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यूरोप के बाजारों में पैठ के लिए भारत को पाकिस्तान की दरकार : जंजुआ
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Updated Sat, 30 Jun 2018 05:35 AM IST
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पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) नसीर जंजुआ ने कहा कि भारत की तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था को अगर मध्य एशिया के जरिये यूरोप के बाजारों में पैठ बनानी है तो उसे पाकिस्तान के साथ सम्मानजनक रिश्ते कायम करने होंगे। पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर पीस स्टडीज द्वारा आयोजित ‘दक्षिण एशिया में संपर्क व भौगोलिक अर्थव्यवस्था’ कांफ्रेंस में जंजुआ ने कहा कि अर्थव्यवस्था और सुरक्षा एक सिक्के के दो पहलू हैं।
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दोनों के एक-दूसरे से अर्थपूर्ण संबंध हैं। दक्षिण एशियाई देशों में संपर्क बढ़ाने के लिए स्थायित्व जरूरी है। आर्थिक वृद्धि की रफ्तार को दक्षिण एशियाई देशों के बीच संपर्क के जरिये बढ़ाया जा सकता है।
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सीपीईसी में भारत की सहभागिता जरूरी
जंजुआ ने कहा कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) में भारत की सहभागिता के बिना क्षेत्र में मुक्त व्यापार मुश्किल है। कांफ्रेंस में भारत और पाकिस्तान के कई विद्वानों ने हिस्सा लिया। दोनों देशों के विद्वानों ने पुरानी प्रतिद्वंद्विता और अस्थायित्व के बीच संपर्क बढ़ाने के लक्ष्य को हासिल करने में आने वाली मुश्किलों पर चर्चा की।
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छोड़ देनी चाहिए अतीत की कड़वाहट
पाक के पूर्व एनएसए ने कहा कि दक्षिण एशिया की भू-आर्थिक वृद्धि में पाकिस्तान की अहम भूमिका है। पाकिस्तान दक्षिण एशियाई देशों के बीच संपर्क में मदद कर सकता है। भारत भी पाक को साथ लिए बिना इन देशों से कारोबार नहीं कर सकता। पूर्व एनएसए ने कहा कि दोनों देशों को अतीत की कड़वाहट छोड़ देनी चाहिए।
एक-दूसरे के कारोबार में अटकाते हैं रोड़ा
लालकृष्ण आडवाणी के सलाहकार रहे सुधींद्र कुलकर्णी ने कहा कि दक्षिण एशिया दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी, सबसे कम एकीकरण और सबसे ज्यादा गरीब क्षेत्र है। दक्षिण एशियाई देश अकसर एक-दूसरे के कारोबार में रोड़े अटकाते हैं। क्षेत्र के देशों की एक-दूसरे के बारे में घिसी-पिटी धारणाओं और प्रतिद्वंद्विता के कारण संपर्क व कारोबार पर बुरा असर पड़ता है।
विश्वास बहाली के कदम उठाने जरूरी
कुलकर्णी ने कहा कि क्षेत्र के कुछ देश सीपीईसी और बेल्ट रोड इनिशिएटिव की बात तो करते हैं, लेकिन इनके साथ सांस्कृतिक संपर्क और सीमापार अर्थव्यवस्था को जोड़ने का असर नजरअंदाज कर देते हैं। भारत के एस डिसूजा ने कहा कि क्षेत्र में संपर्क बढ़ाने के लिए विश्वास बहाली के कदम उठाए जाने जरूरी हैं।