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पाकिस्तान चुनाव: केवल सेना ही नहीं बल्कि एक एप भी बना इमरान खान की जीत का कारण

Mon, 06 Aug 2018 09:17 AM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Mon, 06 Aug 2018 09:17 AM IST
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Know how a powerful App helped Imran Khan in Pakistan election

पाकिस्तान चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) की सफलता के पीछे एक बड़ी रणनीति है। अभी तक विपक्षी पार्टियां इमरान की जीत के लिए सेना द्वारा की गई मदद के बारे में ही कह रही थीं कि अब इस जीत के पीछे की एक और वजह पता चली है। सेना के अलावा एक एप ने भी इमरान को जीत दिलाने में सहयोग किया है। जिससे पार्टी का वोट शेयर काफी ज्यादा बढ़ गया।

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इमरान की पार्टी पीटीआई ने एक एप की सहायता से 5 करोड़ लोगों के डाटाबेस के जरिए लोगों तक पहुंचने की योजना बनाई थी। इस योजना को विरोधी पार्टियों से छिपाया गया ताकि वह इस तरीके का इस्तेमाल न कर लें। इसका फायदा पार्टी को ये हुआ कि उसका वोट शेयर 2013 के चुनावों के मुकाबले 2018 में चुनावों में दो गुना तक बढ़ गया। उसे पहले 81 सीटें मिली थीं लेकिन इस बार 115 सीटें मिलीं। जो वोट शेयर साल 2013 में 16.92 फीसदी था वह साल 2018 में बढ़कर 31.87 फीसदी पर पहुंच गया।
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इस बार चुनाव में नवाज शरीफ की पार्टी को पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) ने 64 सीटें जीतीं और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) को 43 सीटें मिलीं। पाकिस्तान में वोटरों की कुल संख्या 10.5 करोड़ है। वहीं इस बार 48 फीसदी लोगों ने वोट डाले। यानि कि 5 करोड़ 40 लाख लोगों द्वारा वोट डाले गए।
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इसके अलावा 5 करोड़ लोगों का डाटाबेस इमरान की पार्टी के लिए सबसे बड़ा हथियार साबित हुआ। एप समर्थकों को चुनाव वाले दिन मतदान के लिए लाने में सफल रहा। जबकि पोलिंग बूथ की जानकारी देने वाली सरकार की अपनी टेलिफोन इंफर्मेशन सर्विस चुनाव के दिन कई तकनीकी परेशानियों का सामना करती रही। एप और डाटाबेस का इस्तेमाल करने वाली टीम का हिस्से रहे आमिर मुगल के मुताबिक इसका बहुत बड़ा असर रहा है। उन्होंने बताया कि पीटीआई पार्टी ने पाकिस्तान के चुनावी क्षेत्र में डाटाबेस तैयार करने के लिए टीमें बनाईं, इसके बाद वोटर्स की पहचान की गई और फिर यह सुनिश्चित किया गया कि वह सभी चुनाव वाले दिन वोट देने जाएं।


साल 2013 में चुनावों में हार मिलने के बाद पार्टी ने एक छोटी टेक टीम बनाई। इसके बाद नेशनल असेंबली के लिए 150 चुनावी क्षेत्रों की पहचान की गई। इनका डाटाबेस इकट्ठा किया गया। एप में वोटर के पहचान पत्र का नंबर डालने के बाद उस परिवार का पता, परिवार के सदस्यों के बारे में जानकारी और उन्हें वोट देने कहां जाना है इस बात की जानकारी एकत्रित की गई। अपनी पहले की हार से सबक ले पार्टी ने इस बार जीत के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। 

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