पाक चुनाव को धर्म की आग में झोक रहे कट्टर इस्लामी, हाफिज ने उतारे 200 से ज्यादा उम्मीदवार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पाकिस्तान में 25 जुलाई को होने वाले आम चुनाव को कट्टरपंथी इस्लामी, धर्म की आग में झोक रहे हैं। इसमें सबसे आगे 2008 के मुंबई आतंकी हमलों का साजिशकर्ता हाफिज सईद है। मान्यता न मिलने के बावजूद हाफिज बड़े पैमाने पर ‘मिली मुस्लिम लीग’ का चुनाव प्रचार कर रहा है और 200 से ज्यादा उम्मीदवारों को उतार दिया है।
जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और पीटीआई नेता इमरान खान मुकाबले में हैं। हालांकि संख्या के लिहाज से इस बार कट्टर इस्लामी समूह पाक की मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति को बदलने की क्षमता भी रखते हैं। 20 करोड़ 80 लाख की आबादी वाले पाकिस्तान में ये पार्टियां लगातार पश्चिम विरोधी बयानबाजी और सख्त शरिया कानूनों की पैरवी कर रही हैं।
पाकिस्तानी सरकार को गद्दार बताते हुए हाफिज ने इस महीने लाहौर में एक रैली के दौरान खुलेआम कहा था कि अमेरिकी नौकरों की राजनीति खत्म होने वाली है। आम चुनाव में धार्मक पार्टियों के प्रवेश को पाक सेना की साजिश माना जा रहा है। वह हथियार बंद इस्लामियों व अन्य चरमपंथियों को राजनीति के जरिए मुख्यधारा में लाने की कोशिश रही है।
उदार और धर्मनिरपेक्ष पाकिस्तानियों का कहना है कि हो सकता है ये पार्टियां कम सीटें जीतें लेकिन धार्मिक पार्टी के उम्मीदवारों की बड़ी संख्या की वजह से चुनावी एजेंडे में बदलाव आया है। नई पार्टियां लगातार विपक्षियों पर ईशनिंदा या देशद्रोह जैसे आरोप लगा रही हैं।
धार्मिक पार्टियों ने उतारे 1,500 से अधिक उम्मीदवार
धार्मिक पार्टियों ने राष्ट्रीय एवं प्रांतीय विधानसभाओं के लिए पिछले आम चुनाव 2013 में मात्रा कुछ सौ उम्मीदवार खड़े किए थे, वहीं इस चुनाव में उनकी संख्या बढ़कर 1,500 से अधिक हो चुकी है। हालांकि असली समस्या वे नई इस्लामी पार्टियां हैं, जिन पर आतंकियों से संबंध होने के आरोप लगते रहे हैं।
तहरीक-ए-लब्बैक नाम की नई पार्टी का नारा ही ‘ईशनिंदा के आरोपियों को मौत मिले’ है। पंजीकृत होने के बावजूद इस पार्टी को उम्मीदवार खड़े करने पर पाबंदी है। फिर भी 566 उम्मीदवार उतारने वाली यह पार्टी पीएमएल-एन को ईशनिंदा का आरोपी बताती है।
वहीं पीटीआई नेता इमरान खान कहते हैं कि ‘आप मुस्लिम नहीं हो सकते हैं अगर आप यह नहीं मानते कि पैगंबर, हमारे पैगंबर, आखिरी पैगंबर थे। इसलिए इसका समर्थन करना अपने धर्म का समर्थन करना है।’