होगी।
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एक नजर बाजवा के पूरे कॅरियर पर :
* जनरल कमर जावेद बाजवा पाकिस्तानी सेना के 16वें सेनाध्यक्ष बनाए गए ।
* बाजवा 1982 में पाकिस्तानी सेना की सिंध रेजिमेंट में कमीशन होकर पहुंचे थे।
* बाजवा को 2011 में हिलाल-ए-इम्तियाज से नवाजा जा चुका है।
* बाजवा ने पाकिस्तान की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण कॉर्प-10 का भी नेतृत्व किया है। यह कॉर्प पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में तैनात है।
* बाजवा को कश्मीर मसले पर लंबा अनुभव है और उनके चयन का भी यही आधार माना जा रहा है।
* बाजवा को कश्मीर और उत्तरी इलाकों में लंबे समय तक बतौर सेनाधिकारी सेवा दी है, इसलिए उन्हें इन इलाकों की खासी समझ है।
* कांगों में शांति मिशन के दौरान भी ब्रिगेडियर रहते हुए बाजवा ने अपनी सेवाएं दीं। पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे पर कमर बाजवा की मदद लेना चाहेगा।
* कमर बाजवा को पाकिस्तान के उत्तरी इलाकों की भी खासी समझ है, क्योंकि वे गिलगित और बालस्टिस्तान में फोर्स कमांडर की पोस्ट पर भी रह चुके हैं।
* पाकिस्तान ब्लूचिस्तान में विद्राहियों से संघर्ष कर रहा है। ऐसे में बाजवा के सहारे वहां पकड़ मजबूत करने की कोशिश करेगा।
* कमर बाजवा बलोच रेजिमेंट में भी सेना अधिकारी रह चुके हैं।
* पाकिस्तानी सेना मुख्यालय (जीएचक्यू) में कमर बाजवा अभी ट्रेनिंग एंड डेवलपमेंट के इंस्पेक्टर जनरल थे। राहिल शरीफ भी आर्मी चीफ बनने से पहले इस पोस्ट पर रह चुके हैं।
बाजवा को इसलिए मिली पाक सेना की कमान
पाक सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा को डार्क हॉर्स कहा जाता है। बता दें कि पाकिस्तान में नया सेनाध्यक्ष नियुक्त करते समय भारत, चीन और अमेरिका में ध्यान में जरूर रखा जाता है। भारत इसलिए, क्योंकि नया सेना प्रमुख कश्मीर मामले पर क्या विचार रखता है, इसका असर पाकिस्तान की आतंरिक राजनीति तथा विदेश नीति पर पड़ता है।
वहीं चीन से समन्वय बनाए रखने के लिए, सैन्य सहयोग तथा मदद बढ़ाने का काम भी कुछ हद तक सेना प्रमुख के कंधों पर रहता है। अमेरिका से रक्षा तथा आतंकवाद से लड़ने के नाम पर मिलने वाली आर्थिक सहायता में भी सेना प्रमुख का किरदार बेहद अहम है।
पाकिस्तान के लिए भी खतरा माने जाते हैं बाजवा
जनरल कमर जावेद बाजवा की भूमिका डार्क हॉर्स जैसी है, जिस पर सभी की नजर है। दरअसल बाजवा इस समय पाकिस्तानी सेना मुख्यालय जीएचक्यू में जिस पद पर हैं, उसी पद पर पहले राहील शरीफ भी थे। यहां रहते हुए पाकिस्तानी सेना की सबसे बड़ी विंग 10 कॉर्प्स को कंट्रोल किया जाता है, जिसके जिम्मे एलओसी की सुरक्षा है।
दरअसल बाजवा कश्मीर ऑपरेशंस पर बेहद रुचि लेते हैं और कट्टर विचारधारा के हैं। इस वजह से एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि सेना प्रमुख का ओहदा उन्हें मिला तो वो खुद अपने मुल्क पाकिस्तान के लिए भी खतरा बन सकते हैं। एलओसी पर अभी चल रहे ऑपरेशंस के पीछे उसका ही दिमाग बताया जा रहा है। बाजवा ने कांगो में यूएन मिशन के दौरान पूर्व भारतीय थलसेनाध्यक्ष जनरल बिक्रम सिंह की डिवीजन में काम किया था।
बाजवा को इसलिए भी डार्क हॉर्स माना जा रहा है क्योंकि उनका संबंध क्वेटा के इंफेन्ट्री स्कूल और बलोच रेजीमेंट से है। इसी रेजीमेंट से पूर्व सेना प्रमुख जनरल याह्या खान, जनरल असलम बेग और जनरल कियानी भी आगे बढ़े थे।